मुंबई : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में मुंबई पुलिस की जांच में एक नया और संवेदनशील मोड़ आया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, परीक्षा के दौरान नकल के आरोप में पकड़े जाने के बाद साहिल ने संस्थान को दिए अपने लिखित बयान में गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी थी और भविष्य के लिए एक और मौका देने की गुहार लगाई थी।
लिखित बयान और माफी
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आईआईटी बॉम्बे की आंतरिक अनुशासन नीति के तहत परीक्षा में गड़बड़ी या नकल के मामलों में छात्रों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा जाता है। इस प्रक्रिया के तहत साहिल ने अपना लिखित जवाब सौंपा था, जिसमें उसने अपनी गलती स्वीकार की थी, माफी मांगी थी और अधिकारियों से अपने करियर को देखते हुए नरमी बरतने का अनुरोध किया था।
दोस्त को सुनाई थी आपबीती
जांच में सामने आया है कि परीक्षा के तुरंत बाद साहिल ने अपनी एक महिला मित्र को फोन किया था। बातचीत के दौरान उसने बताया था कि थर्मोडायनामिक्स का उसका पेपर अच्छा नहीं हुआ था और वह परीक्षा के इस पूरे घटनाक्रम और शैक्षणिक दबाव को लेकर अत्यधिक तनाव में था।
क्या था पूरा मामला?
महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के रहने वाले 22 वर्षीय साहिल वाकोडे एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के द्वितीय वर्ष के छात्र थे। उन्हें 18 सितंबर को मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान कथित तौर पर मोबाइल फोन इस्तेमाल करने के आरोप में पकड़ा गया था। इस घटना के कुछ ही घंटों बाद वह अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए थे।
परिवार के आरोप और जांच
घटना के बाद साहिल के परिजनों ने संस्थान पर मानसिक प्रताड़ना और जातिगत भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार ने संस्थान के निदेशक शिरीष केदारे और प्रोफेसर सूर्यनारायण डुला के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही है। पुलिस अब तक इस सिलसिले में संस्थान के प्रोफेसरों, प्रशासनिक अधिकारियों और छात्र-छात्राओं समेत 40 से अधिक लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है। इस tragic घटना के बाद संस्थान ने कैंपस में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को बेहतर बनाने के लिए कई सुधारात्मक कदम भी उठाए हैं।