- काठमांडू, 30 मार्च 2026 – नेपाल की नई सरकार ने दलित तथा ऐतिहासिक रूप से बहिष्कृत समुदायों पर सदियों से हुए अन्याय, जातिगत भेदभाव और छुआछूत के लिए राज्य की ओर से औपचारिक माफी (क्षमायाचना) मांगने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। यह कदम प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन शाह) के नेतृत्व वाली सरकार के पहले कैबिनेट बैठक में लिया गया।
सरकार ने 100-पॉइंट शासकीय सुधार एजेंडा पास किया, जिसमें बिंदु नंबर 5 में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान है। इसमें कहा गया है कि राज्य, समाज और नीतिगत संरचनाओं द्वारा दलित समुदाय पर हुए अन्याय और अवसर वंचना को औपचारिक रूप से स्वीकार किया जाएगा। इसके साथ ही 15 दिनों के अंदर राज्य की ओर से औपचारिक माफी मांगी जाएगी और एक विशेष सुधार-उन्मुख कार्यक्रम घोषित किया जाएगा।

सरकार का बयान
सरकार ने कहा, “दलित तथा ऐतिहासिक रूप से बहिष्कृत समुदायों पर राज्य, समाज और नीतिगत संरचनाओं से हुए अन्याय, विभेद और अवसर वंचना को स्वीकार करते हुए सामाजिक न्याय, समावेशी पुनर्स्थापना और ऐतिहासिक मेलमिलाप की नई नींव रखी जाएगी।”
शिक्षा, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी मंत्री सस्मिता पोखरेल (सरकार की प्रवक्ता) ने इस फैसले की जानकारी दी। यह फैसला राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (Rastriya Swatantra Party) के चुनावी वादों और युवा आंदोलन की भावना को आगे बढ़ाते हुए लिया गया है।
बालेन शाह की सरकार का संदर्भ
बालेन शाह (जिन्हें पहले काठमांडू के मेयर के रूप में जाना जाता है) हाल ही में नेपाल के प्रधानमंत्री बने हैं। उनकी सरकार युवा नेतृत्व, सुशासन, भ्रष्टाचार मुक्ति और सामाजिक न्याय पर जोर दे रही है। यह 100-पॉइंट एजेंडा उनकी सरकार का पहला बड़ा कदम है, जिसमें भ्रष्टाचार रोकथाम, नौकरशाही सुधार, युवा आंदोलन पीड़ितों को न्याय और अब दलित समुदाय को ऐतिहासिक न्याय शामिल है।
यह नेपाल के इतिहास में पहली बार है जब राज्य स्तर पर दलित समुदाय के प्रति औपचारिक माफी का ऐलान किया गया है।
दलित संगठनों और कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया
दलित अधिकारकर्मी और विभिन्न संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे “दशकों के संघर्ष का नतीजा” बताया। हालांकि, कई कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि माफी केवल कागजी न रहे – सुधार कार्यक्रम का सही क्रियान्वयन और दलित समुदाय के आर्थिक-सामाजिक उत्थान के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
एक दलित नेता ने कहा, “माफी अच्छा शुरूआती कदम है, लेकिन असली बदलाव तब आएगा जब छुआछूत, शिक्षा और रोजगार में भेदभाव खत्म होगा।”
महत्व
- नेपाल में दलित समुदाय लंबे समय से जातिगत हिंसा, छुआछूत और सामाजिक बहिष्कार का शिकार रहा है।
- यह कदम संवैधानिक प्रावधानों (जैसे अनुच्छेद 40) को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सिफारिशों को लागू करने की दिशा में माना जा रहा है।
- बालेन शाह खुद मधेशी पृष्ठभूमि से आते हैं और उन्होंने जाति-आधारित पारंपरिक राजनीति से दूरी बनाए रखी है।
अभी तक: माफी का औपचारिक कार्यक्रम 15 दिनों के अंदर घोषित होने वाला है। पूरा 100-पॉइंट एजेंडा अच्छे शासन, सेवा वितरण और युवा केंद्रित सुधारों पर केंद्रित है।