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IIT बॉम्बे छात्र खुदकुशी मामला: साहिल के पिता का बड़ा खुलासा— ‘बेटे का हुआ था ISRO में चयन, दोषियों को तुरंत गिरफ्तार कर फास्ट-ट्रैक कोर्ट में चले मुकदमा’

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विशेष संवाददाता, मुंबई
26 सितंबर, 2026

मुंबई: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे (IIT Bombay) के बी.टेक द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की दुखद खुदकुशी के मामले में एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ आया है। साहिल के पिता रवींद्र वाकोडे ने संस्थान प्रशासन और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए घटना के जिम्मेदार लोगों की तुरंत गिरफ्तारी और मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट (त्वरित न्यायालय) में चलाने की मांग की है।

बांद्रा क्राइम ब्रांच के समक्ष करीब 8 घंटे तक अपना बयान दर्ज कराने के बाद, बेहद भावुक और आक्रोशित रवींद्र वाकोडे ने साहिल की शैक्षणिक उपलब्धियों का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि साहिल एक बेहद होनहार छात्र था, जिसका भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए चयन हो चुका था। इसके अलावा, वह रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के एक आगामी बड़े इवेंट में 50 सदस्यीय टीम का नेतृत्व करने वाला था।

साहिल के पिता ने देश के इस प्रतिष्ठित संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा, “जो बच्चा इसरो जैसी संस्था के लिए चुना गया हो और जो 50 छात्रों की टीम को लीड करने की क्षमता रखता हो, वह अचानक ऐसा कदम कैसे उठा सकता है? इतने नामी संस्थान में हमारे बच्चे के साथ ऐसा क्या किया गया?” परिवार का सीधा आरोप है कि परीक्षा में कथित नकल के नाम पर छात्र को मानसिक रूप से इस कदर प्रताड़ित और अपमानित किया गया कि वह आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर हो गया।

पीड़ित परिवार की मुख्य मांगें और अब तक की कार्रवाई

  • दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग: परिवार का कहना है कि आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ पर्याप्त आधार होने के बावजूद पुलिस सख्त कदम उठाने में देरी कर रही है। उन्होंने मांग की है कि मामले से जुड़े जिम्मेदार लोगों को तुरंत सलाखों के पीछे भेजा जाए।
  • फास्ट-ट्रैक ट्रायल की अपील: रवींद्र वाकोडे ने महाराष्ट्र सरकार और न्यायपालिका से इस मामले को फास्ट-ट्रैक कोर्ट में ले जाने की अपील की है, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय के लिए सालों तक अदालतों के चक्कर न काटने पड़ें।
  • संस्थान की भूमिका पर गहराया संदेह: साहिल के इसरो चयन और रोबोटिक्स इवेंट में नेतृत्व की बात सामने आने के बाद छात्र संगठनों का विरोध और तेज हो गया है। छात्रों का कहना है कि इतने मेधावी छात्र को अपराधी की तरह ट्रीट करना संस्थान की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

इस मामले में आरोपी इनविजिलेटर और पूर्व डीन प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला के खिलाफ पहले ही SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम और आत्महत्या के लिए उकसाने (BNS की धारा 108) के तहत मामला दर्ज है। हालांकि, आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम का दावा है कि प्रोफेसर केवल परीक्षा में चैटजीपीटी (ChatGPT) के जरिए हो रही नकल को रोकने की अपनी आधिकारिक ड्यूटी कर रहे थे। फिलहाल, बढ़ते दबाव के बीच प्रोफेसर को प्रशासनिक पद से हटाकर लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया है और मुंबई क्राइम ब्रांच मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

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