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सह्याद्री पर्वत श्रृंखला में खनन और जंगल कटाई पर तुरंत रोक लगे, यह 100% शुद्ध ऑक्सीजन का केंद्र: प्रकाश आंबेडकर

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वंचित बहुजन आघाडी (VBA) के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने बढ़ते पर्यावरण संकट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सह्याद्री की पहाड़ियों में चल रहे सभी खनन और खुदाई कार्यों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है. आंबेडकर ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर जारी स्थानीय विरोध प्रदर्शनों का खुला समर्थन करते हुए खुद इस आंदोलन में कूदने का ऐलान किया है.

मुंबई/पुणे:महाराष्ट्र की प्राकृतिक लाइफलाइन कहे जाने वाले सह्याद्री (पश्चिमी घाट) पर्वत क्षेत्र में व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए हो रही भारी वनों की कटाई और खनन के खिलाफ स्थानीय जनता का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा है. वंचित बहुजन आघाडी (VBA) के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने इस बढ़ते पर्यावरण संकट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सह्याद्री की पहाड़ियों में चल रहे सभी खनन और खुदाई कार्यों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है. आंबेडकर ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर जारी स्थानीय विरोध प्रदर्शनों का खुला समर्थन करते हुए खुद इस आंदोलन में कूदने का ऐलान किया है.

अपने आधिकारिक बयान में प्रकाश आंबेडकर ने सह्याद्री पर्वत श्रृंखला की महत्ता को रेखांकित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को (UNESCO) की वैज्ञानिक रिपोर्ट का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि सह्याद्री पर्वत श्रृंखला एक अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है और यह एक ऐसा प्राकृतिक केंद्र है जो 100% शुद्ध ऑक्सीजन का निर्माण करता है. उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि यूनेस्को के अनुसार, मानसून की समाप्ति के बाद—यानी सितंबर से लेकर मार्च के महीनों के दौरान—इस पर्वत क्षेत्र की चोटियों पर बड़े पैमाने पर 100% शुद्ध ऑक्सीजन का उत्पादन होता है. यही मुख्य वजह है कि पर्यावरण की संवेदनशीलता को देखते हुए इस पूरे क्षेत्र में किसी भी तरह के खनन और पहाड़ों की खुदाई पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाना आवश्यक है.

इस बीच, रायगढ़ और पुणे जिलों के विभिन्न हिस्सों में इस प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर स्थानीय विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य और कर्जत के नजदीकी संवेदनशील वन क्षेत्रों में प्रस्तावित एक बड़ी जलविद्युत परियोजना के लिए हजारों पेड़ों की कटाई का स्थानीय ग्रामीण, पर्यावरणविद और आदिवासी समुदाय कड़ा विरोध कर रहे हैं. कर्जत में ‘टोरेंट हटाओ, कर्जत बचाओ’ के नारों के साथ बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. आंदोलनकारियों का कहना है कि अनियंत्रित विकास और अंधाधुंध खनन के चलते इस संवेदनशील ईकोसिस्टम में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है, जिससे स्थानीय आदिवासी गांवों का अस्तित्व और वन्य जीवों का निवास स्थान गहरे संकट में आ गया है.

प्रकाश आंबेडकर ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि विकास के नाम पर उद्योगपतियों के फायदे के लिए इस बेहद संवेदनशील क्षेत्र का पर्यावरण किसी भी कीमत पर खराब नहीं होना चाहिए. सह्याद्री की सदियों पुरानी प्राकृतिक संपदा को जैसा है, वैसा ही सुरक्षित और अक्षुण्ण रखा जाना बेहद जरूरी है. स्थानीय संगठनों और ‘सह्याद्री बचाओ’ आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने खनन और वन कटाई की स्वीकृतियां तुरंत रद्द नहीं कीं, तो पूरे महाराष्ट्र में इस आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा. दूसरी ओर, प्रशासन इस परियोजना को पर्यावरण के अनुकूल बताते हुए कानूनी प्रक्रियाओं के तहत मंजूरी मिलने की दलील दे रहा है, जिसके कारण विकास बनाम पर्यावरण संरक्षण का यह विवाद लगातार गरमाता जा रहा है.

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