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हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद पर खरगे का मोदी-शाह पर हमला, बोले- ‘दोनों चुप बैठे हैं’; 24 दिन बाद भी FIR पर उठाए सवाल

by Admin
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खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि “हल्द्वानी में हुए शुद्धिकरण के शर्मनाक मामले पर नरेंद्र मोदी और अमित शाह दोनों चुप बैठे हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों नेता ऐसी बुरी घटनाओं पर कभी कुछ नहीं बोलते।

नई दिल्ली, 3 सितंबर 2026। हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद कथित तौर पर हुए ‘शुद्धिकरण’ को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि इस शर्मनाक मामले पर दोनों नेता चुप हैं। उन्होंने राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी के मामले और दलितों तथा महिलाओं के खिलाफ अत्याचार का भी उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाया।

खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि “हल्द्वानी में हुए शुद्धिकरण के शर्मनाक मामले पर नरेंद्र मोदी और अमित शाह दोनों चुप बैठे हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों नेता ऐसी बुरी घटनाओं पर कभी कुछ नहीं बोलते।

8 अगस्त की रैली के बाद शुरू हुआ विवाद

पूरा विवाद 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई कांग्रेस की ‘विजय शंखनाद’ रैली के बाद शुरू हुआ। इस रैली को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संबोधित किया था। रिपोर्टों के मुताबिक, रैली के दो दिन बाद एक हिंदूवादी संगठन ने उसी मैदान में हवन-यज्ञ किया और गंगाजल का छिड़काव किया। कांग्रेस ने इसे खरगे के दलित होने से जोड़ते हुए जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया।

दूसरी ओर, भाजपा और आयोजन से जुड़े लोगों ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया। भाजपा की ओर से कहा गया कि रैली के दौरान कथित तौर पर आपत्तिजनक नारे लगाए गए और मैदान में गंदगी हुई थी, जिसके बाद शुद्धिकरण कराया गया। भाजपा ने इसे खरगे की जाति से जोड़ने को गलत बताया।

13 अगस्त को राज्यसभा में खरगे ने उठाया था मुद्दा

हल्द्वानी की घटना को खरगे ने 13 अगस्त को राज्यसभा में भी उठाया था। उन्होंने कहा था कि उन्होंने रैली में किसी जाति या धर्म का नाम लेकर बात नहीं की थी, इसके बावजूद उनके भाषण के बाद मंच का कथित तौर पर शुद्धिकरण किया गया।

खरगे ने इसे अपने साथ-साथ दलित समाज के अपमान और संविधान में निहित समानता के सिद्धांत से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की थी। उस समय भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने घटना पर दुख जताते हुए कहा था कि भाजपा ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती और मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

24 दिन बाद भी FIR नहीं होने पर खरगे ने नड्डा को लिखी चिट्ठी

विवाद खत्म होने के बजाय लगातार राजनीतिक मुद्दा बना रहा। 3 सितंबर को खरगे ने भाजपा के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा को पत्र लिखकर कहा कि घटना के 24 दिन बाद भी FIR दर्ज नहीं हुई है। उन्होंने मामले में तत्काल कानूनी कार्रवाई और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

खरगे ने अपने ताजा बयान में इसी पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की चुप्पी पर सवाल उठाया है।

कांग्रेस ने इसे दलित सम्मान और संविधान से जोड़ा

कांग्रेस इस मामले को केवल एक राजनीतिक विवाद के रूप में नहीं, बल्कि जातिगत भेदभाव, दलित सम्मान और संवैधानिक समानता के सवाल के रूप में उठा रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि किसी व्यक्ति के कार्यक्रम के बाद किसी स्थल को ‘शुद्ध’ किए जाने की घटना सामाजिक समानता के लिए गंभीर सवाल खड़े करती है।

इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी विरोध प्रदर्शन किए हैं। 30 अगस्त को दिल्ली में RSS मुख्यालय के बाहर यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन में हल्द्वानी प्रकरण को लेकर विरोध जताया गया था।

राहुल गांधी के बयान के बाद विवाद और बढ़ा

हल्द्वानी मामले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी भाजपा और RSS पर निशाना साधा था। इसके बाद उत्तराखंड पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज की। इस कार्रवाई ने विवाद को और राजनीतिक रंग दे दिया। वहीं कांग्रेस ने भी हल्द्वानी में कथित ‘शुद्धिकरण’ के मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर पुलिस में शिकायत दी और प्रदर्शन किया।

इसी बीच भाजपा की ओर से कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया गया है। भाजपा नेताओं ने कहा है कि शुद्धिकरण की घटना को खरगे की जाति से जोड़ना गलत है और कांग्रेस इस मुद्दे के जरिए राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।

अब मोदी-शाह की चुप्पी पर खरगे का सवाल

अब खरगे के ताजा बयान से विवाद एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। खरगे ने हल्द्वानी की घटना के साथ-साथ दलितों और महिलाओं के खिलाफ अत्याचार तथा राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी के मामले का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की जवाबदेही पर सवाल उठाया है।

इस पूरे विवाद में कांग्रेस जहां इसे सामाजिक भेदभाव और संवैधानिक मूल्यों का मामला बता रही है, वहीं भाजपा आरोपों को खारिज कर रही है। ऐसे में हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’ विवाद आने वाले दिनों में कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव का एक और बड़ा मुद्दा बन सकता है।

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