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महाराष्ट्र में सूखे को लेकर अंजलिताई आंबेडकर की सरकार से अपील, कहा – प्राकृतिक आपदा को मानव निर्मित संकट न बनने दें

by Admin
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मुंबई | महाराष्ट्र में सूखे की गंभीर स्थिति के बीच वंचित बहुजन आघाड़ी की राष्ट्रीय नेता प्रा. अंजलिताई आंबेडकर ने राज्य सरकार से किसानों और आम जनता के हित में तत्काल कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सूखा एक प्राकृतिक आपदा है, लेकिन सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह प्राकृतिक आपदा आगे चलकर एक और बड़े मानव निर्मित संकट में तब्दील न हो।

वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) की ओर से सोशल मीडिया पर साझा किए गए उनके बयान में सरकार को सूखा प्रभावित किसानों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहने और समय रहते आवश्यक राहत उपाय करने का संदेश दिया गया है।

किसानों की परेशानी पर सरकार की जिम्मेदारी अहम

महाराष्ट्र के कई हिस्सों में कम बारिश और फसल नुकसान के कारण किसानों के सामने आर्थिक संकट गहराया है। विशेष रूप से मराठवाड़ा और विदर्भ के क्षेत्रों में बारिश की कमी का असर खेती, पेयजल और पशुओं के चारे की उपलब्धता पर पड़ा है।

ऐसे हालात में किसानों को समय पर आर्थिक सहायता, फसल नुकसान का उचित मुआवजा, पीने के पानी और पशुओं के चारे की व्यवस्था उपलब्ध कराना सरकार के सामने बड़ी चुनौती है।

वंचित बहुजन आघाड़ी का 8 नवंबर को ‘काली दिवाली’ आंदोलन

सूखे से प्रभावित किसानों और मजदूरों के मुद्दे को लेकर वंचित बहुजन आघाड़ी ने 8 नवंबर 2026 को महाराष्ट्रभर में ‘काली दिवाली’ आंदोलन करने की घोषणा की है।

पार्टी के कार्यक्रम के अनुसार, राज्य के सभी जिलाधिकारी कार्यालयों के सामने दोपहर 1 बजे से रात 8 बजे तक प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान किसानों और श्रमिकों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए चटनी-भाकरी खाकर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया जाएगा।

वंचित बहुजन आघाड़ी ने किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी, उचित फसल मुआवजा, पेयजल और पशुओं के चारे की व्यवस्था सहित सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए ठोस राहत उपायों की मांग उठाई है।

सरकार से समय रहते कदम उठाने की अपील

प्रा. अंजलिताई आंबेडकर के बयान ने सूखे की स्थिति में सरकारी नीतियों और राहत व्यवस्था की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया है। उनका संदेश स्पष्ट है कि प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण पैदा हुए संकट को प्रशासनिक लापरवाही या राहत में देरी के कारण और गंभीर नहीं होने देना चाहिए।

अब देखना होगा कि महाराष्ट्र सरकार सूखा प्रभावित किसानों, खेत मजदूरों और ग्रामीण परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए कौन से अतिरिक्त कदम उठाती है।

सूखे से जूझ रहे किसानों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समय पर राहत, उचित मुआवजा और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता है।

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