Home » राजधानी में सियासी और कानूनी भूचाल: जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के पीछे सुप्रीम कोर्ट का कौन सा आदेश? दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में खोली पूरी परतें

राजधानी में सियासी और कानूनी भूचाल: जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के पीछे सुप्रीम कोर्ट का कौन सा आदेश? दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में खोली पूरी परतें

by Admin
0 comments 48 views

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों के सबसे बड़े केंद्र रहे जंतर-मंतर को अचानक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने का राज अब पूरी तरह से बेनकाब हो गया है। इस संवेदनशील और ज्वलंत मामले में दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट कर दिया है कि आखिर किस बड़े न्यायिक आदेश के तहत यह कदम उठाया गया है। पुलिस का दावा है कि यह बदलाव किसी मनमाने प्रशासनिक फैसले का परिणाम नहीं, बल्कि सीधे तौर पर सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) के निर्देशों का पालन है।

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट में रखा पुलिस का पक्ष

दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस अमित महाजन की अदालत में इस मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए देश के जाने-माने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने विस्तृत दलीलें रखीं। उन्होंने अदालत को बताया कि दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में कानून-व्यवस्था, यातायात व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के उस ऐतिहासिक आदेश को लागू किया है, जिसमें विरोध-प्रदर्शन के लिए सुव्यवस्थित और वैकल्पिक स्थलों की पहचान करने को कहा गया था।

आखिर क्यों सुलग उठा था यह मामला?

यह पूरा कानूनी विवाद तब तूल पकड़ा जब हाल ही में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ द्वारा किए गए एक विरोध-प्रदर्शन के कारण दिल्ली के कई अति-व्यस्त मेट्रो स्टेशन अचानक बंद करने पड़े और कई रेलगाड़ियों को रद्द या डायवर्ट करना पड़ा। इस अराजकता और आम जनता को हुई भारी असुविधा के खिलाफ अदालतों में याचिकाएं दाखिल की गईं। इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कड़ा रुख अपनाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में दो टूक कहा था कि अब वह वक्त आ गया है जब शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करने वाले नागरिकों को बुनियादी और नागरिक सुविधाएं मुहैया कराई जानी चाहिए। इसके लिए ऐसी जगहों को चिन्हित किया जाना बेहद जरूरी है जहाँ धरना-प्रदर्शनकारियों के लिए पानी, शौचालय और अन्य जरूरी बुनियादी इंतजाम किए जा सकें।

दिल्ली पुलिस ने उठाए कौन से कदम?

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कोर्ट को यह भी बताया कि सर्वोच्च अदालत के इसी निर्देश के बाद दिल्ली पुलिस और संबंधित प्रशासनिक निकायों ने ऐक्शन लेते हुए जंतर-मंतर को मुख्य प्रदर्शन स्थल की सूची से बाहर कर दिया है और उसकी जगह शहर में 3 वैकल्पिक और सुविधामय जगहों की पहचान की प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाया है। पुलिस का मानना है कि इससे न केवल प्रदर्शनकारियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी, बल्कि आम जनता और यात्रियों को भी जाम और दुव्यवस्था से राहत मिलेगी।

किसकी याचिका पर गरमाई सियासत?

यह पूरा मामला तब अदालत की सुर्खियों में आया जब इंडियन यूथ कांग्रेस के प्रमुख उदय भानु चिब ने दिल्ली पुलिस के उस फैसले को सीधे तौर पर चुनौती दी, जिसके तहत उन्हें जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था। यूथ कांग्रेस के इस कदम ने इस नीतिगत बदलाव को एक बड़े कानूनी संघर्ष में बदल दिया है। फिलहाल, हाई कोर्ट इस मामले में सभी पक्षों की दलीलों को गंभीरता से सुन रहा है, और इस फैसले से दिल्ली में भविष्य के आंदोलनों की दिशा तय होने की पूरी उम्मीद है।

You may also like

Leave a Comment