नागपुर: पावन धम्म दीक्षा दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर शाक्या धम्मदिना ने देश एवं दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों को हार्दिक अनंत मंगलकामनाएं प्रेषित की हैं। इस विशेष अवसर पर अपने विचार साझा करते हुए उन्होंने भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश के पावन पालि सूत्रों का उल्लेख किया और बोधिसत्व भारत रत्न डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर जी के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा व नमन व्यक्त किया।
शाक्या धम्मदिना ने वाराणसी के ऋषिपतन (सारनाथ) स्थित मृगदाव में भगवान बुद्ध द्वारा प्रथम धम्मचक्र प्रवर्तन के क्षणों को याद करते हुए पालि ग्रन्थ के सूत्र “एतं भगवता बाराणसियं इसिपतने मिगदाये अनुत्तरं धम्मचक्कं पवत्तितं अप्पटिवत्तियं…” का स्मरण कराया। उन्होंने कहा कि Tathagata बुद्ध द्वारा स्थापित इस अनुत्तर धम्मचक्र को संसार की कोई भी शक्ति रोक नहीं सकती। इसी पावन धम्म के मार्ग को आधुनिक युग में परम पूजनीय डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर जी ने संपूर्ण भारत को दिखाकर एक नया जीवन और दिशा प्रदान की।
अपने संदेश में शाक्या धम्मदिना ने धम्म दीक्षा दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी से बाबा साहेब द्वारा दी गई ऐतिहासिक 22 प्रतिज्ञाओं को सहर्ष ग्रहण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ये 22 प्रतिज्ञाएं मनुष्य को मानसिक और सामाजिक गुलामी से पूरी तरह मुक्त करने का मार्ग हैं। प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं के जीवन को बुद्ध, धम्म और संघ की प्रज्ञा से आलोकित करने का संकल्प लेना चाहिए, जिससे बाबा साहेब के बौद्धमय भारत के सपने को साकार किया जा सके।
उन्होंने आगे कहा कि आज के समय में समाज को बुद्ध, धम्म और संघ की शरण में आकर अपने चित्त को करुणा और मैत्री के भाव से भरने की अत्यधिक आवश्यकता है। मनुष्यों के साथ-साथ सभी जीवों (सत्वों) की दुख-मुक्ति और उनके कल्याण के लिए खुद को समर्पित करना ही सच्चे धम्म का पालन है।
अपने विचारों को ‘बोधिपक्खिय यानी बोधि के पंख’ का भाव देते हुए उन्होंने यह संदेश दिया कि प्रज्ञा, करुणा और समता के पंखों पर चलकर ही हम समाज में व्याप्त दुखों को दूर कर सकते हैं और एक समतामूलक, जागरूक राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।