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आत्महत्या नहीं ,यह सिस्टम द्वारा हत्या है : नीट छात्रों की आत्महत्या पर बोले राहुल गाँधी

by Admin
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लखीमपुर खीरी में एक छात्र की आत्महत्या का मामला सामने आया है. परिजनों के मुताबिक छात्र ऋतिक नीट की परीक्षा रद्द होने से काफी परेशान था. वहीं ऋतिक की मौत के बाद से परिवार में कोहराम मचा हुआ है.लखीमपुर खीरी के 21 साल के ऋतिक मिश्रा के ये आख़िरी शब्द थे। तीसरी बार NEET देने वाला यह बच्चा, परीक्षा रद्द होते ही टूट गया। ऐसे ही गोवा में भी एक NEET अभ्यर्थी ने जान दे दी। ये बच्चे परीक्षा से नहीं हारे, इन्हें एक भ्रष्ट तंत्र ने मारा है।

छात्र के चाचा ने बताया कि काफी तैयारी करने के बाद ऋतिक ने नीट की परीक्षा दी थी और पेपर लीक होने के बाद परीक्षा कैंसिल हो गई, इससे ऋतिक परेशान था. हालांकि पुलिस इस पूरे मामले की जांच में जुट गई है.

नीट एग्जाम रद्द होने से था परेशान
जानकारी के मुताबिक सदर कोतवाली इलाके के गंगोत्री नगर मोहल्ले का रहने वाला छात्र ऋतिक मिश्रा ने कमरे में फंदे से लटकर कर आत्महत्या कर ली. मौत से परिवार में कोहराम मच गया है. परिजनों ने बताया कि जब से नीट परीक्षा रद्द होने की खबरें आईं थी तभी से ऋतिक काफी परेशान नजर आ रहा था और गुरुवार को उसने कमरे में फंदे पर लटककर मौत को गले लगा लिया.

पेपर लीक के बाद रद्द की गई नीट परीक्षा
गौरतलब है कि देशभर में तीन मई को आयोजित की गई, मेडिकल की नीट यूजी परीक्षा रद्द कर दी गई है. इसके बाद विभिन्न छात्र संगठन नीट यूजी पेपर लीक व परीक्षा की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठा रहे हैं. छात्रों का कहना है कि परीक्षा में इस प्रकार की अनियमितता लाखों छात्रों के लिए बड़ी निराशा बनकर उभरी है. लाखों छात्र बीते पूरे साल से इस परीक्षा की तैयारी में जुटे हुए थे. ऐसे में परीक्षा रद्द होना व प्रश्न लीक होना इन छात्रों व अभिभावकों के लिए मानसिक व आर्थिक रूप से बड़ा झटका है.

राहुल गाँधी ने किया ट्वटि

“अब नहीं देनी प्रतियोगी परीक्षा।”लखीमपुर खीरी के 21 साल के ऋतिक मिश्रा के ये आख़िरी शब्द थे। तीसरी बार NEET देने वाला यह बच्चा, परीक्षा रद्द होते ही टूट गया। ऐसे ही गोवा में भी एक NEET अभ्यर्थी ने जान दे दी। ये बच्चे परीक्षा से नहीं हारे, इन्हें एक भ्रष्ट तंत्र ने मारा है।
यह आत्महत्या नहीं – यह सिस्टम द्वारा हत्या है। आगे उन्होंने लिखा है कि परीक्षा से जुड़े घोटालो आंकड़े देखिए:
2015 से 2026 तक – 148 परीक्षा घोटाले।
87 परीक्षाएँ रद्द, 9 करोड़ बच्चों का भविष्य प्रभावित।
148 घोटालों में सज़ा हुई – सिर्फ़ 1 को।

यह एक अत्यंत दुखद और दिल दहला देने वाली खबर है। ऋतिक मिश्रा जैसे युवा छात्रों का NEET परीक्षा रद्द होने या अनियमितताओं के कारण टूटना, हमारी शिक्षा और परीक्षा प्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान है। 21 साल की उम्र में, जब सपनों को उड़ान मिलनी चाहिए, तब ऐसी हताशा किसी परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। इस समय उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। यह घटना देश के नीति-निर्माताओं के लिए एक बड़ी सीख होनी चाहिए कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और परीक्षा की शुचिता सबसे ऊपर होनी चाहिए।

CBI ने 17 मामले लिए, ED ने 11 – किसी को सज़ा नहीं।
NEET, AIPMT और अन्य मेडिकल परीक्षाओं में अकेले 15 घोटाले।
और सबसे शर्मनाक बात:
इन घोटालों में जिम्मेदार किसी अधिकारी या मंत्री का इस्तीफ़ा नहीं हुआ। हटाए जाते हैं – फिर चुपके से बड़े पद पर बैठा दिए जाते हैं। चोरी कराने वालों को इनाम मिलता है, और परीक्षा देने वाले बच्चे जान गँवाते हैं। मोदी जी – कितने ऋतिक चाहिए आपकी जवाबदेही जगाने के लिए?
मेरे युवा साथियों, आपका दर्द मेरा दर्द है। आपकी मेहनत मेरी मेहनत है। आपका भविष्य चुराने वालों को जवाब देना ही होगा। चाहे जितना वक्त लगे, किसी को बख्शा नहीं जाएगा – ये मेरा वादा है। यह लड़ाई हम साथ लड़ेंगे – और जीतेंगे भी।

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