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क्या NDA में शामिल होगी DMK? मुस्लिम लीग के अलग होने के बाद तेज हुई अटकलें, लोकसभा में 360 के आंकड़े पर नजर

by Admin
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यदि डीएमके एनडीए में शामिल होती है, तो लोकसभा में उसके 22 सांसदों का समर्थन मिलने से मोदी सरकार के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 360 सीटों का आंकड़ा पार करना आसान हो सकता है। इससे परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने में केंद्र सरकार को बड़ी ताकत मिल सकती है।

चेन्नई/नई दिल्ली: तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़े घटनाक्रम ने राष्ट्रीय राजनीति की चर्चाओं को भी तेज कर दिया है। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) की वर्षों पुरानी सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने आधिकारिक तौर पर डीएमके नीत सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) से अलग होने का फैसला कर लिया है। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या अब तक विपक्षी INDIA गठबंधन का हिस्सा रही डीएमके, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का दामन थाम सकती है।

यदि डीएमके एनडीए में शामिल होती है, तो लोकसभा में उसके 22 सांसदों का समर्थन मिलने से मोदी सरकार के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 360 सीटों का आंकड़ा पार करना आसान हो सकता है। इससे परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने में केंद्र सरकार को बड़ी ताकत मिल सकती है।

IUML ने क्यों छोड़ा DMK का साथ?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चेन्नई में आयोजित अपनी जनरल काउंसिल की बैठक में IUML ने 14 प्रस्ताव पारित किए, जिनमें डीएमके गठबंधन से अलग होने का प्रस्ताव भी शामिल था। पार्टी ने कहा कि विधानसभा चुनावों के बाद उसने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार को समर्थन दिया था और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में डीएमके गठबंधन में बने रहना संभव नहीं है।

IUML अध्यक्ष केएम खादर मोहिदीन ने कहा कि पार्टी को विधानसभा, लोकसभा और स्थानीय निकाय चुनावों में जो सफलता मिली, उसमें डीएमके गठबंधन की अहम भूमिका रही। इसके बावजूद पार्टी ने राज्य में राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने और राष्ट्रपति शासन की स्थिति से बचने के लिए टीवीके सरकार का समर्थन करने का निर्णय लिया। बाद में पार्टी विधायक एएम शाहजहां को अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री भी बनाया गया।

तमिलनाडु में बदल रहे राजनीतिक समीकरण

विधानसभा चुनाव में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत से कुछ सीटें दूर रह गई। इसके बाद कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, वीसीके और आईयूएमएल ने समर्थन देकर उसे सरकार बनाने का रास्ता दिया। कांग्रेस और आईयूएमएल का डीएमके से दूरी बनाना तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरणों की शुरुआत माना जा रहा है।

क्या राष्ट्रीय राजनीति में होगा बड़ा बदलाव?

आईयूएमएल के गठबंधन से बाहर होने के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि डीएमके अपने राजनीतिक विकल्पों पर नए सिरे से विचार कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत मजबूत करने के लिए नए सहयोगियों की तलाश में है और इसी कड़ी में डीएमके को भी एनडीए में शामिल होने का निमंत्रण दिए जाने की चर्चाएं हैं।

हालांकि, अभी तक न तो डीएमके और न ही भाजपा की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। ऐसे में फिलहाल यह केवल राजनीतिक अटकलों और सूत्रों के हवाले से सामने आई चर्चाओं तक ही सीमित है।

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