गाजियाबाद में ऑनलाइन गेमिंग की लत के चलते 3 सगी बहनों के आत्महत्या करने के हृदयविदारक मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।
इस त्रासदी पर अभिनेता और समाजसेवी सोनू सूद ने गहरी चिंता व्यक्त की है। तीनों बहनों में रात 2 बजे के करीब 9वीं मंजिल से छलांग लगा दी। इससे सभी की मौत हो गई। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। जांच में बच्चियों की डायरी में सुसाइड नोट मिला है। इसमें सॉरी मम्मी-सॉरी पापा लिखा है। इसके अलावा नोट में कोरियन कल्चर का भी जिक्र है।
4 फरवरी 2026 की रात गाजियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी में 3 बहनें निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) ने 9वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। तीनों को ‘कोरियन लव गेम’ की गंभीर लत थी। इसके कारण उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी और खुद को कोरियन मानने लगी थीं।
जांच में पता चला है कि बच्चे कोरियन लवर गेम खेलने के आदी थे। जानकारी के अनुसार, गेम में 50 टास्क थे। बीती रात अंतिम टास्क था। फ्लोर से कूदने के लिए बच्चियों ने दो स्टेप वाली सीढ़ियों का इस्तेमाल किया था। पुलिस के अनुसार, जांच शुरू हुई है आगे सबूत के आधार पर करवाई होगी। बताया गया है कि गेम की जानकारी परिवार को थी। इसके चलतते पिता ने कुछ दिन से मोबाइल पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि अभी मामले की जांच की जा रही है।
सोनू ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर डिजिटल दुनिया के बढ़ते प्रभाव को 'खतरनाक' बताते हुए सरकार और समाज से कड़े कदम उठाने की अपील की है। इस दुखद घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए सोनू ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तक नाबालिगों की आसान पहुंच पर सवाल उठाए और तुरंत कड़े प्रतिबंध लगाने की वकालत की। उन्होंने आगाह किया कि बच्चों का स्क्रीन के सामने अत्यधिक समय बिताना अब केवल एक आदत नहीं, बल्कि एक 'सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता' बनता जा रहा है।
सोनू ने साफ कहा कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों को बिना निगरानी और बिना पाबंदी के सोशल मीडिया/गेमिंग की दुनिया में नहीं छोड़ना चाहिए। साेनू ने लिखा, ‘गाजियाबाद में 3 मासूम बच्चियों ने अपनी जान गंवा दी। ये मौत हिंसा या गरीबी के कारण नहीं हुई, बल्कि उन्होंने ऑनलाइन गेमिंग और डिजिटल लत के उस ‘अदृश्य दबाव’ के आगे दम तोड़ दिया, जो दिखाई नहीं देता। मैंने पहले भी इसके खिलाफ आवाज उठाई है और मैं फिर से कह रहा हूं। 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगना चाहिए।’
सोनू ने लिखा, ‘बचपन को मार्गदर्शन की जरूरत है। आपके साथ की जरूरत है, एल्गोरिदम की नहीं। उन्हें देखभाल की जरूरत है, न कि हर वक्त स्क्रीन की। ये किसी पर दोष मढ़ने के बारे में नहीं है। यह सुरक्षा के बारे में है, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, संभल जाइए। इस घटना को महज एक और ऐसी हेडलाइन न बनने दें, जिसे हम भूल जाएं। अब कार्रवाई करने का समय है।’
लॉकडाउन में मोबाइल बना दोस्त, फिर बना दुश्मन
जांच के अनुसार, तीनों बहनों को इस गेम की लत कोविड-19 महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन में लगी थी। स्कूल बंद होने और घर में कैद रहने के कारण मोबाइल ही उनका एकमात्र सहारा बन गया था, जो धीरे-धीरे एक घातक जुनून में बदल गया।
पुलिस का कहना है कि बच्चियां कोरियन कल्चर से काफी प्रभावित थी। सुसाइड नोट में भी कोरियन कल्चर का जिक्र है। बताया गया कि बच्चियां दो साल से स्कूल नहीं जा रही थी। पढने में कमजोर थी, इसलिए घर रहती थी।
सुसाइड में दो बार लिखा है ये बच्चियों ने लिखा है I m very very alone. हालांकि ये दोनों बार पेन से कट किया गया है। इसके बाद उसके ऊपर लिखा है- make me a hert of broken
घटना गाजियाबाद के भारत सिटी सोसाइटी की है। तीन नाबालिग सगी बहनों ने 9 वीं मंजिल से छलांग लगा दी। भारत सिटी B 1 टॉवर में रहने वाली सगी तीनों बहनें एक मोबाइल गेम ऐप की आदी हो चुकी थी। बताया जा रहा है कि तीनों बहनें एक साथ सभी काम करती थीं, जैसे नहाना, खाना, सोना व रोजमर्रा के सभी काम।
बच्चियों के पिता ने दो शादी की हैं। दोनों पत्नियां आपस में सगी बहन हैं। पहली से कोई बच्चा नहीं हो रहा था तो व्यक्ति उसकी छोटी बहन (साली) के साथ दूसरी शादी कर ली। बाद में उससे तीन बच्चे हुए, इसी दौरान पहली पत्नी से भी दो बच्चे हो गए। कूदने वाली तीनों में से 2 सगी बहनें थे और एक बेटी पहली वाली पत्नी से। हालांकि सभी लोग एक साथ ही रहते थे। बताया जा रहा है कि लड़कियां पिछले 2 सालों से स्कूल नहीं जा रही थीं।


