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SIR पर ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में..CJI ने क्या-क्या कहा

SIR पर ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में..CJI ने क्या-क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) मामले पर सुनवाई की। जहां राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी वकीलों के साथ मौजूद रहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग के निशाने पर है। जो काम 2 साल में होना था, उसे 3 महीने में करवाया जा रहा है।

सुनवाई के बाद CJI सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि असली लोग चुनावी सूची में बने रहने चाहिए। ममता की याचिका पर बेंच ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी से 9 फरवरी तक जवाब मांगा।

सुनवाई में शामिल होने खुद ममता बनर्जी पहुंचीं और वकीलों की कतार में सबसे आगे दिखीं. ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा कि मैं इसी स्टेट से हूं मैं एक्सप्लेन कर सकती हूं. उन्होंने सबसे पहले तीनों जजों का अभिवादन किया और फिर आगे कहा कि हमें इंसाफ नहीं मिल रहा. मैं सामान्य परिवार से हूं, लेकिन अपनी पार्टी के लिए लड़ रही हूं. इस पर सीजेआई ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार भी केस लड़ रही है. सिब्बल-गोपाल जैसे लीगल लोग बहस कर रहे हैं. इस पर ममता ने कहा कि जब वकील शुरू से लड़ रहे हों, रिकॉर्ड पर बार-बार बातें रखी जा रही हों, छह बार ECI को लिखा गया हो और एक जवाब तक न मिले तो महससू होना स्वाभाविक है कि न्याय कहीं पिछले दरवाजे पर अटक गया है. मुझे पांच मिनट दीजिए. इस पर सीजेआई कहते हैं कि हमें कोई दिक्कत नहीं है, हम 15 मिनट देंगे, लेकिन पहले हमारी बात सुनिए.

सीजेआई ने ममता से कहा कि हर समस्या का समाधान होता है. ⁠इस समस्या का भी हल निकालेंगे. आपकी राज्य सरकार भी यहां मौजूद है. आपकी पार्टी भी यहां है. आपके पास देश के सबसे वरिष्ठ वकील मौजूद हैं. हमने आपकी ओर से उठाई गई समस्याओं को स्वीकार किया है- वे रिकॉर्ड पर हैं, ⁠लेकिन हर समस्या का समाधान होता है. इस पर ममता ने बोला कि पहले मुझे बोलने और खत्म करने की इजाजत दीजिए. मैं कुछ तस्वीरें देना चाहती हूं. सारे बंगाली अखबारों ने छापा है. हम चाहते हैं कि समस्या का समाधान निकले. हम अपने दायित्व से पीछे नहीं हटेंगे. हम इस बात से सहमत हैं कि ममता बनर्जी द्वारा उठाया गया मुद्दा वास्तविक है. हम यह भी नहीं चाहते कि भाषा संबंधी दिक्कतों या नामों की वर्तनी में अंतर के कारण किसी को मतदाता सूची से बाहर किया जाए.

सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री ने कोर्ट में पेश होकर अपनी दलीलें रखीं। मुकदमों में आमतौर पर मुख्यमंत्रियों के वकील या सलाहकार ही पेश होते हैं। अपनी दलील में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को वॉट्सऐप आयोग बताया और पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर जारी हो रहे नोटिस का जिक्र किया। उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया। ममता बनर्जी कविताओं की एक किताब भी SIR :26 in 26 भी लिखी है, जिसमें एसआईआर के मुद्दे पर 26 कविताएं हैं।

ममता बनर्जी ने कहा कि कुछ बेटियां शादी के बाद ससुराल चली गई हैं, लेकिन उनके नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए हैं. चुनाव आयोग आपके आदेशों का उल्लंघन कर रहा है. कई BLO की मौत हो चुकी है. बंगाल को टारगेट किया जा रहा है, असम को क्यों नहीं.

ममता ने आगे कहा कि चुनाव आयोग आपके आदेशों का उल्लंघन कर रहा है. कई BLO की मौत हो चुकी है. इसके बाद CJI ने कहा कि आधार पर अभी नहीं बोलेंगे, हमारा फैसला सुरक्षित है. CJI ममता को बार- बार MADAM MAMTA कह रहे हैं. इस पर ममता ने कहा कि ये लोग सरकारी और डोमिसाइल सर्टिफिकेट नहीं मान रहे हैं, चुनाव आयोग वाट्सएप कमीशन है. इस पर चुनाव आयोग ने ममता का विरोध किया. ये आरोप गलत है कि आयोग राज्य सरकार से सहयोग नहीं कर रहा है. सीजेआई ने कहा कि मैडम ममता आपके वकील श्याम दीवान की कैपेबलिटी पर कोई शक नहीं है. आपने बहुत अच्छा वकील चुना है.

ममता बनर्जी के पास LLB की डिग्री, आवेदन में कहा- SC के तौर-तरीके समझती हूं

ममता बनर्जी के इलेक्शन एफिडेविट के अनुसार उन्होंने 1979 में कोलकाता यूनिवर्सिटी से MA करने के बाद, जोगेश चंद्र चौधरी कॉलेज (कोलकाता) में LLB कोर्स में एडमिशन लिया था। 1982 में उनका LLB पूरा हो गया था। मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से पेश होने और बहस करने की अनुमति मांगने के लिए एक अंतरिम आवेदन भी दायर किया है।

अपने आवेदन में ममता ने कहा है कि आर्टिकल 32 रिट में याचिकाकर्ता होने के नाते वह मामले से पूरी तरह वाकिफ हैं। वे कहती हैं कि पश्चिम बंगाल की CM और TMC अध्यक्ष होने के नाते वह SC के तौर-तरीकों को समझती हैं और स्थापित नियमों के अनुसार ही व्यवहार करेंगी

2 फरवरी: ममता बनर्जी काला शॉल ओढ़कर मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलीं

ममता बनर्जी ने सोमवार को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ काला शॉल ओढ़कर दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की थी। उनके साथ SIR प्रभावित 13 परिवार और TMC के नेता भी थे।

चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि ममता ने अपने मुद्दे CEC को बताए लेकिन उनका जवाब सुने बिना ही नाराज होकर चली गईं। मुलाकात के बाद ममता ने कहा, “मैं बहुत दुखी हूं। मैं दिल्ली की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हूं। मैंने आज तक ऐसा अहंकारी और झूठा चुनाव आयुक्त नहीं देखा। वह इस तरह से बात करते हैं जैसे वह जमींदार हों और हम नौकर।

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