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44 हजार से ज्यादा जिंदा कारतूस बरामदगी पर तेजस्वी यादव का बड़ा सवाल, RSS को लेकर उठाई जांच की मांग; बिहार से हरियाणा तक मचा हड़कंप

by Admin
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पटना/नई दिल्ली। बिहार और हरियाणा में बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस की बरामदगी के बाद बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस मामले को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कारतूस तस्करी के इस नेटवर्क से जुड़े कुछ लोग RSS से संबंधित हैं। साथ ही उन्होंने सवाल किया कि इतनी बड़ी मात्रा में गोला-बारूद की बरामदगी के बावजूद इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच क्यों नहीं होनी चाहिए?

44 हजार से ज्यादा जिंदा कारतूस की बरामदगी

दरअसल, बिहार और हरियाणा में पुलिस की अलग-अलग कार्रवाइयों में कुल 44,250 जिंदा कारतूस बरामद किए जाने की खबर सामने आई है।

बिहार में STF और भोजपुर पुलिस की कार्रवाई के दौरान एक SUV से 19,250 कारतूस और एक देसी पिस्तौल बरामद की गई। इस मामले में चंदन तिवारी, लल्टू कुमार और सरस कुमार को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई।

वहीं, हरियाणा के झज्जर जिले में STF ने दो गाड़ियों से करीब 25 हजार कारतूस बरामद किए और पांच लोगों को गिरफ्तार किया। इन मामलों में पुलिस अंतरराज्यीय कारतूस तस्करी नेटवर्क की जांच कर रही है।

तेजस्वी यादव ने RSS को लेकर उठाए सवाल

कारतूस बरामदगी के मामले को लेकर तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए RSS पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में RSS से जुड़े चंदन तिवारी, अभिषेक तिवारी, लल्टू कुमार और सरस कुमार से 44 हजार जिंदा कारतूस पकड़े गए हैं।

तेजस्वी यादव ने इस मामले को गोला-बारूद की अंतरराज्यीय तस्करी से जुड़ा गंभीर नेटवर्क बताते हुए सवाल किया कि क्या इतनी बड़ी मात्रा में कारतूस इकट्ठा करने के पीछे कोई बड़ी साजिश थी?

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या RSS को आतंकवादी संगठन घोषित नहीं कर देना चाहिए?

हालांकि, RSS से आरोपियों के संबंध और किसी बड़ी आतंकी साजिश में उनकी कथित भूमिका की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

क्या किसी बड़ी साजिश की हो रही थी तैयारी?

44 हजार से अधिक जिंदा कारतूस की बरामदगी ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने कई सवाल खड़े किए हैं। आखिर इतनी बड़ी मात्रा में कारतूस कहां से लाए जा रहे थे? इन्हें किसे सप्लाई किया जाना था? इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं?

क्या यह केवल अवैध हथियारों और कारतूसों की तस्करी का मामला है या इसके पीछे कोई अन्य आपराधिक साजिश भी थी? इन सवालों का जवाब पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

राजनीतिक आरोपों के बीच जांच पर नजर

तेजस्वी यादव के बयान के बाद यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। एक तरफ बड़ी मात्रा में कारतूस की बरामदगी और अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क की जांच अहम है, तो दूसरी तरफ RSS से कथित संबंधों को लेकर लगाए गए आरोपों की भी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 44 हजार से ज्यादा जिंदा कारतूस आखिर किस मकसद से इकट्ठा किए गए थे और इस नेटवर्क के पीछे कौन-कौन लोग हैं?

अब निगाहें पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की जांच पर टिकी हैं।

नोट: RSS से आरोपियों के संबंध और किसी आतंकी साजिश में उनकी भूमिका संबंधी बातें तेजस्वी यादव के आरोप हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कारतूस बरामदगी के मामले में पुलिस की जांच जारी है।

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