नई दिल्ली। दिल्ली में दो महिला पत्रकारों के साथ कथित पुलिस मारपीट का मामला अब बड़ा राजनीतिक और प्रेस स्वतंत्रता का मुद्दा बनता जा रहा है। 4PM News Network से जुड़ी पत्रकार शाहीन खान और पत्रकार नफीसा खान ने आरोप लगाया है कि 3 सितंबर को एक कार्यक्रम की कवरेज के दौरान उन्हें दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया और साकेत थाने में उनके साथ बदसलूकी तथा मारपीट की गई। घटना के बाद पत्रकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कार्रवाई की मांग उठाई है।
इसी मामले में देर रात पूर्व BBC लंदन पत्रकार के रूप में पहचानी जाने वाली हुदा जरीवाला भी साकेत पुलिस स्टेशन पहुंचीं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में वह पुलिस अधिकारियों के सामने इस मामले में FIR दर्ज करने और कथित मारपीट के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग करती दिखाई दे रही हैं। उनके सवालों का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है।
आधी रात को थाने पहुंचीं हुदा जरीवाला
मामले में FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर पत्रकारों और समर्थकों का एक समूह देर रात तक साकेत थाने के बाहर मौजूद रहा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, हुदा जरीवाला भी करीब रात 2 बजे वहां पहुंचीं और पुलिस अधिकारियों के सामने सवाल उठाए।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में उन्हें कथित पुलिस कार्रवाई पर सवाल करते और पत्रकारों के साथ हुई घटना में जवाबदेही तय करने की मांग करते देखा जा सकता है। इसी वजह से उनके वीडियो को सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने शेयर किया और उन्हें महिला पत्रकारों के समर्थन में आवाज उठाने वाली पत्रकार के तौर पर सराहा।
मामला क्या है?
बताया जा रहा है कि 3 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से जुड़े एक कार्यक्रम की कवरेज के दौरान शाहीन खान और नफीसा खान वहां मौजूद थीं। पत्रकारों का आरोप है कि उनसे पूछताछ के बाद उन्हें साकेत पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां उनके साथ कथित तौर पर मारपीट और दुर्व्यवहार हुआ। शाहीन खान ने बाद में कैमरे पर अपना पक्ष भी रखा।
पत्रकारों और उनके संगठन की ओर से आरोप लगाया गया है कि दोनों के साथ उनकी पत्रकारिता और मुस्लिम पहचान के संदर्भ में आपत्तिजनक व्यवहार किया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
दिल्ली पुलिस का क्या कहना है?
दिल्ली पुलिस ने महिला पत्रकारों के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। दक्षिण दिल्ली के DCP अनंत मित्तल के अनुसार, दोनों महिलाओं ने कार्यक्रम स्थल के पास निर्धारित VVIP मार्ग में अपनी स्कूटी खड़ी की थी और बार-बार कहे जाने के बावजूद उसे हटाने से इनकार किया।
पुलिस के मुताबिक, दोनों को आगे की पूछताछ के लिए स्थानीय थाने ले जाया गया था। पुलिस ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री से सवाल पूछने के कारण उनके साथ मारपीट किए जाने का आरोप “गलत और भ्रामक” है।
यानी इस मामले में फिलहाल दो बिल्कुल अलग दावे सामने हैं—पत्रकारों का आरोप और दिल्ली पुलिस का आधिकारिक पक्ष।
‘FIR क्यों नहीं?’—मामले ने खड़े किए बड़े सवाल
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल FIR को लेकर उठ रहा है। 4PM News Network ने कथित तौर पर दिल्ली पुलिस को 6 सितंबर तक FIR दर्ज करने और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि मांग पूरी नहीं होने पर अदालत का रुख किया जाएगा।
पत्रकारों की ओर से पुलिस स्टेशन में लगे CCTV कैमरों की फुटेज सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई गई है। 4PM के संपादक संजय शर्मा का कहना है कि यदि पुलिस के अनुसार मारपीट के आरोप गलत हैं तो CCTV फुटेज से पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
पत्रकार संगठनों ने जताया विरोध
घटना के बाद Press Club of India, Indian Women’s Press Corps, Delhi Union of Journalists, Press Association और Kerala Union of Working Journalists सहित कई पत्रकार संगठनों ने मामले पर चिंता जताई और कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस ने भी कथित रूप से शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।
इससे मामला अब केवल दो पत्रकारों और पुलिस के बीच विवाद नहीं रह गया है। इसे पत्रकारों की सुरक्षा, पुलिस की जवाबदेही और प्रेस की स्वतंत्रता से जोड़कर देखा जा रहा है।
सोशल मीडिया पर हुदा जरीवाला की चर्चा
इसी बीच हुदा जरीवाला का पुलिस अधिकारियों के सामने सवाल उठाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। समर्थकों की ओर से उन्हें इस मामले में निर्भीक आवाज के रूप में पेश किया जा रहा है।
वायरल पोस्टों में दावा किया जा रहा है कि उन्होंने आधी रात को पुलिस अधिकारियों के सामने खड़े होकर महिला पत्रकारों के लिए न्याय की मांग की और प्रशासन से जवाब मांगा। हालांकि सोशल मीडिया पोस्टों में किए गए कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सवाल सिर्फ शाहीन-नफीसा का नहीं, पत्रकारिता की आजादी का भी
इस पूरे विवाद ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—अगर कोई पत्रकार सत्ता से जुड़े कार्यक्रम में सवाल पूछता है, तो क्या उसे पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा?
दूसरी तरफ पुलिस का कहना है कि कार्रवाई पत्रकारिता के कारण नहीं, बल्कि VVIP सुरक्षा व्यवस्था और सड़क पर वाहन खड़ा करने से जुड़े नियमों के कारण की गई।
अब इस विवाद का सच सामने लाने की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और निष्पक्ष जांच हो सकती है।
फिलहाल हुदा जरीवाला का देर रात साकेत थाने पहुंचना और पुलिस से जवाब मांगना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मामले में यदि निष्पक्ष जांच होती है और CCTV फुटेज सार्वजनिक किए जाते हैं, तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि उस रात थाने के भीतर वास्तव में क्या हुआ था।
क्योंकि सवाल सिर्फ एक पत्रकार का नहीं है—सवाल यह है कि लोकतंत्र में सवाल पूछने वाले पत्रकार की सुरक्षा और स्वतंत्रता की गारंटी कौन देगा?