स्थानीय पुलिस पिकेट पर तैनात असिस्टेंट सब-इनस्पेक्टर (ASI) चंद्रमोहन सिंह पर आरोप है कि वह एक स्थानीय ग्रामीण के घर में गलत नीयत से प्रवेश कर गया. जब पड़ोसियों और ग्रामीणों ने उसे पकड़कर घेर लिया, तो खुद को बचाने के लिए एएसआई ने अपनी सरकारी सर्विस रिवॉल्वर से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. इस अंधाधुंध गोलीबारी में 50 वर्षीय ग्रामीण अशोक यादव की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए.
मधुबनी/पटना:बिहार के मधुबनी जिले के बाबूबरही थाना क्षेत्र अंतर्गत बलिराजगढ़ गांव से पुलिसिया बर्बरता और मर्यादा को शर्मसार करने वाली एक बेहद सनसनीखेज घटना सामने आई है. स्थानीय पुलिस पिकेट पर तैनात असिस्टेंट सब-इनस्पेक्टर (ASI) चंद्रमोहन सिंह पर आरोप है कि वह एक स्थानीय ग्रामीण के घर में गलत नीयत से प्रवेश कर गया. जब पड़ोसियों और ग्रामीणों ने उसे पकड़कर घेर लिया, तो खुद को बचाने के लिए एएसआई ने अपनी सरकारी सर्विस रिवॉल्वर से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. इस अंधाधुंध गोलीबारी में 50 वर्षीय ग्रामीण अशोक यादव की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए.
प्राथमिक जानकारियों के अनुसार, पुरातत्व विभाग की खुदाई स्थल की सुरक्षा के लिए बलिराजगढ़ में स्थापित पुलिस पिकेट पर तैनात एएसआई चंद्रमोहन सिंह देर रात गांव के ही एक स्थानीय निवासी के घर में कथित तौर पर अनुचित इरादों के साथ दाखिल हुआ था. उस समय घर पर महिलाएं व बच्चियां सो रही थीं. एएसआई की इस संदिग्ध गतिविधि को भांपते हुए पड़ोस की महिला फूलो देवी ने सूझबूझ दिखाते हुए घर का मुख्य दरवाजा बाहर से बंद कर दिया और शोर मचाकर ग्रामीणों को इकट्ठा कर लिया. देखते ही देखते भारी संख्या में ग्रामीण वहां जमा हो गए और उन्होंने आरोपी पुलिस अधिकारी को घेर लिया. उग्र भीड़ से खुद को घिरा पाकर एएसआई चंद्रमोहन सिंह ने कानून की सारी मर्यादाओं को ताक पर रखकर अपनी सर्विस पिस्टल निकाली और करीब 5 से 6 राउंड गोलियां बरसा दीं, जिससे अशोक यादव के सिर और सीने में गोली लगी और उनकी तत्काल मृत्यु हो गई, जबकि बीच-बचाव करने वाले तीन अन्य ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए.
इस वीभत्स घटना के बाद बिहार में सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया है. पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बिहार पुलिस पर कड़ा हमला बोला है. विपक्ष ने आरोप लगाया है कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है और रक्षक ही भक्षक की भूमिका में आ गए हैं. आरजेडी ने सोशल मीडिया पर आधिकारिक बयान जारी कर आरोप लगाया कि इस जघन्य कृत्य को अंजाम देने वाले आरोपी एएसआई को भगाने में स्थानीय पुलिस चौकी के अन्य कर्मियों की भी मिलीभगत रही है, इसलिए पूरी चौकी के कर्मियों पर निलंबन और बर्खास्तगी की कार्रवाई होनी चाहिए.
मामले की गंभीरता को देखते हुए मधुबनी के पुलिस कप्तान (एसपी) योगेंद्र कुमार ने तत्काल प्रभाव से कड़ा एक्शन लिया है. एसपी ने आरोपी एएसआई चंद्रमोहन सिंह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है और उसकी विभागीय बर्खास्तगी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. पुलिस मुख्यालय ने फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पांच सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है और उसकी सूचना देने वाले के लिए 25,000 रुपये के इनाम की घोषणा की है. जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बाबूबरही थाने में हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और इस मामले का स्पीडी ट्रायल (Speedy Trial) चलाकर दोषी पुलिसकर्मी को न्याय के दायरे में लाकर कड़ी से कड़ी सजा सुनिश्चित की जाएगी.