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मुंबई में ‘लाडकी बहिन’ योजना की रुकी किश्तें शुरू करने की मांग को लेकर महिलाओं का महामोर्चा; सांख्यिकीय आंकड़ों के साथ वृंदा करात ने सरकार पर लगाया चुनावी धोखाधड़ी का आरोप

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मुंबई:महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना‘ की रुकी हुई मासिक वित्तीय सहायता को फिर से बहाल करने की मांग को लेकर मुंबई की सड़कों पर भारी हंगामा खड़ा हो गया। ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वीमेंस एसोसिएशन (AIDWA) के बैनर तले हजारों पात्र महिला लाभार्थियों ने दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में एक विशाल ‘महामोर्चा’ निकाला और मंत्रालय की तरफ मार्च किया। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने पहुंचीं सीपीआई(एम) की वरिष्ठ नेता और एडवा (AIDWA) की संस्थापक सदस्य वृंदा करात ने महायुति सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला और इसे महिलाओं के साथ किया गया एक बड़ा विश्वासघात करार दिया।

मीडिया से बातचीत करते हुए वृंदा करात ने महाराष्ट्र सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने हालिया चुनावों के दौरान महिलाओं को लुभाने के लिए इस मासिक आर्थिक मदद को बढ़ाकर ₹2,100 करने का बड़ा वादा किया था। लेकिन चुनाव खत्म होते ही हकीकत इसके बिल्कुल उलट हो गई, जहां बढ़ोत्तरी करना तो दूर, महिलाओं को मिलने वाली मौजूदा ₹1,500 की मासिक किश्त भी रोक दी गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले विज्ञापन देकर भारी प्रचार किया और अब वित्तीय बाधाओं या तकनीकी त्रुटियों का हवाला देकर लाखों पात्र महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित कर दिया है, जो पूरी तरह से राजनीतिक अवसरवाद और धोखाधड़ी का उदाहरण है।

इस दौरान महिला संगठनों ने सरकारी तंत्र की विफलता को उजागर करने के लिए एक चौंकाने वाला सांख्यिकीय डेटा भी प्रस्तुत किया। एडवा (AIDWA) के अनुसार, राज्य में योजना के तहत कुल पंजीकृत लाभार्थियों में से लगभग 80 लाख से 92 लाख महिलाओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं या तकनीकी विसंगतियों के कारण उनकी किश्तें रोक दी गई हैं। राज्य की करीब 33 से 38 प्रतिशत पात्र महिलाएं प्रशासनिक खामियों और जटिल नियमों के चलते इस सामाजिक सुरक्षा लाभ से बाहर हो गई हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक और मानसिक संकट खड़ा हो गया है।

विरोध प्रदर्शन के दौरान वृंदा करात ने वर्तमान जटिल डिजिटल सत्यापन प्रक्रिया की भी कड़ी आलोचना की और मांग की कि सरकार को तुरंत जटिल ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया को सरल और सुव्यवस्थित (Streamline) करना चाहिए। एडवा के नेताओं का तर्क है कि राज्य की लाखों गरीब और ग्रामीण महिलाओं के पास न तो स्मार्टफोन हैं और न ही उनके पास डिजिटल साक्षरता है, जिसके कारण तकनीकी कमियों की आड़ में उनके नाम लाभार्थी सूची से काट दिए गए हैं। संगठन ने सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि वह सभी लंबित किश्तों का तुरंत भुगतान करे, ई-केवाईसी पोर्टल को आम नागरिकों के लिए सुलभ बनाए और घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन की व्यवस्था करे, अन्यथा इस आंदोलन को पूरे महाराष्ट्र के जिलों में और अधिक उग्र किया जाएगा।

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