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नेपाल में जल प्रलय: 573 मजदूर अब भी लापता, मलबे से बंद सुरंगों में जिंदगी की तलाश

by Admin
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काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने हिमालयी इलाकों में भारी तबाही मचाई है। रसुवा और नुवाकोट जिलों में बाढ़ और मलबे की चपेट में आए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स अब सबसे बड़े रेस्क्यू ऑपरेशनों में से एक का केंद्र बन गए हैं। कई परियोजनाओं की सुरंगें कीचड़, पत्थरों और मलबे से पूरी तरह बंद हो गई हैं। इन सुरंगों और परियोजना स्थलों पर काम करने वाले सैकड़ों मजदूरों से अब भी संपर्क नहीं हो पाया है।

30 अगस्त की उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 11 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइट्स पर शुरुआती तौर पर 934 मजदूरों के लापता होने की सूचना थी। इनमें से 361 लोगों को बचा लिया गया या वे खुद सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने में सफल रहे। इसके बाद भी करीब 573 लोग लापता या संपर्क से बाहर बताए गए। बाद की परियोजना-आधारित सूची में नौ परियोजनाओं से 537 लोगों के अब भी लापता होने की जानकारी दी गई है। यानी रेस्क्यू के दौरान आंकड़े लगातार बदल रहे हैं।

अचानक आई बाढ़ ने मचाई तबाही

26 अगस्त को लहेंडे-भोटे कोशी-त्रिशूली नदी प्रणाली में अचानक पानी का बहाव बेहद तेज हो गया। बर्फ, चट्टानों और भारी मलबे के साथ आई बाढ़ ने नदी के आसपास मौजूद बस्तियों, सड़कों, पुलों और हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया।

रसुवा और नुवाकोट के पहाड़ी इलाके पहले से ही दुर्गम हैं। बाढ़ के बाद कई सड़क मार्ग और पुल क्षतिग्रस्त होने से जमीन के रास्ते राहत एवं बचाव दलों का पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है। इसी वजह से हेलीकॉप्टरों के जरिए लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने पर काफी निर्भरता बढ़ गई है।

11 हाइड्रोपावर साइट्स पर मजदूरों का पता नहीं

नेपाल के हाइड्रोपावर क्षेत्र में काम कर रहे मजदूरों के लिए यह हादसा बेहद गंभीर साबित हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 11 परियोजनाओं में कुल 934 लोगों के संपर्क से बाहर होने की जानकारी सामने आई थी। इनमें से 361 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि बाकी लोगों की तलाश जारी है।

अधिकारियों को यह भी आशंका है कि वास्तविक संख्या सरकारी आंकड़ों से अधिक हो सकती है। इसकी वजह यह है कि कुछ परियोजनाएं अभी निर्माणाधीन थीं और वहां काम करने वाले सभी मजदूरों के नाम आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होने की संभावना है।

इन परियोजनाओं में नेपाली नागरिकों के अलावा भारत, चीन और दक्षिण कोरिया समेत अन्य देशों के नागरिक भी काम करते हैं।

अपर त्रिशूली-1 बना सबसे बड़ा रेस्क्यू सेंटर

216 मेगावाट के अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में सबसे ज्यादा मजदूरों के फंसे होने की खबर सामने आई है। शुरुआती आंकड़ों में इस परियोजना से 576 लोगों के संपर्क से बाहर होने की जानकारी दी गई थी। इनमें से 254 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि करीब 300 लोगों के अब भी सुरंग के अंदर फंसे होने की आशंका जताई गई है।

यह परियोजना निर्माणाधीन है और यहां कई सुरंगें बनाई जा रही हैं। बाढ़ का पानी और मलबा सुरंगों में घुसने के बाद कई रास्ते बंद हो गए। यही वजह है कि बचाव दलों के लिए अंदर तक पहुंचना बेहद कठिन हो गया है।

10 से 12 फीट तक जमा हो गया मलबा

बाढ़ से बचकर निकले परियोजना कर्मचारियों ने बताया कि कुछ सुरंगों के रास्ते में कई फीट ऊंचा कीचड़ और मलबा जमा हो गया था। कुछ स्थानों पर मलबे की ऊंचाई 10 से 12 फीट तक बताई गई।

बचाए गए मजदूरों को भी सुरक्षित स्थान तक पहुंचने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई लोग पहाड़ी रास्तों से घंटों पैदल चले और क्षतिग्रस्त सड़कों तथा पुलों को पार करते हुए नुवाकोट पहुंचे। वहां से उन्हें बसों के जरिए काठमांडू ले जाया गया।

बाढ़ के बाद बिजली और संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई, जिससे परियोजना स्थलों पर मौजूद लोगों से संपर्क करना और उनकी स्थिति का पता लगाना और मुश्किल हो गया।

अपर त्रिशूली-3B में 91 लोग सुरक्षित निकले

अलग-अलग परियोजनाओं से भी राहत की खबरें सामने आई हैं। अपर त्रिशूली-3B परियोजना में संपर्क से बाहर बताए गए 122 लोगों में से 91 को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

वहीं अपर त्रिशूली-3A परियोजना में करीब 42 लोग अब भी संपर्क से बाहर बताए गए हैं। रसुवागढ़ी हाइड्रोपावर परियोजना से 93 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई है। लांगटांग खोला परियोजना में संपर्क से बाहर बताए गए 42 लोगों में से 18 को सुरक्षित निकाल लिया गया है।

चिलिमे की सुरंग में छह लोगों की तलाश

रसुवा की चिलिमे हाइड्रोपावर परियोजना में भी बचाव दल के सामने बड़ी चुनौती है। करीब 22 मेगावाट की इस परियोजना की लगभग 250 मीटर लंबी सुरंग में छह लोगों के फंसे होने की सूचना है।

माउंटेन गाइड और पर्वतीय बचाव विशेषज्ञों की टीमें सुरंग में प्रवेश कर मलबा हटाने का काम कर रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, बचावकर्मी सुरंग के भीतर लगभग 120 मीटर तक पहुंच पाए हैं, लेकिन आगे भारी कीचड़ और मलबे की दीवार रास्ता रोक रही है।

हिमालयी इलाके में पर्वतारोहण का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों को इसलिए लगाया गया है क्योंकि सामान्य बचाव दलों के लिए टूटे रास्तों, अस्थिर चट्टानों और संकरी सुरंगों में काम करना बेहद जोखिमपूर्ण और कठिन है।

हेलीकॉप्टरों से रेस्क्यू अभियान तेज

जमीन के रास्ते संपर्क टूटने के कारण नेपाल सेना ने हवाई अभियान तेज कर दिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, रेस्क्यू ऑपरेशन में 15 हेलीकॉप्टर और प्रशिक्षित बचावकर्मियों की टीमें लगाई गई हैं।

हेलीकॉप्टरों के जरिए दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों को निकालने के साथ-साथ जरूरी राहत सामग्री और बचाव उपकरण भी पहुंचाए जा रहे हैं। हालांकि खराब मौसम और पहाड़ी इलाकों की भौगोलिक परिस्थितियां अभियान में लगातार बाधा डाल रही हैं।

सड़कें और पुल टूटने से बढ़ी मुश्किल

बाढ़ ने सिर्फ हाइड्रोपावर परियोजनाओं को ही नुकसान नहीं पहुंचाया बल्कि परिवहन व्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। कई सड़कें और पुल बह जाने के कारण राहत टीमों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लग रहा है।

ऐसे में कई जगहों पर बचावकर्मियों को पैदल पहाड़ी रास्तों से आगे बढ़ना पड़ रहा है। यही कारण है कि सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचना रेस्क्यू ऑपरेशन की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हो गया है।

भारत से NDRF की टीम के लिए अभी औपचारिक अनुरोध नहीं

भारत की ओर से भी मदद के लिए तैयारी रखी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार नेपाल सरकार ने अभी तक भारत से NDRF टीम भेजने के लिए औपचारिक अनुरोध नहीं किया है, हालांकि भारतीय अधिकारियों को टीम तैयार रखने को कहा गया है।

भारत और नेपाल के बीच आपदा राहत एवं बचाव में पहले भी सहयोग रहा है। 2015 के विनाशकारी भूकंप के दौरान भी भारत ने NDRF की टीमें नेपाल भेजी थीं।

नेपाल में व्यापक तबाही, हजारों लोग अब भी लापता

हाइड्रोपावर परियोजनाओं में फंसे मजदूरों का संकट नेपाल में आई व्यापक तबाही का सिर्फ एक हिस्सा है। 30 अगस्त तक नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से मौतों तथा लापता लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि की रिपोर्ट सामने आई है। रविवार को कुछ रिपोर्टों में नेपाल में 734 मौतों और करीब 2,498 लोगों के अब भी लापता होने की जानकारी दी गई।

इसके साथ ही भोटेकोशी नदी में जलस्तर फिर बढ़ने की सूचना ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। अधिकारियों ने राहत एवं बचाव टीमों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा है।

परिवारों की बढ़ती चिंता, रेस्क्यू टीमों पर समय का दबाव

हाइड्रोपावर परियोजनाओं में लापता मजदूरों के परिवारों के लिए हर गुजरता घंटा चिंता बढ़ा रहा है। सुरंगों में मलबा हटाने का काम बेहद धीमी गति से करना पड़ रहा है, क्योंकि किसी भी तरह की जल्दबाजी से अंदर फंसे लोगों और बचावकर्मियों दोनों के लिए खतरा बढ़ सकता है।

फिलहाल नेपाल की सेना, सुरक्षा बलों, पर्वतीय विशेषज्ञों और स्थानीय बचाव टीमों का पूरा ध्यान सुरंगों और दुर्गम परियोजना स्थलों तक पहुंचने पर है। सैकड़ों मजदूरों की तलाश अब भी जारी है और राहत एवं बचाव अभियान के लिए अगले कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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