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IIT बॉम्बे में छात्रों की मौत पर दावों को लेकर विवाद, सोहिल सांगवान के परिवार के सवाल अब भी कायम

by Admin
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मुंबई। IIT बॉम्बे में छात्रों की मौत के मामलों को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे दावों के बीच अब सोहिल सांगवान, नमन अग्रवाल और साहिल वाकोड़े के मामलों को लेकर अलग-अलग जांच और परिस्थितियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया है कि इन तीनों मामलों को एक ही तरह से पेश करना उचित नहीं है और प्रत्येक मामले की जांच की स्थिति अलग है।

पोस्ट में खास तौर पर सोहिल राजकुमार सांगवान का मामला उठाया गया है। 20 वर्षीय सोहिल राजस्थान के पिलानी के रहने वाले और IIT बॉम्बे में सेकेंड ईयर मटेरियल साइंस के छात्र थे। जुलाई 2026 में हॉस्टल में उनकी मौत हुई थी। उस समय पुलिस ने प्रारंभिक जांच में पारिवारिक और निजी रिश्तों से जुड़े तनाव की बात कही थी और पवई पुलिस स्टेशन में ADR दर्ज किया गया था। पुलिस ने उस समय किसी साजिश की आशंका से इनकार किया था, जबकि आगे की जांच जारी बताई गई थी।

अब सोशल मीडिया पर किए गए दावे में कहा गया है कि सोहिल के माता-पिता और रिश्तेदार लगातार पिलानी से मुंबई जाकर IIT प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं, लेकिन परिवार को अब तक घटनाक्रम को लेकर संतोषजनक जानकारी नहीं मिली है। पोस्ट में हाल में ANI को दिए गए परिवार के कथित बयान का भी हवाला दिया गया है, जिसमें IIT प्रशासन को लेकर गंभीर आरोप लगाए जाने की बात कही गई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है।

नमन अग्रवाल के मामले को लेकर अलग दावा

इसी पोस्ट में नमन अग्रवाल के मामले का भी उल्लेख किया गया है। पोस्ट में दावा किया गया है कि नमन के मामले में एक सुसाइड नोट मिला था और पुलिस ने उसकी जांच एवं सत्यापन के बाद मामले को बंद कर दिया था। हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए उपलब्ध विश्वसनीय सार्वजनिक रिकॉर्ड पर्याप्त नहीं मिले हैं। इसलिए इसे फिलहाल सोशल मीडिया पोस्ट में किया गया दावा ही माना जाना चाहिए।

साहिल वाकोड़े का मामला अभी जांच के दायरे में

इसके विपरीत साहिल वाकोड़े की मौत का मामला फिलहाल मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच की जांच के अधीन है। 20 वर्षीय साहिल IIT बॉम्बे के Energy Science and Engineering विभाग में सेकेंड ईयर BTech छात्र थे। 18 सितंबर 2026 को परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन से जुड़े एक मामले के बाद उनकी मौत हुई। उनके परिवार ने जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि IIT बॉम्बे ने इन आरोपों से इनकार किया है।

मुंबई पुलिस ने मामले को पवई पुलिस से क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर किया है। जांच में परीक्षा हॉल, कैंपस और हॉस्टल की CCTV फुटेज की पड़ताल की जा रही है ताकि साहिल की मौत से पहले की घटनाओं का क्रम स्पष्ट हो सके। पुलिस ने लोगों से अटकलें लगाने और जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष निकालने से भी बचने को कहा है।

24 सितंबर को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने IIT बॉम्बे जाकर मामले में स्पॉट इंक्वायरी की। आयोग ने CCTV फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, परीक्षा से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

तीनों मामलों को एक ही नजरिए से देखने पर सवाल

इन घटनाओं को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही बहस का एक प्रमुख मुद्दा यही है कि अलग-अलग छात्रों की मौत और उनकी जांच की परिस्थितियों को एक ही श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। सोहिल सांगवान की मौत जुलाई में हुई थी और उस समय पुलिस की प्रारंभिक जांच में अलग परिस्थितियों का उल्लेख किया गया था। वहीं साहिल वाकोड़े की मौत के मामले में परिवार के आरोप, FIR और क्राइम ब्रांच की जांच अभी जारी है।

इसलिए किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है। खासकर साहिल वाकोड़े के मामले में पुलिस जांच और NCSC की पड़ताल जारी होने के कारण अभी यह तय करना संभव नहीं है कि उनकी मौत के पीछे वास्तव में कौन-सी परिस्थितियां जिम्मेदार थीं।

सोशल मीडिया पर सामने आ रहे दावों के बीच सबसे अहम सवाल यही है कि IIT बॉम्बे में छात्रों की मौत से जुड़े मामलों में परिवारों को जांच की स्थिति, उपलब्ध साक्ष्यों और संस्थागत कार्रवाई की स्पष्ट जानकारी कब और किस रूप में दी जाती है।

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