सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के हमलों पर सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा, ‘बच्चों या बुजुर्गों को कुत्तों के काटने, चोट लगने या मौत के हर मामले में हम राज्य सरकारों से भारी मुआवजा दिलवाएंगे, क्योंकि उन्होंने पिछले 5 सालों में नियमों को लागू करने के लिए कुछ नहीं किया।’
प्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के हमलों पर सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा, ‘बच्चों या बुजुर्गों को कुत्तों के काटने, चोट लगने या मौत के हर मामले में हम राज्य सरकारों से भारी मुआवजा दिलवाएंगे, क्योंकि उन्होंने पिछले 5 सालों में नियमों को लागू करने के लिए कुछ नहीं किया।’
कोर्ट ने कहा, ‘आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वालों की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। अगर आपको इन जानवरों से इतना प्यार है, तो इन्हें अपने घर क्यों नहीं ले जाते। ये कुत्ते सड़कों पर क्यों घूमते रहें, लोगों को काटें और डराएं। उन्हें हम ऐसे ही नहीं छोड़ सकते।’
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा, ‘कुत्तों में एक खास तरह का वायरस होता है, जिसका कोई इलाज नहीं है। अब तक चार दिन की सुनवाई में इमोशन सिर्फ कुत्तों के लिए ही दिख रहा है। जब कुत्ते 9 साल के बच्चे पर हमला करते हैं तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या हम इस पर आंखें मूंद लें।’ इस मामले में अब अगली सुनवाई 20 जनवरी को दोपहर 2 बजे से होगी।
सड़कों से बच्चों को हटाना चाहिए, कुत्तों को नहीं
एक अन्य महिला वकील ने अपनी दलीलें पेश करते हुए कहा- जब रेलवे स्टेशन पर एक छोटी बच्ची के बगल में कोई आवारा कुत्ता सो रहा होता है, तो उसके साथ रेप नहीं होगा। एक महिला होने के नाते, मुझे दिल्ली में उन कुत्तों के साथ चलने में सुरक्षित महसूस होता है। अगर मुझ पर कोई हमला करेगा, तो वे भौंकेंगे।उन्होंने आगे कहा कि जब किसी शेल्टर होम में कोई कुत्ता बीमार पड़ जाता है, तो उनमें से जो वायरस पैदा होते हैं, उनपर दवाओं का असर नहीं होगा। मुझे बुरा लगता है जब RWA कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाने के लिए और अधिक फंड की मांग करते हैं। सबसे पहले बच्चों को सड़कों से हटाना होगा, कुत्तों को नहीं। बच्चों को शेल्टर होम की ज्यादा जरूरत है।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वह बोलीं कि मैं एक 80 साल की महिला का प्रतिनिधित्व कर रही हूं जो सड़क पर रहती है। वह 200 कुत्तों की देखभाल करती है। दिल्ली में उन्हें ‘डॉग अम्मा’ के नाम से जाना जाता है। कुत्तों गोद लेने की पॉलिसी पर विचार किया जाना चाहिए। एक राष्ट्रीय अभियान शुरू किया जा सकता है। यहां कई वकील हैं जिनके घर में 8-10 देसी कुत्ते हैं।
इतनी लंबी बहस नहीं देखी : जस्टिस मेहता
जस्टिस मेहता ने कहा- 2011 में प्रमोशन के बाद से मैंने इतनी लंबी बहसें कभी नहीं सुनीं। और अब तक किसी ने भी इंसानों के लिए इतनी लंबी बहस नहीं की है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने आज की सुनवाई खत्म कर दी। अब 20 जनवरी को दोपहर 2 बजे से अगली सुनवाई होगी।


