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मुंबई में जेएनपीटी बंदरगाह के निर्माण में पी. जी. गवई का रहा महत्वपूर्ण योगदान

मुंबई में जेएनपीटी बंदरगाह के निर्माण में पी. जी. गवई का रहा महत्वपूर्ण योगदान

नागपुर : मुंबई का जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (जे.एन.पी.टी.) आज देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण कंटेनर हैंडलिंग केंद्रों में से एक है.इस जे.एन.पी.टी.पोर्ट के निर्माण में नागपुर से साथ ही विदर्भ के गौरव रहे पी. जी. गवई का महत्वपूर्ण योगदान रहा है यह गौरवान्वित जानकारी भूतपूर्व CJI भूषण गवई ने दी.

विगत रविवार पी. जी. गवई के १०० वीं जयंती के अवसर पर विदर्भा गौरव प्रतिष्ठान की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बतौर अध्यक्ष बोलते हुए उन्होंने व्यक्त किये. इस वक़्त कनाडा के भूतपूर्व राजदूत एवं सेवानिवृत IFS अधिकारी मधुसूदन गवई, मिरा गवई, सुधीर गवई, कुमार गवई एवं गिरीश गाँधी मुख्य रूप से उपस्थित थे.

भूषण गवई ने आगे बोलते हुए कहा कि पी. जी. गवई का जीवन कार्य आज की युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा का अहम् स्त्रोत है. वह 1950 में हुई यूपीएससी परीक्षा के पहली बैच के आयएएस अधिकारी थे. महाराष्ट्र के पिछड़े वर्ग के पहले मुख्या सचिव के रूप में उनकी पहचान है.

उन्होंने आगे बोलते हुए बताया कि वह नागपुर के विभागीय आयुक्त , महापालिका आयुक्त , जिलाधिकारी तथा मोइल के मैनेजिंग डायरेक्टर भी थे. एक ही शहर में चार महत्वपूर्ण पदों पर कार्यभार सम्भालनेवाले शायद वह एकलौते अधिकारी थे.

उन्होंने जेएनपीटी के निर्माण में जो महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उसी के परिणामस्वरूप पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने उन्हें दिल्ली के नायब राज्यपाल
के रूप में चुना.

इस वक़्त कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए गिरीश गाँधी ने कहा कि पीजी गवई इनका प्रशाशकीय कौशल्य तारीफे काबिल था। उन्होंने कहा कि पीजी गवई को अपनी सामाजिक परिस्थिति का भलीभांति एहसास था। यह विरासत उन्हें उनके पिता से मिली थी. उन्होंने पिछड़े विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल बनाये. उन होस्टल्स को संतो के नाम दिए।

एस एम गवई ने कहा कि पीजी गवई यह मेरे चाचा व रोले मॉडल थे. मधुसूदन गवई इन्होने पी जी गवई द्वारा किये कार्यों पर प्रकाश डाला. शुभदा फडणवीस ने इस कार्यक्रम का संचालन किया.

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