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आरजेडी में ‘ऑपरेशन क्लीन’ की आहट से हलचल, भितरघातियों पर ऐक्शन के मिल रहे संकेत

आरजेडी में ‘ऑपरेशन क्लीन’ की आहट से हलचल, भितरघातियों पर ऐक्शन के मिल रहे संकेत

लगभग एक महीने की विदेश यात्रा के बाद बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव लौट आए हैं. विदेश से आने के बाद दिल्ली में उन्होंने बीते रविवार को पिता लालू प्रसाद यादव से मुलाकात की थी और वे जल्दी ही उनके पटना पहुंचने की उम्मीद है. उनकी वापसी से RJD कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा है. अब बिहार की सियासत में सबकी नजरें तेजस्वी पर टिकी हैं कि और सवाल पूछे जा रहा हैं कि क्या बिहार चुनाव में करारी हार से उबर गए हैं और क्या वे RJD को दोबारा मजबूत कर पाएंगे?

पटना. करीब एक महीने तक राजनीतिक गतिविधियों से दूरी बनाने के बाद बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव विदेश यात्रा से लौट आए हैं. उनकी पटना वापसी का इंतजार किया जा रहा है और राजनीतिक गलियारों में निगाहें अब उनके अगले कदम पर टिकी हैं. माना जा रहा है कि 9 जनवरी के आसपास तेजस्वी पटना लौट सकते हैं. उनकी वापसी की खबरों साथ ही जहां राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) में सियासी हलचल है, वहीं बिहार की राजनीति में भी सरगर्मी तेज है.
शादी समारोह से सियासी संदेश
बता दें कि विदेश से लौटने के बाद तेजस्वी यादव हाल ही में एक पारिवारिक शादी समारोह में सक्रिय रूप से शामिल हुए. यह उनकी सार्वजनिक मौजूदगी का पहला बड़ा संकेत माना जा रहा है. इस कार्यक्रम में वे अकेले नहीं थे. उनके साथ आरजेडी सांसद संजय यादव, करीबी सहयोगी रमीज नेमत खान, विधायक ओसामा साहब, विधान परिषद सदस्य कारी शोएब, पार्टी प्रवक्ता शक्ति यादव और वरिष्ठ नेता भोला यादव भी मौजूद रहे. दिग्गज नेताओं की मौजूदगी ने इस निजी समारोह को सियासी रंग दे दिया.

निजी यात्रा, लेकिन सियासी मायने गहरे
समारोह की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि तेजस्वी अब फिर से सक्रिय राजनीति के मोड में लौट रहे हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तेजस्वी यादव की यह यात्रा केवल निजी नहीं थी. लंबे समय बाद उनकी सार्वजनिक मौजूदगी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को यह संकेत दे दिया है कि नेतृत्व अब मैदान में लौट रहा है. आरजेडी के भीतर यह संदेश गया है कि अब सक्रियता का दौर शुरू हो सकता है.
बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद आरजेडी लगातार संकट के दौर से गुजर रही है. विधानसभा में पार्टी की संख्या घटकर 25 पर सिमट गई. इस हार ने न सिर्फ पार्टी संगठन को झटका दिया, बल्कि लालू परिवार के भीतर भी तनाव की खबरें सामने आईं. बहन रोहिणी आचार्य ने तेजस्वी यादव, संजय यादव और रमीज नेमत खान पर बदसलूकी के आरोप लगाए और सार्वजनिक रूप से भाई से दूरी बना ली. वहीं, बड़े भाई तेज प्रताप यादव पहले ही परिवार और पार्टी से अलग-थलग चल रहे हैं.

संगठनात्मक बदलाव की आहट
सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी यादव इस सूची पर गंभीरता से विचार कर सकते हैं.उचित स्पष्टीकरण नहीं देने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई, यहां तक कि पार्टी से निष्कासन तक की संभावना जताई जा रही है.चुनावी हार के बाद आरजेडी में संगठनात्मक बदलाव की चर्चा भी तेज है. बताया जा रहा है कि निष्क्रिय पदाधिकारियों को हटाकर नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है.इस साल बिहार में पंचायत चुनाव भी प्रस्तावित हैं. ऐसे में पार्टी नेतृत्व जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने की रणनीति बना सकता है.

प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर संकट?
एक रिपोर्ट के अनुसार, आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल की कुर्सी पर भी खतरा मंडरा रहा है. पार्टी के भीतर यह चर्चा है कि उनकी जगह किसी मजबूत और सक्रिय चेहरे को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. हालांकि, पार्टी की ओर से इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. मंगनीलाल मंडल को पिछले साल जून में जगदानंद सिंह की जगह प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन उनके नेतृत्व में पार्टी को विधानसभा चुनाव में भारी नुकसान उठाना पड़ा.

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