महाराष्ट्र की 29 मनपाओं के लिए चुनाव प्रचार चरम पर है। ऐसे में लगातार आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामले सामने आ रहे है। राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने कहा कि मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। मतदान बढ़ाने और प्रचार सुचारू रूप से हो, इसको लेकर चुनाव आयोग काम कर रहा है।
मुंबई : मुंबई सहित 29 महानगरपालिकाओं का चुनाव हो रहा है, इस चुनाव को मिनी विधानसभा चुनाव भी कहा जाता है। इसे संपन्न कराने की चुनौती राज्य चुनाव आयोग के सामने है। मनपा के लिए नामांकन भरते समय उम्मीदवारों को धमकाने और अधिकारियों द्वारा गलत तरीके से नामांकन रद्द करने और 69 निर्विरोध उम्मीदवारों के चुने जाने पर विवाद बढ़ गया है। इस पर राज्य चुनाव आयोग ने स्पष्ट कहा है कि यदि यह साबित हुआ कि दबाव में नामांकन वापसी हुई है या फॉर्म स्वीकार करने में कोई लापरवाही बरती गई है, तो उस प्रभाग में नए सिरे से चुनाव कराया जाएगा।
चुनाव आयोग विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर मामले की भी जांच कर रहे हैं। बीएमसी कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट चुनाव आयोग को सौंप दी है। दोषी साबित होने पर आदर्श आचार संहिता के तहत नार्वेकर के खिलाफ कार्यवाही होगी। हमारा मकसद निष्पक्ष चुनाव कराना है।ऐसी जानकारी राज्य चुनाव आयुक्त द्वारा दी गयी है. साथ ही मतदाताओं के कुछ अन्य निम्नलिखित प्रश्नों का भी उन्होंने समाधान किया
यदि उम्मीदवार से ज्यादा नोटा में वोट पड़ा, तो आयोग क्या करेगा?
अभी तक ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा है। ऐसा होने की आशंका कम है।
निर्विरोध जीते उम्मीदवारों का रिजल्ट कब घोषित होगा?
फिलहाल निर्विरोध उम्मीदवारों का रिजल्ट रोक दिया गया है। इस पर संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। यदि जांच रिपोर्ट में कुछ नहीं पाया गया, तो 16 जनवरी को सभी का रिजल्ट घोषित करेंगे।
निर्दलीय उम्मीदवारों को प्रचार करने में दिक्कत आती है, उन्हें चुनाव आयोग कैसे संरक्षण देगा?
इस संबंध में मनपा आयुक्त, पुलिस कमिश्नर सहित अन्य अधिकारियों के साथ बैठक हुई है। हमें स्पष्ट निर्देश दिया है कि निर्दलीय उम्मीदवारों को पूरा संरक्षण दिया जाए। जिससे वह बिना भय के चुनाव प्रचार कर सकें। हम लगातार रिव्यू कर रहे है।
जिला परिषद के चुनाव कब होने की संभावना है ?
अभी हमारा ध्यान पूरा मनपा चुनाव पर है, क्योंकि पूरी मशीनरी इस चुनाव में लगी है। इसके बाद हम जल्द ही जिला परिषद चुनाव की घोषणा करेंगे। यदि 31 जनवरी तक चुनाव नहीं हो पाया, तो थोड़ा आगे बढ़ाने के लिए हम सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध करेंगे।


