इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद बड़ा खुलासा सामने आया है.प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में शहर के 59 इलाकों का पानी पीने योग्य नहीं पाया गया था. 2016 से 2019 के बीच सैंपल फेल होने के बावजूद नगर निगम ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. भागीरथपुरा में अब तक 15 मौतें और 203 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं. प्रशासन रिंग सर्वे और टैंकर सप्लाई से हालात संभालने की कोशिश कर रहा है.
देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर आज अपनी ही व्यवस्था के बोझ तले दबता दिख रहा है. दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद जो सच सामने आया है, उसने न सिर्फ प्रशासन बल्कि पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है. अब यह साफ हो चुका है कि यह त्रासदी सिर्फ भागीरथपुरा तक सीमित नहीं थी, बल्कि शहर के 59 स्थानों पर पीने का पानी वर्षों से पीने योग्य ही नहीं था.
यह खुलासा मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट से हुआ है. बोर्ड ने वर्ष 2016–17 और 2017–18 के दौरान इंदौर शहर के 60 अलग-अलग इलाकों से पानी के सैंपल लिए थे. इन सैंपलों की जांच रिपोर्ट 2019 में आई, जिसमें 60 में से 59 सैंपल फेल पाए गए. सबसे खतरनाक बात यह रही कि जांच में पानी में टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाया गया, जो साफ तौर पर इस बात का संकेत है कि पानी में सीवर या गंदगी की मिलावट हो रही थी. मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कोलीफॉर्म बैक्टीरिया से दूषित पानी पीने से उल्टी, दस्त, पेट दर्द, टाइफाइड, डिहाइड्रेशन और गंभीर संक्रमण हो सकते हैं, और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए यह जानलेवा भी साबित हो सकता है.
चेतावनी दी गई… तीन बार लेटर लिखा गया लेकिन कुछ नहीं बदला
रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इंदौर नगर निगम को तीन बार पत्र लिखकर चेताया. इन पत्रों में साफ लिखा गया था कि जिन इलाकों में पानी दूषित पाया गया है, वहां उपचार (ट्रीटमेंट) के बाद ही जल आपूर्ति की जाए. इतना ही नहीं, बाद में इस पूरे मामले की जानकारी सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड को भी दी गई. इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस और स्थायी कार्रवाई नहीं हुई. न तो पाइपलाइन बदली गई, न लीकेज रोके गए और न ही प्रभावित इलाकों में
वैकल्पिक सुरक्षित व्यवस्था की गई.
ये हैं वो इलाके, जहां पीने लायक नहीं था पानी
जिन इलाकों के पानी के सैंपल फेल पाए गए, उनमें भागीरथपुरा के साथ-साथ खातीपुरा, रामनगर, नाहर शाहवली रोड, खजराना, गोविंद कॉलोनी, शंकर बाग कॉलोनी, परदेशीपुरा, सदर बाजार, राजवाड़ा, जूनी इंदौर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र शामिल हैं. इन इलाकों में रहने वाले लाखों लोग सालों तक वही पानी पीते रहे, जिसके बारे में सरकारी रिपोर्ट में पहले ही खतरे की घंटी बज चुकी थी.
मौतों के बाद हरकत में प्रशासन
भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद प्रशासन हरकत में आया. अब तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 203 मरीज अब भी अस्पताल में भर्ती हैं. इनमें से 25 मरीजों की हालत गंभीर है और वे ICU में इलाजरत हैं. घटना के बाद भागीरथपुरा में रिंग सर्वे शुरू किया गया है. हॉटस्पॉट के आसपास के 50 घरों का विशेष सर्वे किया जा रहा है, अब तक 3,679 घरों का सर्वे पूरा हो चुका है इस काम के लिए 20 टीमें तैनात की गई हैं
प्रशासन का दावा है कि सर्वे के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि किन घरों में किस तरह का पानी इस्तेमाल हुआ और बीमारी किस स्तर तक फैली.
लोगों का भरोसा लौटाने खुद मैदान में उतरे कलेक्टर
लोगों में फैले डर को कम करने और भरोसा दिलाने के लिए शिवम वर्मा, खुद मैदान में उतर आए. भागीरथपुरा में टैंकरों से सप्लाई हो रहे पानी को लेकर संदेह बढ़ने पर कलेक्टर ने खुद टैंकर का पानी पीकर देखा. इस दौरान उनका वीडियो भी सामने आया, जिसमें वे पानी की गुणवत्ता पर भरोसा दिलाने की कोशिश करते नजर आए. प्रशासन का कहना है कि फिलहाल प्रभावित इलाकों में टैंकरों के जरिए ही सुरक्षित पानी की आपूर्ति की जा रही है.


