बीजेपी के भीतर ब्राह्मणों की कथित नाराजगी को भांपते हुए अखिलेश अब ‘पीडीए प्लस’ यानी सवर्णों (विशेषकर ब्राह्मणों) को प्रमुखता दे रहे हैं. अयोध्या से लेकर बलिया तक के ब्राह्मण चेहरों को पार्टी में आगे किया जा रहा है. वहीं 2026 को बीएसपी के लिए वजूद बचाने का साल माना जा रहा है. बसपा सुप्रीमो मायावती इस साल कुछ बड़े और कड़े फैसले ले सकती हैं. सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने मायावती को गठबंधन का ऑफर भेजा है.
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव 2026 में अपने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे को नया विस्तार देने जा रहे हैं. बीजेपी के भीतर ब्राह्मणों की कथित नाराजगी को भांपते हुए अखिलेश अब ‘पीडीए प्लस’ यानी सवर्णों (विशेषकर ब्राह्मणों) को प्रमुखता दे रहे हैं. अयोध्या से लेकर बलिया तक के ब्राह्मण चेहरों को पार्टी में आगे किया जा रहा है. बिहार के बदलते समीकरणों का असर यूपी पर भी दिख सकता है. राज्यसभा सीटों और आगामी पंचायत चुनावों को लेकर सपा और कांग्रेस के रिश्तों में खटास आने के संकेत मिल रहे हैं. तो दूसरी तरफ 2026 को बीएसपी के लिए वजूद बचाने का साल माना जा रहा है. बसपा सुप्रीमो मायावती इस साल कुछ बड़े और कड़े फैसले ले सकती हैं. सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने मायावती को गठबंधन का ऑफर भेजा है. कांग्रेस के भीतर एक खेमा मानता है कि सपा के बजाय बसपा के साथ जाने से दलित-मुस्लिम समीकरण ज्यादा मजबूत होगा. संगठन को धार देने के लिए मायावती अपने उत्तराधिकारी आकाश आनंद को यूपी की सड़कों पर उतार सकती हैं.ऐसा विशेषज्ञों का मानना है.


