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AI समिट में पीछे हटे बिल गेट्स, नहीं देंगे भाषण

AI समिट में पीछे हटे बिल गेट्स, नहीं देंगे भाषण

AI Summit में बिल गेट्स अपना कीनोट भाषण नहीं देंगे. उनकी जगह Gates Foundation के अफ्रीका और भारत के अध्यक्ष अंकुर वोरा समिट को संबोधित करेंगे.

दिल्ली में आयोजित AI समिट से संबंधित एक बुरी खबर सामने आई है. मामला बिल गेट्स से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने किसी कारणवश AI समिट में भाषण नहीं देने का फैसला किया है. इस बात की जानकारी Bill & Melinda Gates Foundation ने एक्स पर दी है. उनकी जगह पर अंकुर वोरा भाषण देंगे, जो गेट्स फाउंडेशन के अफ्रीका और इंडिया हेड हैं.

आयोजकों ने बताया कि यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि समिट का पूरा ध्यान उसके मुख्य विषयों और प्राथमिकताओं पर बना रहे. आयोजकों ने बताया कि अंकुर वोरा का संबोधन फाउंडेशन के काम और भविष्य की योजनाओं पर केंद्रित रहेगा.

भारत के प्रति प्रतिबद्धता कायम
गेट्स फाउंडेशन ने साफ किया है कि भारत में उसके काम और सहयोग में कोई बदलाव नहीं है. फाउंडेशन भारत के साथ मिलकर स्वास्थ्य और विकास से जुड़े लक्ष्यों पर काम करता रहेगा. यह फैसला केवल समिट के कार्यक्रम को ध्यान में रखकर लिया गया है. फाउंडेशन ने दोहराया है कि वह भारत में अपनी साझेदारी और योजनाओं को पूरी मजबूती के साथ जारी रखेगा.

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों लेंगे भाग

दिल्ली में आयोजित AI समिट फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भाग लेंगे. इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी सचिव एस कृष्णन ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी 19 फरवरी को शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे. उद्घाटन सत्र में फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों सहित लगभग 20 राष्ट्राध्यक्ष उपस्थित रहेंगे.

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक का बयान
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने बुधवार (18 फरवरी 2026) को कहा कि भारत अपने प्रतिभा भंडार और मजबूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के बल पर एआई के क्षेत्र में अगुवा बनने और समाज में इसके व्यापक अनुपालन का उदाहरण पेश करने की स्थिति में है. सुनक ने यह टिप्पणी यहां आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान एक संवाद सत्र में की. इस सत्र का आयोजन कार्नेगी इंडिया ने ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन एवं अन्य साझेदारों के साथ किया था. इस दौरान सुनक ने कहा कि एआई को लेकर दुनिया भर में अलग-अलग दृष्टिकोण हैं. उन्होंने कहा, “एआई को लेकर भारत में जबर्दस्त आशावाद और भरोसा है, जबकि पश्चिमी देशों में इस समय प्रमुख भावना चिंता की है.

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