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साहिल वाकोड़े की मौत पर IIT बॉम्बे में कैंडल मार्च, छात्रों ने उठाए जांच की निष्पक्षता पर सवाल

by Admin
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मुंबई: IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोड़े की मौत के एक सप्ताह बाद संस्थान परिसर में छात्रों ने कैंडल मार्च निकालकर मामले की जांच के लिए गठित 10 सदस्यीय समिति को भंग कर बाहरी और स्वतंत्र जांच पैनल बनाने की मांग की। छात्रों ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला को सभी जिम्मेदारियों से हटाने और IIT बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे के इस्तीफे की भी मांग की है।

Justice Corner से Hostel-4 तक निकला मार्च

शुक्रवार रात निकाला गया कैंडल मार्च IIT बॉम्बे के मुख्य गेट के पास स्थित Justice Corner से शुरू होकर Hostel-4 तक पहुंचा। यह मार्च साहिल की मौत के एक सप्ताह पूरे होने पर आयोजित किया गया था। छात्रों ने हाथों में मोमबत्तियां और पोस्टर लेकर मामले की स्वतंत्र जांच, छात्र कल्याण व्यवस्था में सुधार और संस्थान की जवाबदेही से जुड़ी मांगें उठाईं।

छात्रों का कहना है कि IIT बॉम्बे बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की ओर से बनाई गई मौजूदा 10 सदस्यीय समिति पूरी तरह स्वतंत्र नहीं है। उनका आरोप है कि समिति के कुछ सदस्यों ने उस प्रोफेसर के प्रति समर्थन जताया है, जिनका नाम पुलिस FIR में दर्ज है। इसी आधार पर छात्र चाहते हैं कि मौजूदा समिति की जगह ऐसा बाहरी पैनल बनाया जाए जिसमें IIT बॉम्बे के मौजूदा कर्मचारी या छात्र शामिल न हों।

किन लोगों को पैनल में शामिल करने की मांग?

छात्रों ने नए पैनल में चार नामों में से कम से कम दो लोगों को शामिल करने का सुझाव दिया है। इनमें पूर्व योजना आयोग सदस्य बालचंद्र मुंगेकर, पत्रकार पी. साईनाथ, सामाजिक कार्यकर्ता राम पुनियानी और शिक्षाविद सुखदेव थोराट के नाम शामिल हैं।

छात्रों का कहना है कि बाहरी विशेषज्ञों की मौजूदगी से जांच पर संस्थान के अंदरूनी प्रभाव की आशंका कम होगी और प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।

प्रोफेसर दुल्ला को लेकर भी छात्रों की मांग

छात्रों ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला को जांच पूरी होने तक सभी जिम्मेदारियों से हटाने की मांग की है। दुल्ला का नाम साहिल के मामले में दर्ज पुलिस FIR में है। FIR में साहिल के परिवार की ओर से जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। दुल्ला को पहले ही जांच के दौरान छुट्टी पर भेजा जा चुका है। इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

छात्रों ने IIT बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे के इस्तीफे की भी मांग की है। यह छात्रों की मांग है, न कि किसी जांच एजेंसी द्वारा तय की गई जिम्मेदारी।

सिर्फ जांच नहीं, छात्र कल्याण व्यवस्था में बदलाव की मांग

कैंडल मार्च के दौरान छात्रों ने केवल साहिल मामले की जांच तक अपनी मांगें सीमित नहीं रखीं। उन्होंने IIT बॉम्बे की Student Welfare Centre व्यवस्था में भी बदलाव की मांग की है।

छात्रों की मांगों में छात्र कल्याण केंद्र का नियमित ऑडिट, मेडिकल योग्यता वाले Dean of Students’ Welfare की नियुक्ति और अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता शामिल है।

उन्होंने Disciplinary Action Committee के मामलों को ट्रैक करने की व्यवस्था और छात्रों के लिए चरणबद्ध तथा सुधारात्मक अनुशासन प्रणाली लागू करने की मांग भी की है।

SC/ST सेल के पुनर्गठन की मांग

छात्रों ने IIT बॉम्बे के SC/ST Cell को UGC के मानकों के अनुरूप पुनर्गठित करने की मांग भी उठाई है। इसके साथ पिछले तीन वर्षों की सेल की रिपोर्ट सार्वजनिक करने और साहिल तथा उनके परिवार के खिलाफ कथित जातिगत हमलों की जांच की मांग की गई है।

छात्रों ने यह भी मांग की है कि साहिल के माता-पिता को कैंपस आने के दौरान सुरक्षा दी जाए। इसके अलावा छात्रों को एक ही हॉस्टल फ्लोर पर रहने की अनुमति, मिड-सेमेस्टर परीक्षाओं के आसपास तीन दिन का बफर, एक ही दिन कई परीक्षाएं न कराने और प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कार्रवाई न करने जैसी मांगें भी रखी गई हैं।

पुलिस की जांच कहां तक पहुंची?

साहिल वाकोड़े की मौत की आपराधिक जांच मुंबई पुलिस की Crime Branch कर रही है। 25 सितंबर तक जांच एजेंसी करीब 20 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी थी। इनमें परीक्षा हॉल में मौजूद छात्र, परीक्षा की निगरानी करने वाले लोग और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं।

जांच में साहिल के मोबाइल फोन को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फोन पैटर्न लॉक से सुरक्षित है और फॉरेंसिक विशेषज्ञ उसे एक्सेस करने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस CCTV फुटेज और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों के जरिए 18 सितंबर को परीक्षा के बाद की घटनाओं का क्रम भी समझने की कोशिश कर रही है।

विवाद की शुरुआत परीक्षा से हुई थी

साहिल वाकोड़े, जो IIT बॉम्बे के Energy Science and Engineering विभाग में दूसरे वर्ष के छात्र थे, की 18 सितंबर को मौत हुई। संस्थान की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, उन्हें मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन से ChatGPT का इस्तेमाल करने के आरोप में पकड़ा गया था।

हालांकि, बाद में IIT बॉम्बे ने अपनी शुरुआती संचार सामग्री के लिए माफी मांगी और कहा कि मामले से जुड़े तथ्य जांच के अधीन हैं। पुलिस अब परीक्षा हॉल की CCTV फुटेज समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की जांच कर रही है।

परिवार ने लगाए जातिगत भेदभाव के आरोप

साहिल के माता-पिता रवींद्र और सोनाली वाकोड़े ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को संस्थान में जातिगत भेदभाव और दबाव का सामना करना पड़ा था। रवींद्र की शिकायत के आधार पर 19 सितंबर को Powai पुलिस ने मामला दर्ज किया था, जिसमें प्रोफेसर दुल्ला का नाम शामिल है। बाद में जांच Crime Branch को सौंप दी गई। परिवार ने जांच CBI को सौंपने की मांग भी की है।

इन आरोपों की स्वतंत्र जांच जारी है और अभी इन्हें स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं माना जा सकता।

माता-पिता ने भी किया था विरोध

साहिल के माता-पिता ने 24 सितंबर को मुंबई के आजाद मैदान में भूख हड़ताल शुरू की थी। उन्होंने अपने बेटे के खिलाफ कथित उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव के आरोपों पर कार्रवाई की मांग की थी। रिपोर्टों के मुताबिक, उसी रात उन्होंने धरना समाप्त किया था और बाद में दोबारा प्रदर्शन की संभावना जताई गई थी।

25 सितंबर को दोनों माता-पिता ने मुंबई Crime Branch के बांद्रा कार्यालय में करीब आठ घंटे बिताए। पुलिस के अनुसार, मामले में तब तक 20 लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके थे।

अब मुख्य सवाल: जांच कौन करेगा और कितनी पारदर्शी होगी?

साहिल वाकोड़े की मौत का मामला अब केवल एक छात्र की मौत की जांच तक सीमित नहीं रहा है। IIT बॉम्बे के छात्र जांच की स्वतंत्रता, संस्थागत जवाबदेही, जातिगत भेदभाव की शिकायतों, छात्र कल्याण और अनुशासनात्मक प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे व्यापक मुद्दे उठा रहे हैं।

एक तरफ Crime Branch घटनाक्रम, CCTV, मोबाइल फोन और गवाहों के बयानों के आधार पर आपराधिक जांच आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी तरफ छात्र मौजूदा संस्थागत समिति की जगह बाहरी पैनल की मांग कर रहे हैं। ऐसे में आगे की जांच और उसके निष्कर्ष इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।

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