रांका का कहना है कि देशभर में पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी भर्ती और प्रवेश परीक्षाएं विवादों में रही हैं। कई मामलों में पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने, परिणामों पर सवाल और जांच एजेंसियों की कार्रवाई जैसी घटनाओं ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है।
नई दिल्ली: प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों और संसद में पारित नए संशोधन कानून के बीच शिक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। इसी बीच शिक्षा सुधार और छात्रों के मुद्दों पर मुखर रहने वाले आशुतोष रांका ने केंद्र सरकार की मंशा और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
आशुतोष रांका ने कहा कि केवल पेपर लीक के खिलाफ कानून बना देने या सजा कड़ी कर देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। उनका कहना है कि जब तक परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों, विशेषकर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में व्यापक सुधार (Reforms) और पारदर्शिता (Transparency) नहीं लाई जाएगी, तब तक पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना मुश्किल होगा।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “क्या सच में पेपर लीक रोकने की कोशिश हो रही है, या सिर्फ कानून बनाकर यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि सरकार कार्रवाई कर रही है?”
“कानून नहीं, व्यवस्था में बदलाव जरूरी”
रांका का कहना है कि देशभर में पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी भर्ती और प्रवेश परीक्षाएं विवादों में रही हैं। कई मामलों में पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने, परिणामों पर सवाल और जांच एजेंसियों की कार्रवाई जैसी घटनाओं ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है।
उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुरक्षा, जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई तो केवल सख्त दंड का प्रावधान समस्या की जड़ तक नहीं पहुंचेगा।
NTA सुधारों की मांग
आशुतोष रांका ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में व्यापक सुधारों की आवश्यकता बताते हुए कहा कि एजेंसी की कार्यप्रणाली, परीक्षा प्रक्रिया, डिजिटल सुरक्षा, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में अधिक पारदर्शिता लाई जानी चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि परीक्षा प्रणाली को अधिक जवाबदेह बनाने के लिए स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था, समयबद्ध जांच, आधुनिक साइबर सुरक्षा तंत्र और तकनीकी ऑडिट जैसे कदम उठाए जाने चाहिए। उनका कहना है कि इससे छात्रों का विश्वास दोबारा स्थापित किया जा सकता है।
छात्रों के भविष्य का सवाल
रांका ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्र वर्षों तक मेहनत करते हैं। ऐसे में जब किसी परीक्षा का पेपर लीक होता है या परीक्षा रद्द करनी पड़ती है, तो सबसे बड़ा नुकसान ईमानदारी से तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को होता है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता छात्रों का विश्वास बहाल करना और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना होनी चाहिए।
पेपर लीक कानून पर जारी है बहस
हाल ही में संसद ने पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) संशोधन विधेयक पारित किया है। सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों से पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों पर कड़ी रोक लगेगी तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकेगी। वहीं विपक्ष और कई छात्र संगठनों का तर्क है कि केवल कानून को कठोर बनाने के बजाय परीक्षा प्रणाली में संस्थागत सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करना अधिक आवश्यक है।
इसी बहस के बीच आशुतोष रांका का यह बयान एक बार फिर इस सवाल को केंद्र में ले आया है कि क्या केवल कड़े कानून से पेपर लीक जैसी समस्या का समाधान संभव है, या इसके लिए परीक्षा प्रणाली में व्यापक और संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता है।