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कोलंबिया भूकंप: मलबे से आई मासूम की फुसफुसाहट ने बचाई जान, 38 घंटे बाद महिला भी सुरक्षित निकली

by Admin
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कोलंबिया: 7.4 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप के बाद कोलंबिया में राहत और बचाव अभियान के दौरान इंसानियत और उम्मीद की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। भूकंप के तीसरे दिन कैली शहर में ढही पांच मंजिला इमारत के मलबे से छह महीने के मासूम बच्चे और एक व्यक्ति को जिंदा बचा लिया गया। मलबे के भीतर से सुनाई दी बेहद धीमी आवाज ने रेस्क्यू टीम को जिंदगी की मौजूदगी का संकेत दिया।

मलबे से आई धीमी आवाज ने जगाई उम्मीद

भूकंप के बाद कैली के ला टोरेस डेल लिमोनार आवासीय परिसर में एक पांच मंजिला इमारत पूरी तरह ढह गई थी। मलबे के आसपास गैस रिसाव की चेतावनी के कारण स्थिति बेहद जोखिम भरी थी।

इसी दौरान ब्रायन ओसोरियो जुलुगा बाइक से वहां से गुजर रहे थे। मलबे का दृश्य देखकर उन्होंने रुकने का फैसला किया। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से कुछ देर शांत रहने को कहा, ताकि मलबे के अंदर से किसी तरह की आवाज सुनी जा सके।

कुछ ही देर बाद मलबे के नीचे से बेहद कमजोर आवाज सुनाई दी। अंदर फंसे व्यक्ति ने बताया कि वह वहां मौजूद है और उसके साथ एक छोटा बच्चा भी है।

इस आवाज ने बचाव अभियान को नई दिशा दे दी।

हाथों से हटाया मलबा, भारी स्लैब भी उठाया

स्थानीय स्वयंसेवकों ने बिना देर किए हाथों से मलबा हटाना शुरू कर दिया। बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि किसी भी गलत कदम से मलबा और खिसक सकता था।

रेस्क्यू के दौरान एक भारी कंक्रीट स्लैब रास्ते में बड़ी बाधा बन गया। स्वयंसेवकों ने मिलकर उसे हटाया और धीरे-धीरे मलबे के भीतर तक रास्ता बनाया।

आखिरकार छह महीने के मासूम को बाहर निकाला गया। बच्चे को तत्काल चिकित्सा सहायता दी गई और पुलिसकर्मी की मदद से एंबुलेंस के जरिए अस्पताल भेजा गया। उसके साथ फंसे व्यक्ति को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

मलबे के बीच से बच्चे की जिंदगी बचाने की यह घटना स्थानीय लोगों के लिए उम्मीद और साहस की मिसाल बन गई।

बेटे के जन्मदिन पर मां मलबे में फंसी

इसी भूकंप के दौरान एक दूसरी भावुक कहानी भी सामने आई। रियोसुसियो निवासी जूलियो सीजर लार्गो की 32 वर्षीय बेटी डेनियला परेरा शहर में एक चार मंजिला इमारत के ढहने के बाद मलबे में फंस गई थीं।

संयोग से जिस दिन भूकंप आया, उसी दिन उनके बेटे का 12वां जन्मदिन था। परिवार जन्मदिन की तैयारियों में जुटा था, लेकिन अचानक आई तबाही ने खुशियों को मातम में बदल दिया।

डेनियला करीब 38 घंटे तक मलबे के नीचे फंसी रहीं। बचाव दल ने उन्हें खोजने के बाद करीब 10 घंटे तक लगातार अभियान चलाया। आखिरकार उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

जब डेनियला को अस्पताल ले जाया जा रहा था, तब वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर उनकी हिम्मत का स्वागत किया।

‘मेरी बेटी का दोबारा जन्म हुआ’

डेनियला के पिता जूलियो सीजर लार्गो ने बेटी के बचने को किसी चमत्कार से कम नहीं बताया। उन्होंने इसे अपनी बेटी का ‘दोबारा जन्म’ बताया।

एक तरफ मलबे से छह महीने के बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए स्थानीय स्वयंसेवकों ने अपनी जान जोखिम में डाली, तो दूसरी तरफ 38 घंटे तक मलबे में फंसी डेनियला को बचाने के लिए रेस्क्यू टीम ने लगातार संघर्ष किया।

भूकंप ने मचाई भारी तबाही

पश्चिमी कोलंबिया में आए इस शक्तिशाली भूकंप ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। कई इमारतें ढह गईं और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए। रिपोर्ट के अनुसार, हादसे में 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

हालांकि, तबाही के बीच मलबे से जिंदा लोगों का निकलना राहत और उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है।

छह महीने के मासूम की धीमी फुसफुसाहट से लेकर 38 घंटे बाद डेनियला के सुरक्षित बाहर आने तक, कोलंबिया में बचाव की ये घटनाएं बताती हैं कि भीषण आपदा के बीच भी उम्मीद की एक छोटी सी आवाज जिंदगी बचा सकती है।

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