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तबेले में चल रहा सरकारी स्कूल, CJP टीम से मारपीट के बाद देशभर में चर्चा; BBC की रिपोर्ट के बाद फिर उठे शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

by Admin
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जयपुर: राजस्थान में सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को लेकर सामने आया जयपुर ग्रामीण का एक मामला अब राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। बगरू क्षेत्र के रामपुरा-कंवरपुरा में एक सरकारी स्कूल के बच्चों के कथित तौर पर तबेले जैसे वैकल्पिक परिसर में पढ़ने का मामला सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया। स्कूल की स्थिति देखने पहुंची CJP की टीम के साथ ग्रामीणों की झड़प और मारपीट के आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

अब इस मामले की चर्चा सोशल मीडिया से आगे बढ़कर राष्ट्रीय मीडिया तक पहुंच गई है। BBC ने भी इस घटनाक्रम और स्कूल की स्थिति पर रिपोर्ट की है।

आखिर क्या है पूरा मामला?

रिपोर्टों के मुताबिक, जयपुर ग्रामीण के रामपुरा-कंवरपुरा इलाके में सरकारी स्कूल की मूल इमारत की हालत बेहद खराब हो गई थी। बताया गया कि इमारत को असुरक्षित मानते हुए बच्चों को वहां से हटाया गया और स्कूल को करीब चार किलोमीटर दूर स्थानांतरित किया गया।

लेकिन दूरी अधिक होने के कारण बच्चों की उपस्थिति प्रभावित होने लगी। इसके बाद स्थानीय स्तर पर एक व्यक्ति ने अपने तबेला/बाड़े के परिसर में बच्चों की पढ़ाई के लिए जगह उपलब्ध कराई।

रिपोर्टों के अनुसार, इसी जगह पर टीन शेड के नीचे बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। वहां चारे और पशुओं से जुड़ी गतिविधियों के बीच पढ़ाई होने के दावे सामने आए हैं।

स्कूल देखने पहुंची CJP टीम, फिर हुआ विवाद

इसी स्कूल की स्थिति देखने के लिए CJP की टीम वहां पहुंची थी। टीम का नेतृत्व CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका कर रहे थे।

टीम के पहुंचने के बाद स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया। देखते ही देखते मामला विवाद और झड़प में बदल गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, CJP कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई और कुछ वाहनों के शीशे भी टूटे। महिला कार्यकर्ताओं के साथ कथित बदसलूकी और मोबाइल फोन तोड़े जाने के आरोप भी सामने आए हैं।

हालांकि, दूसरी ओर कुछ ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने मारपीट या पथराव नहीं किया और केवल CJP टीम के स्कूल दौरे का विरोध किया। यानी घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।

‘स्कूल छिपाने’ के आरोप से गरमाई राजनीति

CJP की ओर से आरोप लगाया गया कि स्कूल की बदहाल स्थिति सामने आने से रोकने के लिए उनकी टीम का विरोध किया गया।

AAP नेता रवि पांडे ने भी सोशल मीडिया पोस्ट में इसी मुद्दे को उठाते हुए लिखा कि जिस स्कूल को छिपाने के लिए CJP कार्यकर्ताओं पर हमला हुआ, उसकी तस्वीर अब पूरे देश ने देख ली है और BBC भी वहां पहुंच गया है।

हालांकि, स्कूल को छिपाने या हमले के पीछे किसी राजनीतिक दल के लोगों के शामिल होने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। CJP की ओर से ऐसे आरोप लगाए गए हैं, जबकि स्थानीय ग्रामीणों ने राजनीतिक हस्तक्षेप से इनकार किया है।

जर्जर स्कूल भवन पर भी गंभीर सवाल

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जिस मूल स्कूल भवन को बंद किया गया, उसकी स्थिति काफी खराब थी। भवन में दरारें और बारिश के दौरान पानी टपकने जैसी समस्याओं का भी उल्लेख किया गया है।

मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में शिक्षा देना सरकारी व्यवस्था की मूल जिम्मेदारी है। यदि किसी स्कूल की इमारत असुरक्षित है तो वैकल्पिक व्यवस्था जरूरी है, लेकिन वह व्यवस्था भी बच्चों की सुरक्षा, स्वच्छता और पढ़ाई के लिए उपयुक्त होनी चाहिए।

राजस्थान में कितने स्कूलों के पास अपनी इमारत नहीं?

इस विवाद के बीच राजस्थान में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान सरकार ने बताया है कि राज्य के 611 स्कूलों की अपनी इमारत नहीं है। इसके अलावा बड़ी संख्या में स्कूलों में शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी का भी मुद्दा सामने आया है।

यही वजह है कि जयपुर का यह मामला केवल एक स्कूल की कहानी न रहकर सरकारी शिक्षा व्यवस्था की व्यापक स्थिति पर बहस का मुद्दा बन गया है।

विधायक के पोस्टर ने भी खड़ा किया सवाल

मामले के दौरान स्कूल की पुरानी इमारत पर स्थानीय विधायक से जुड़े पोस्टर लगाए जाने की बात भी रिपोर्टों में सामने आई है। पोस्टर में नई स्कूल बिल्डिंग के लिए 12 लाख रुपये की राशि जारी करने की सिफारिश का उल्लेख बताया गया है।

इसके बाद सवाल उठ रहा है कि यदि नई इमारत की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो बच्चों के लिए तब तक सुरक्षित और उचित अस्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल

विवाद के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। रिपोर्टों में दावा किया गया कि जिला शिक्षा अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे थे। हालांकि, अधिकारियों की ओर से मामले पर विस्तृत जवाब दिए जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ CJP टीम के साथ हुई कथित मारपीट की जांच और दूसरी तरफ उस स्कूल में पढ़ रहे बच्चों के लिए सुरक्षित एवं सम्मानजनक शैक्षणिक व्यवस्था सुनिश्चित करना।

‘बच्चों की पढ़ाई राजनीति का मुद्दा नहीं बननी चाहिए’

जयपुर की इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है—अगर किसी सरकारी स्कूल की इमारत जर्जर है, तो बच्चों की पढ़ाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कैसी होनी चाहिए?

स्कूल की बदहाली उजागर करने पहुंची टीम के साथ विवाद और मारपीट के आरोप अपनी जगह गंभीर हैं, लेकिन उससे भी बड़ा मुद्दा उन बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा है जो ऐसी परिस्थितियों में पढ़ने को मजबूर बताए जा रहे हैं।

अब देखना होगा कि राजस्थान सरकार और शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और बच्चों को कब तक बेहतर एवं सुरक्षित स्कूल भवन उपलब्ध कराया जाता है।

एक तरफ स्कूल की बदहाली, दूसरी तरफ उसे देखने पहुंची टीम के साथ विवाद—जयपुर का यह मामला राजस्थान की सरकारी शिक्षा व्यवस्था के सामने कई असहज सवाल छोड़ गया है।

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