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IIT बॉम्बे में छात्र की मौत के बाद प्रोफेसर दूल्ला पर गंभीर आरोप, सोशल मीडिया पोस्ट में पुराने मामलों का भी जिक्र

by Admin
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साहिल वाकोड़े के पिता की शिकायत के मुताबिक, उनके बेटे ने परिवार को बताया था कि उसके साथ कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था और उसे धमकी दी जाती थी। पिता ने प्रोफेसर दूल्ला का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि साहिल को उसकी जाति को लेकर परेशान किया गया और उसे झूठे मामले में फंसाने की धमकी भी दी गई।

मुंबई: IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोड़े की मौत के बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। साहिल के पिता ने पुलिस शिकायत में आरोप लगाया है कि उनके बेटे को पिछले कुछ महीनों से जातिसूचक टिप्पणियों, मानसिक प्रताड़ना और धमकियों का सामना करना पड़ा था। इन आरोपों के आधार पर मुंबई पुलिस ने प्रोफेसर दूल्ला के खिलाफ मामला दर्ज किया है और जांच अब मुंबई क्राइम ब्रांच के पास है।

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब सोशल मीडिया पर दूल्ला के पुराने व्यवहार और कथित तौर पर उनके द्वारा छात्रों के साथ किए गए व्यवहार को लेकर कई दावे सामने आने लगे। एक्टिविस्ट रवि परमार ने अपनी X पोस्टों में प्रोफेसर दूल्ला पर गंभीर आरोप लगाए हैं और दावा किया है कि यह केवल साहिल वाकोड़े का मामला नहीं है, बल्कि इससे पहले भी छात्रों के साथ उनके व्यवहार को लेकर शिकायतें और विवाद सामने आते रहे हैं।

साहिल के परिवार ने क्या आरोप लगाए?

साहिल वाकोड़े के पिता की शिकायत के मुताबिक, उनके बेटे ने परिवार को बताया था कि उसके साथ कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था और उसे धमकी दी जाती थी। पिता ने प्रोफेसर दूल्ला का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि साहिल को उसकी जाति को लेकर परेशान किया गया और उसे झूठे मामले में फंसाने की धमकी भी दी गई।

पुलिस ने इसी शिकायत के आधार पर प्रोफेसर दूल्ला के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और SC/ST (अत्याचार निवारण) कानून के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है।

हालांकि, ये आरोप अभी जांच का विषय हैं और अदालत या जांच एजेंसी की ओर से इन्हें सिद्ध तथ्य के रूप में घोषित नहीं किया गया है।

परीक्षा में मोबाइल मिलने की घटना भी विवाद के केंद्र में

साहिल की मौत से कुछ घंटे पहले 18 सितंबर को वह एक परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर पकड़ा गया था। IIT बॉम्बे ने अपने बयान में कहा था कि छात्र को परीक्षा के बाद काउंसल किया गया और उसके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई। संस्थान के मुताबिक, उसे यह भी बताया गया था कि इस घटना से उसके अकादमिक करियर पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

दूसरी ओर, साहिल के परिवार ने इस घटनाक्रम को अलग संदर्भ में देखा है और प्रोफेसर तथा संस्थान के अधिकारियों पर मानसिक एवं जातिगत उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। यही विरोधाभासी दावे इस मामले की जांच को महत्वपूर्ण बनाते हैं।

रवि परमार की पोस्ट से विवाद और तेज

एक्टिविस्ट रवि परमार ने X पर कई पोस्ट के जरिए इस मामले को जातिगत भेदभाव और संस्थागत जवाबदेही से जोड़ा है। एक पोस्ट में उन्होंने IIT बॉम्बे में जातिगत भेदभाव होने का दावा करते हुए संस्थान में प्रोफेसरों की सामाजिक संरचना पर भी सवाल उठाए।

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि परीक्षा में मोबाइल इस्तेमाल करने की घटना को साहिल की मौत के संदर्भ में सामने लाकर कथित जातिगत आरोपों से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है। ये रवि परमार के व्यक्तिगत आरोप और राजनीतिक-सामाजिक टिप्पणी हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

परमार की पोस्टों में पुराने छात्रों के मामलों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें कुछ छात्रों के नाम देकर यह दावा किया गया है कि प्रोफेसर दूल्ला के व्यवहार के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई हुई या उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। इन नामों और प्रत्येक मामले की वास्तविक परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि किए बिना उन्हें प्रमाणित घटनाओं के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

2020 के दर्शन सोलंकी मामले का संदर्भ

सोशल मीडिया पर कुछ पोस्टों में 2020 के दर्शन सोलंकी मामले का भी संदर्भ दिया जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों से ऐसा प्रत्यक्ष रूप से स्थापित नहीं होता कि प्रोफेसर दूल्ला की उस मामले में कोई भूमिका थी। इसलिए इस दावे को तथ्य के रूप में जोड़ना फिलहाल उचित नहीं होगा।

दर्शन सोलंकी का मामला अलग और अत्यंत संवेदनशील घटना है। इसलिए साहिल वाकोड़े मामले से उसे जोड़ते समय आधिकारिक दस्तावेजों या जांच रिकॉर्ड का स्पष्ट आधार जरूरी है।

IIT फैकल्टी में भी मतभेद

इस विवाद के बीच IIT बॉम्बे के फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर दूल्ला के समर्थन में बयान जारी किया है। फोरम ने उनके काम की सराहना की और कहा कि उन्हें डीन (प्रशासनिक मामलों) के पद से अस्थायी रूप से हटाया जाना जांच को स्वतंत्र और पारदर्शी रखने के लिए किया गया कदम है, न कि उनके खिलाफ अंतिम अनुशासनात्मक कार्रवाई।

वहीं, कुछ अन्य फैकल्टी संगठनों ने निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की है। इस तरह संस्थान के भीतर भी मामले को लेकर अलग-अलग मत सामने आए हैं।

जांच अब सबसे अहम

साहिल वाकोड़े की मौत के मामले में फिलहाल दो अलग-अलग पक्ष सामने हैं। एक ओर IIT बॉम्बे का कहना है कि परीक्षा में मोबाइल इस्तेमाल किए जाने के बाद छात्र को काउंसल किया गया और उसके करियर को नुकसान न पहुंचने का आश्वासन दिया गया था। दूसरी ओर परिवार ने जातिगत अपमान, मानसिक प्रताड़ना और धमकियों के गंभीर आरोप लगाए हैं।

इन आरोपों की सच्चाई जांच के दौरान सामने आएगी। CCTV फुटेज, परीक्षा कक्ष में मौजूद छात्रों और शिक्षकों के बयान, परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों से संबंधित साक्ष्य, पुलिस रिकॉर्ड तथा संस्थान के दस्तावेज इस जांच में महत्वपूर्ण होंगे।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि प्रोफेसर दूल्ला के खिलाफ पुलिस मामला दर्ज हो चुका है और जांच क्राइम ब्रांच कर रही है। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे अतिरिक्त आरोपों और पुराने मामलों को अंतिम सत्य मानने के बजाय उनकी स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार करना महत्वपूर्ण है।

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