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‘शिक्षा क्रांति’ के समर्थन में 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च, सोनम वांगचुक ने देशवासियों से की बड़ी अपील; बोले- यह बच्चों के भविष्य और अन्याय के खिलाफ लड़ाई

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सोनम वांगचुक ने अपने संदेश में कहा,”कल 20 जुलाई को शिक्षा क्रांति के समर्थन में होने वाले प्रोटेस्ट मार्च के लिए मैं भी जंतर-मंतर पहुँचूँगा। यह मार्च किसी एक व्यक्ति या संगठन के समर्थन में नहीं है। यह देश के बच्चों के भविष्य के समर्थन में मार्च है। यह भारत को शिक्षा माफिया से आज़ाद कराने का मार्च है।”

नई दिल्ली। पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक ने देशभर के छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और जागरूक नागरिकों से 20 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ‘शिक्षा क्रांति समर्थन मार्च’ में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल के समर्थन में नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अन्याय के खिलाफ एक जनआंदोलन है।

सोनम वांगचुक इस समय दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं। अस्पताल से उन्होंने अपनी पत्नी गीतांजलि के माध्यम से एक संदेश जारी किया है, जिसमें लोगों से जंतर-मंतर से संसद तक प्रस्तावित मार्च को ऐतिहासिक और सफल बनाने का आह्वान किया गया है।

“यह किसी व्यक्ति का नहीं, बच्चों के भविष्य का आंदोलन है”

सोनम वांगचुक ने अपने संदेश में कहा,

“कल 20 जुलाई को शिक्षा क्रांति के समर्थन में होने वाले प्रोटेस्ट मार्च के लिए मैं भी जंतर-मंतर पहुँचूँगा। यह मार्च किसी एक व्यक्ति या संगठन के समर्थन में नहीं है। यह देश के बच्चों के भविष्य के समर्थन में मार्च है। यह भारत को शिक्षा माफिया से आज़ाद कराने का मार्च है।”

उन्होंने आगे कहा,

“अगर आप अपने बच्चों और देश का बेहतर भविष्य चाहते हैं, तो यह आपकी भी लड़ाई है। 20 जुलाई को इस लड़ाई की आवाज़ बनिए।”

वांगचुक ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, परीक्षा संबंधी अनियमितताओं और छात्रों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ अब समाज के हर वर्ग को एकजुट होकर आवाज़ उठानी होगी।

“भारत का दूसरा आज़ादी आंदोलन” बताया मार्च को

सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी एक भावनात्मक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने 20 जुलाई के आंदोलन को “India’s 2nd Freedom Movement” (भारत का दूसरा आज़ादी आंदोलन) बताया।

उन्होंने अपने संदेश में लिखा—

20 जुलाई
आज़ादी का दूसरा आंदोलन

भय मुक्त भारत
अन्याय मुक्त भारत

पेपर लीक जैसे अन्याय से आज़ादी
अवैध हिरासत के डर से आज़ादी

इसके साथ उन्होंने देशवासियों से अपील करते हुए कहा—

“20 जुलाई को संसद मार्च को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाइए।”

यह संदेश उन्होंने अपनी पत्नी गीतांजलि के माध्यम से भेजा, जिसमें यह भी लिखा गया कि यह संदेश उन्होंने सफदरजंग अस्पताल में अपनी कथित अवैध हिरासत के दौरान भेजा है।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

सोनम वांगचुक पिछले कई सप्ताह से NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

उन्होंने 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार हो रही गड़बड़ियों से लाखों मेहनती छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। फिलहाल उनके अस्पताल में भर्ती रहने को लेकर मामला दिल्ली हाई कोर्ट में भी विचाराधीन है।

क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है यह मार्च?

20 जुलाई को प्रस्तावित यह मार्च केवल सोनम वांगचुक के समर्थन का कार्यक्रम नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर जनसमर्थन जुटाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

आयोजकों का कहना है कि इस मार्च का उद्देश्य—

शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त रोक लगाने की मांग उठाना।
छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए मजबूत कानून बनाने की मांग करना।
परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और विश्वास बहाल करना।
शिक्षा माफिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ जनमत तैयार करना।
छात्रों और अभिभावकों से भावनात्मक अपील

वांगचुक ने अपने संदेश में विशेष रूप से छात्रों और अभिभावकों से कहा कि यह केवल आज की लड़ाई नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है।

उन्होंने कहा कि यदि देश की शिक्षा व्यवस्था को निष्पक्ष, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाना है, तो समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा।

20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च

आयोजकों ने छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पहुँचकर संसद मार्च में शामिल हों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता तथा छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी आवाज़ बुलंद करें।

क्या रहेगा आंदोलन का मुख्य संदेश?
शिक्षा माफिया के खिलाफ देशव्यापी आवाज़।
पेपर लीक और परीक्षा घोटालों पर सख्त कार्रवाई की मांग।
छात्रों के भविष्य की सुरक्षा।
निष्पक्ष और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था।
“भय मुक्त भारत, अन्याय मुक्त भारत” के संकल्प के साथ संसद तक मार्च।

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