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कांग्रेस की बढ़ी चिंता! क्या परिसीमन बिल पर मोदी सरकार का साथ देगी DMK? मानसून सत्र से पहले INDIA गठबंधन में बढ़ी हलचल

by Admin
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कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल परिसीमन के मौजूदा स्वरूप पर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में DMK का अलग रुख अपनाना विपक्षी गठबंधन की रणनीति को प्रभावित कर सकता है और मानसून सत्र में विपक्ष की एकजुटता कमजोर पड़ सकती है। फिलहाल DMK द्वारा सरकार का समर्थन करने का दावा RSP सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन ने किया है। इस पर DMK की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले परिसीमन (Delimitation) विधेयक को लेकर देश की राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है। जिस मुद्दे पर अब तक विपक्षी दल केंद्र सरकार का विरोध करते रहे हैं, उसी पर अब INDIA गठबंधन के भीतर मतभेद उभरते दिखाई दे रहे हैं। विपक्षी खेमे में सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK (द्रविड़ मुनेत्र कषगम) का रुख बदलता नजर आ रहा है।

अगर संसद में भी DMK सरकार के पक्ष में खड़ी होती है, तो यह न केवल मोदी सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक बढ़त होगी, बल्कि INDIA गठबंधन की एकजुटता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

सर्वदलीय बैठक में क्या हुआ?

रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) के सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन ने दावा किया है कि संसद के मानसून सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में केंद्र सरकार ने परिसीमन विधेयक पर चर्चा की।

प्रेमचंद्रन के मुताबिक, इस दौरान DMK ने सरकार के प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने CNN-News18 से बातचीत में कहा,

“दुर्भाग्य से सर्वदलीय बैठक में DMK ने परिसीमन बिल पर सरकार का समर्थन किया।”

हालांकि, DMK की ओर से अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं किया गया है।

क्या है परिसीमन बिल?

परिसीमन यानी लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं तथा सीटों का नए जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर पुनर्निर्धारण।

यदि यह प्रक्रिया लागू होती है, तो कई राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ या घट सकती है। यही कारण है कि यह मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। विशेष रूप से दक्षिण भारत के कई दलों ने आशंका जताई है कि नए परिसीमन से उनकी संसदीय हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है।

NDA को मिल सकती है बड़ी राहत

परिसीमन विधेयक यदि संविधान संशोधन के रूप में लाया जाता है, तो इसे पारित कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी।

पिछले प्रयासों में सरकार आवश्यक समर्थन जुटाने में सफल नहीं हो पाई थी। लेकिन यदि DMK जैसे बड़े विपक्षी दल का समर्थन मिलता है, तो NDA की राह काफी आसान हो सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि DMK का समर्थन मिलने पर सरकार के लिए विपक्ष की एकजुटता को कमजोर करना भी आसान हो जाएगा।

INDIA गठबंधन के सामने नई चुनौती

यदि संसद में DMK वास्तव में सरकार के पक्ष में मतदान करती है, तो यह INDIA गठबंधन के भीतर अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक मतभेद माना जाएगा।

कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल परिसीमन के मौजूदा स्वरूप पर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में DMK का अलग रुख अपनाना विपक्षी गठबंधन की रणनीति को प्रभावित कर सकता है और मानसून सत्र में विपक्ष की एकजुटता कमजोर पड़ सकती है। फिलहाल DMK द्वारा सरकार का समर्थन करने का दावा RSP सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन ने किया है। इस पर DMK की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

मानसून सत्र पर रहेंगी सभी की निगाहें

अब सबकी नजर संसद के मानसून सत्र पर टिकी है। यदि सरकार परिसीमन विधेयक को आगे बढ़ाती है और DMK खुलकर उसका समर्थन करती है, तो यह न सिर्फ NDA के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता होगी, बल्कि INDIA गठबंधन के भीतर नए समीकरणों और संभावित दरारों की शुरुआत भी मानी जा सकती है।

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