आंदोलन का सबसे भावुक क्षण तब आया जब AISA के छात्र नेता नेहा, मनीष और आमीन, जो पिछले 23 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे थे, उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया। कार्यक्रम में मौजूद वरिष्ठ अभिनेत्री शबाना आज़मी, राज्यसभा सांसद मनोज झा, सामाजिक कार्यकर्ता राजा राम, सांसद अमराराम तथा अभिनेता प्रकाश राज ने छात्रों को जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया।
नई दिल्ली: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर रविवार को राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों, युवाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन में हजारों की संख्या में छात्र और समर्थक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकालने का ऐलान किया, जिसके मद्देनजर पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया।
कड़ी सुरक्षा, बैरिकेडिंग और भारी पुलिस बल
दिल्ली पुलिस ने संसद की ओर बढ़ने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए। इसके अलावा वॉटर कैनन और आंसू गैस के वाहन भी मौके पर तैयार रखे गए। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि NEET पेपर लीक ने देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों का आरोप है कि बार-बार पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के बावजूद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं हो रही है। आंदोलनकारियों ने निष्पक्ष जांच, दोषियों को सख्त सजा, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई।
23 दिन बाद समाप्त हुआ AISA नेताओं का अनशन
आंदोलन का सबसे भावुक क्षण तब आया जब AISA के छात्र नेता नेहा, मनीष और आमीन, जो पिछले 23 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे थे, उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया। कार्यक्रम में मौजूद वरिष्ठ अभिनेत्री शबाना आज़मी, राज्यसभा सांसद मनोज झा, सामाजिक कार्यकर्ता राजा राम, सांसद अमराराम तथा अभिनेता प्रकाश राज ने छात्रों को जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया।
इस दौरान मंच से स्पष्ट संदेश दिया गया कि यह आंदोलन की समाप्ति नहीं, बल्कि केवल संघर्ष के एक चरण का समापन है। छात्र नेताओं ने कहा कि उनकी लड़ाई शिक्षा व्यवस्था को भ्रष्टाचार और पेपर लीक माफिया से मुक्त कराने के लिए है और यह आंदोलन आगे भी विभिन्न लोकतांत्रिक तरीकों से जारी रहेगा।
“यह अनशन खत्म हुआ है, आंदोलन नहीं”
छात्र नेताओं ने कहा कि 23 दिनों का अनशन छात्रों के भविष्य और देश की शिक्षा व्यवस्था को बचाने की लड़ाई का प्रतीक था। उनका कहना था कि यदि सरकार ने छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
प्रमुख मांगें
NEET पेपर लीक मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच।
पेपर लीक के मास्टरमाइंड और पूरे नेटवर्क पर कठोर कार्रवाई।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग।
राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना।
छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए मजबूत कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था लागू करना।
देशभर से मिला समर्थन
आंदोलन को कई छात्र संगठनों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कलाकारों और राजनीतिक नेताओं का समर्थन मिला। वक्ताओं ने कहा कि यह किसी एक संगठन का आंदोलन नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य की लड़ाई है। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना युवाओं का विश्वास बहाल नहीं किया जा सकता।
छात्र संगठनों ने घोषणा की कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाती है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को देशव्यापी रूप दिया जाएगा। जंतर-मंतर से उठी यह आवाज अब केवल NEET पेपर लीक तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र में सुधार की मांग का प्रतीक बनती जा रही है।