नई दिल्ली। देश आज 80वां स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह और उमंग के साथ मना रहा है। इस मौके पर बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने देश-विदेश में रहने वाले समस्त भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में मायावती ने जहां देशवासियों से आजादी के पर्व को आपसी भाईचारे और मेलजोल के साथ मनाने की अपील की, वहीं उन्होंने उच्च संवैधानिक एवं कानूनी पदों पर बैठे लोगों की जिम्मेदारियों को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही।
‘भाईचारे और मेलजोल के साथ मनाएं स्वतंत्रता दिवस’
मायावती ने अपने संदेश में कहा कि स्वतंत्रता दिवस देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिन प्रत्येक भारतीय को आजादी के संघर्ष और उसके मूल्यों को याद करते हुए देश की एकता, अखंडता और भाईचारे की भावना को मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश-दुनिया में रहने वाले सभी भारतीय इस राष्ट्रीय पर्व को हर्ष और उल्लास के साथ मनाएं। उनके मुताबिक, आपसी भाईचारा, सामाजिक सौहार्द और मेलजोल ही देश की लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की बुनियाद हैं।
संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही पर जोर
मायावती ने अपने संदेश में केवल शुभकामनाओं तक सीमित न रहते हुए देश की संवैधानिक व्यवस्था और संस्थाओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उच्च संवैधानिक और कानूनी पदों पर बैठे लोगों को अपने दायित्वों के प्रति और अधिक सचेत एवं जिम्मेदार रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश की जनता अब यह अपेक्षा पहले से अधिक करने लगी है कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोग वास्तविक देशहित और जनहित के प्रति ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें।
मायावती के संदेश का एक प्रमुख हिस्सा भारतीय संविधान में निहित ‘चेक एंड बैलेंस’ की व्यवस्था को लेकर रहा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस जैसे विशेष अवसरों पर लोगों को उम्मीद रहती है कि देश की उच्च संस्थाएं संविधान की भावना के अनुरूप अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों का निष्पक्षता एवं ईमानदारी से पालन करेंगी।
‘लोकतंत्र का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे’
BSP प्रमुख ने अपने संदेश में सामाजिक न्याय के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि भारत के गणतंत्र होने का वास्तविक लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से दलितों, आदिवासियों, अति-पिछड़ों, मुस्लिम और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के गरीबों, मजदूरों, किसानों, युवाओं और महिलाओं समेत सभी मेहनतकश लोगों को सम्मानजनक और खुशहाल जीवन मिलना लोकतंत्र की वास्तविक सफलता होगी।
उनके मुताबिक, स्वतंत्रता का अर्थ केवल राजनीतिक आजादी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर, न्याय और बेहतर जीवन उपलब्ध कराना भी है।
बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से मुक्ति की अपेक्षा
मायावती ने बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को भी देश की बड़ी चुनौतियों में शामिल करते हुए कहा कि जनता ऐसी व्यवस्था की अपेक्षा करती है जिसमें उसे रोजगार के बेहतर अवसर मिलें और भ्रष्टाचार पर प्रभावी तरीके से अंकुश लगे।
उन्होंने कहा कि जब गरीब, मजदूर, किसान, युवा और महिलाएं सुरक्षित, सम्मानजनक और खुशहाल जीवन जी सकेंगे, तभी आजादी और गणतंत्र की भावना सही मायनों में सार्थक होगी।
संविधान और लोकतंत्र को मजबूत करने का संदेश
मायावती ने अपने स्वतंत्रता दिवस संदेश में संविधान को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार बताते हुए संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्ष भूमिका पर जोर दिया। उनका कहना है कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब देश की संस्थाएं अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाएंगी।
उन्होंने उम्मीद जताई कि देश की संवैधानिक व्यवस्था जनता की अपेक्षाओं पर खरी उतरेगी और समाज के वंचित एवं कमजोर वर्गों को न्याय तथा समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी भूमिका निभाएगी।
‘यही आज के दिन का संदेश’
मायावती ने अपने स्वतंत्रता दिवस संदेश को केवल शुभकामनाओं तक सीमित न रखते हुए सामाजिक न्याय, संवैधानिक जवाबदेही, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनहित से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी का सही लाभ तभी माना जाएगा, जब समाज के सभी वर्गों के लोगों को बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और असमानता से मुक्त होकर सम्मान और खुशहाली के साथ जीवन जीने का अवसर मिले।
उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतंत्र लोगों की उम्मीदों के अनुरूप तभी सार्थक साबित होंगे, जब उनकी संस्थागत व्यवस्था ईमानदारी, निष्पक्षता और जवाबदेही के साथ काम करेगी। मायावती ने इसे स्वतंत्रता दिवस के दिन देश के लिए महत्वपूर्ण संदेश बताया।