आयोजकों ने कहा, “यह केवल आरक्षण की लड़ाई नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और अस्तित्व की लड़ाई है।” उन्होंने अनुसूचित जाति समुदाय के अधिकारों की रक्षा और संवैधानिक प्रावधानों पर संभावित आघात को रोकने के लिए बड़ी संख्या में लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की है।
नागपुर, 16 जून: अनुसूचित जातियों के आरक्षण में उपवर्गीकरण के मुद्दे को लेकर राज्य में माहौल गर्म हो गया है। इसी निर्णय के विरोध में शनिवार, 20 जून को नागपुर में एक विशाल मोर्चे का आयोजन किया गया है। विभिन्न आंबेडकरी, बौद्ध, सामाजिक, छात्र एवं कर्मचारी संगठनों ने इस मोर्चे को समर्थन दिया है। राज्यभर से हजारों लोगों के इसमें शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
आयोजकों के अनुसार, अनुसूचित जातियों के संवैधानिक आरक्षण को प्रभावित करने वाले किसी भी प्रयास का विरोध करने के लिए यह मोर्चा निकला जा रहा है। उनका कहना है कि अनुसूचित जातियां पहले से ही संविधान की अनुसूची में शामिल और वर्गीकृत हैं, ऐसे में उनके भीतर उपवर्गीकरण का प्रयास सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
मोर्चे के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के विरोध में कड़ा रुख अपनाया जाएगा। आंदोलनकारियों का मानना है कि उपवर्गीकरण से अनुसूचित जाति समाज की एकता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि सरकार के पास उपवर्गीकरण के लिए आवश्यक अद्यतन और व्यापक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी इस मुद्दे को आगे बढ़ाया जा रहा है।
आयोजकों ने कहा, “यह केवल आरक्षण की लड़ाई नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और अस्तित्व की लड़ाई है।” उन्होंने अनुसूचित जाति समुदाय के अधिकारों की रक्षा और संवैधानिक प्रावधानों पर संभावित आघात को रोकने के लिए बड़ी संख्या में लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की है।
मोर्चे में विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, विधि विशेषज्ञ, शोधकर्ता, छात्र और महिला प्रतिनिधि शामिल होंगे। मार्च के बाद सरकार के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा जाएगा। साथ ही, उपवर्गीकरण संबंधी निर्णय को वापस लेने की मांग की जाएगी।
नागपुर के अलावा विदर्भ, मराठवाड़ा, पश्चिम महाराष्ट्र और उत्तर महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के आने की संभावना है। इसे राज्य में उपवर्गीकरण विरोधी आंदोलन का एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।