नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार ने आंदोलनकारियों के साथ बातचीत के नाम पर केवल समय बर्बाद किया। उन्होंने दावा किया कि CJP के प्रतिनिधि आशुतोष रांका और सौरव दास को केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के आवास पर करीब पांच घंटे तक बैठाकर रखा गया, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
अभिजीत दीपके ने यह बयान ऐसे समय दिया है, जब जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है।
दीपके ने कहा कि सरकार यदि वास्तव में छात्रों की समस्याओं का समाधान चाहती, तो बातचीत के दौरान कोई सकारात्मक फैसला सामने आता। लेकिन इसके बजाय प्रतिनिधियों को घंटों इंतजार कराया गया और बाद में आंदोलनकारियों पर पुलिस कार्रवाई की गई।
उन्होंने आंदोलन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज और बल प्रयोग में घायल हुए CJP समर्थकों से सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी। दीपके ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों की मांग कर रहे छात्रों और समर्थकों को हिंसा का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा, “मैं उन सभी CJP समर्थकों से माफी मांगता हूं जिन्हें आंदोलन के दौरान पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। यह लड़ाई छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए है, और हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।”
CJP का दावा है कि संसद मार्च और जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों और समर्थकों को पुलिस ने हिरासत में लिया, लाठीचार्ज किया और कई प्रदर्शनकारियों को चोटें आईं। संगठन लगातार मांग कर रहा है कि इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
गौरतलब है कि CJP पिछले कई दिनों से NEET और अन्य परीक्षा पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तथा शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग को लेकर आंदोलन कर रही है। आंदोलन के दौरान जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी आमरण अनशन पर बैठे थे, जिनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
फिलहाल, CJP ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।