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भामरागढ़ में बाढ़ का कहर: 300 से अधिक घर जलमग्न, बिजली-मोबाइल सेवा ठप, जिला मुख्यालय से संपर्क टूटा

by Admin
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गढ़चिरौली: महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के भामरागढ़ तहसील में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। पर्लकोटा नदी में आई भीषण बाढ़ के कारण तहसील मुख्यालय समेत आसपास के कई गांव जलमग्न हो गए हैं। बाढ़ का पानी बाजार और रिहायशी इलाकों में घुसने से 300 से अधिक घर डूब गए हैं। लोगों के घरों में रखा अनाज, फर्नीचर, घरेलू सामान और अन्य जरूरी वस्तुएं पानी में बह गईं या खराब हो गईं। हालात इतने गंभीर हैं कि तहसील मुख्यालय का जिला मुख्यालय से संपर्क भी पूरी तरह कट गया है।

लगातार बारिश बनी आफत की वजह

मौसम विभाग ने 29 जुलाई को गढ़चिरौली जिले के लिए भारी बारिश का ‘रेड अलर्ट’ जारी किया था। इसके बाद लगातार दो दिनों तक हुई मूसलाधार बारिश से पर्लकोटा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता गया। 30 जुलाई की रात लगभग साढ़े 11 बजे नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई और मध्यरात्रि तक बाढ़ का पानी अचानक शहर और गांवों की बस्तियों में घुस गया। देखते ही देखते सड़कें, बाजार और घर पानी में डूब गए।

300 से अधिक घरों में घुसा पानी

बाढ़ का सबसे ज्यादा असर भामरागढ़ शहर और आसपास के इलाकों में देखने को मिला। स्थानीय प्रशासन के अनुसार करीब 80 प्रतिशत आबादी प्रभावित हुई है और 300 से अधिक घरों में पानी भर गया। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। कई परिवारों का राशन, कपड़े, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और जरूरी दस्तावेज भी बाढ़ की चपेट में आ गए।

कई गांवों में भारी नुकसान

भामरागढ़ के अलावा मेडपल्ली, धोड़राज, ईदमपल्ली, कोठी, फुफ्फुर और इरझाड़ी सहित कई गांवों में भी बाढ़ से व्यापक नुकसान हुआ है। खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूब गई हैं, जबकि कई ग्रामीण संपर्क मार्ग भी जलमग्न होने से आवागमन बाधित हो गया है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार कृषि और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को भी भारी क्षति पहुंची है।

48 घंटे से बिजली और मोबाइल नेटवर्क बंद

बाढ़ के कारण पूरे क्षेत्र में पिछले 48 घंटे से बिजली आपूर्ति ठप है। इसके साथ ही बीएसएनएल सहित सभी निजी मोबाइल कंपनियों के नेटवर्क भी बंद पड़े हैं। संचार व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त होने से लोग अपने परिजनों या प्रशासन से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। बिजली और मोबाइल सेवा बंद होने से राहत एवं बचाव कार्यों में भी कठिनाइयां आ रही हैं।

जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूटा

सड़क मार्ग बाधित होने और संचार सेवाएं ठप होने के कारण भामरागढ़ तहसील मुख्यालय का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आपदा जैसी स्थिति में प्रशासनिक व्यवस्था और तेज होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक कई इलाकों में राहत पहुंचने में देरी हो रही है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर भी संकट

बाढ़ के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था भी गंभीर संकट का सामना कर रही है। स्थानीय ग्रामीण अस्पताल में स्थायी चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों के इलाज की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। नागरिकों का कहना है कि 2019 की महाबाढ़ के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के दावे किए गए थे, लेकिन मौजूदा हालात उन दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

नाले में बहे युवक का शव मिला

इसी बीच भारी बारिश के कारण उफनाए एक नाले में बह गए युवक का शव शुक्रवार को बरामद किया गया। जानकारी के अनुसार रोरेश रोयच (28), निवासी हरदरा (आरमोरी) गुरुवार को सातारगांव मेढ़ी नाले को दोपहिया वाहन से पार करने का प्रयास कर रहे थे। स्थानीय लोगों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव में वह बह गए। आपदा प्रबंधन दल और स्थानीय नागरिकों ने लगातार तलाश अभियान चलाया, जिसके बाद शुक्रवार को अंजनिया के पास उनका शव मिला। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

प्रशासन अलर्ट पर, लोगों से सावधानी बरतने की अपील

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी-नालों के पास न जाएं और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें। राहत एवं बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रहे हैं। मौसम विभाग ने भी अगले कुछ समय तक भारी बारिश की संभावना जताई है, जिसके चलते प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

बाढ़ की इस भयावह स्थिति ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान दूरदराज के आदिवासी इलाकों में संचार, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। फिलहाल प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री पहुंचाने और जनजीवन को सामान्य बनाने के प्रयास जारी हैं।

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