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‘बेटा कहता था- मुझे जातिसूचक गालियां दी जा रही हैं, हमने समझाया कि…’ IIT छात्र साहिल की मां ने मांगा इंसाफ

by Admin
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सोनाली वाकोड़े ने कहा कि वह अपने बच्चे को खो चुकी हैं और अब चाहती हैं कि उनके बेटे के साथ कथित तौर पर जो अत्याचार हुआ, उसकी निष्पक्ष जांच हो और उसे न्याय मिले।

मुंबई: IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोड़े की मौत के मामले में उनकी मां सोनाली वाकोड़े ने भावुक अपील करते हुए अपने बेटे के लिए इंसाफ की मांग की है। एक इंटरव्यू में उन्होंने आरोप लगाया कि साहिल ने मौत से कुछ दिन पहले उन्हें बताया था कि उसे परेशान किया जा रहा है और जातिसूचक गालियां दी जा रही हैं।

सोनाली वाकोड़े ने कहा कि वह अपने बच्चे को खो चुकी हैं और अब चाहती हैं कि उनके बेटे के साथ कथित तौर पर जो अत्याचार हुआ, उसकी निष्पक्ष जांच हो और उसे न्याय मिले।

’13 तारीख को बेटे ने कहा था- मुझे थोड़ा परेशान किया जा रहा है’

साहिल की मां ने बताया कि जब वे 13 सितंबर को साहिल से मिलने उसके कमरे में गई थीं, तब उसने उनसे अपनी परेशानी साझा की थी।

उनके मुताबिक, साहिल ने कहा था कि “मुझे थोड़ा परेशान किया जा रहा है… वे मुझे जातिसूचक गालियां दे रहे हैं।”

सोनाली ने कहा कि परिवार ने उस समय बेटे को मानसिक रूप से मजबूत रहने की सलाह दी। उन्होंने उससे कहा कि उसका भविष्य बहुत अच्छा है और उसे फिलहाल यह सब सहन कर लेना चाहिए।

अब मां को लगता है कि उस समय परिवार को मामले को ज्यादा गंभीरता से लेना चाहिए था।

‘हमने कहा था- बेटा भविष्य उज्ज्वल है, सहन कर लो… यही हमारी गलती थी’

सोनाली वाकोड़े ने कहा कि परिवार ने साहिल को समझाने और उसका मनोबल बढ़ाने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि अगर उस समय उन्हें अंदाजा होता कि उनका बेटा किस स्थिति से गुजर रहा है, तो वे शायद उसे IIT से वापस ले आते।

उन्होंने भावुक होकर कहा कि अगर उस दिन वे साहिल को अपने साथ ले आते, तो शायद आज उनका बच्चा जिंदा होता।

मां ने इस फैसले को अपनी सबसे बड़ी पीड़ा और गलती के रूप में याद किया।

‘दलित छात्र ही आत्महत्या क्यों करते हैं?’

सोनाली वाकोड़े ने उच्च शिक्षण संस्थानों में दलित विद्यार्थियों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाया।

उन्होंने पूछा कि आखिर दलित विद्यार्थी ही बार-बार ऐसी घटनाओं में क्यों सामने आते हैं? उनके मुताबिक, इस सवाल पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

उनका कहना है कि किसी भी विद्यार्थी की जाति उसके साथ होने वाले व्यवहार का आधार नहीं बननी चाहिए और यदि किसी संस्थान में जातिगत उत्पीड़न की शिकायत सामने आती है तो उसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।

‘मुझे क्राइम ब्रांच पर पूरा भरोसा है’

साहिल की मां ने कहा कि उन्हें मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच पर पूरा भरोसा है। उन्होंने प्रशासन और संविधान में भी अपना विश्वास जताया।

उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके बेटे के मामले में जांच निष्पक्ष तरीके से होगी और उन्हें न्याय मिलेगा।

उनका कहना था कि वह अपने बेटे को वापस तो नहीं ला सकतीं, लेकिन यह जरूर चाहती हैं कि उसके साथ जो कुछ हुआ, उसकी सच्चाई सामने आए और जिम्मेदारी तय हो।

साहिल की मौत के बाद कई सवाल

साहिल की मौत के बाद मामले में अलग-अलग दावे सामने आए हैं। परिवार ने जातिगत उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। वहीं परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन और ChatGPT के कथित इस्तेमाल को लेकर IIT बॉम्बे की शुरुआती प्रतिक्रिया भी विवाद का विषय बनी थी।

बाद में IIT बॉम्बे ने जांच पूरी होने से पहले इस तरह की जानकारी सार्वजनिक करने के लिए माफी मांगी थी। संस्थान से जुड़े प्रोफेसरों ने भी अपना पक्ष रखा है।

ऐसे में मामले की जांच के सामने अब कई सवाल हैं—क्या साहिल को वास्तव में जातिगत टिप्पणियों या उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था? परीक्षा से जुड़ी घटना की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं? और इन घटनाओं का साहिल की मानसिक स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ा?

इन सवालों का अंतिम जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

‘मेरे बच्चे को न्याय दिलाइए’

सोनाली वाकोड़े की अपील का केंद्र एक ही बात रही—उनके बेटे को न्याय मिले।

एक मां के तौर पर उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना बच्चा खो दिया है और वह उस दर्द को जानती हैं जिससे वह गुजर रही हैं। उन्होंने प्रशासन और जांच एजेंसियों से आग्रह किया कि साहिल के साथ कथित अत्याचार की पूरी सच्चाई सामने लाई जाए।

साहिल की मां का यह बयान इस मामले को केवल परीक्षा में कथित अनियमितता या जातिगत विवाद के रूप में देखने के बजाय उस व्यापक सवाल की ओर ले जाता है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में किसी छात्र की शिकायत को समय रहते कैसे सुना जाए और उसे सुरक्षित माहौल कैसे दिया जाए।

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