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बुद्ध की ज्ञानभूमि बोधगया में आयोजित होगा 21वां अंतर्राष्ट्रीय त्रिपिटक चैंटिंग समारोह; भारत करेगा विश्व के सबसे बड़े बौद्ध समागम की मेजबानी

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बुद्ध धम्म की पवित्र मातृभूमि भारत आगामी 2 से 12 दिसंबर 2026 तक बोधगया के ऐतिहासिक महाबोधि महाविहार परिसर में ’21वें अंतर्राष्ट्रीय त्रिपिटक सुत्तपाठ समारोह’ (ITCC) की मेजबानी करने जा रहा है. वर्ष 2006 में इस वैश्विक परंपरा की स्थापना के बाद से यह दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत का सबसे बड़ा वार्षिक बौद्ध आयोजन बन चुका है. मुंबई में आयोजित एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंतर्राष्ट्रीय त्रिपिटक सुत्तपाठ काउंसिल (ITCC) के सेक्रेटरी जनरल भंते विनय रक्खिता तथा सदस्य अमन कांबले ने इस वैभवशाली और त्रिरत्न (बुद्ध-धम्म-संघ) को समर्पित कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा साझा की.

मुंबई:बुद्ध धम्म की पवित्र मातृभूमि भारत आगामी 2 से 12 दिसंबर 2026 तक बोधगया के ऐतिहासिक महाबोधि महाविहार परिसर में ’21वें अंतर्राष्ट्रीय त्रिपिटक सुत्तपाठ समारोह’ (ITCC) की मेजबानी करने जा रहा है. वर्ष 2006 में इस वैश्विक परंपरा की स्थापना के बाद से यह दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत का सबसे बड़ा वार्षिक बौद्ध आयोजन बन चुका है. मुंबई में आयोजित एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंतर्राष्ट्रीय त्रिपिटक सुत्तपाठ काउंसिल (ITCC) के सेक्रेटरी जनरल भंते विनय रक्खिता तथा सदस्य अमन कांबले ने इस वैभवशाली और त्रिरत्न (बुद्ध-धम्म-संघ) को समर्पित कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा साझा की.

इस 10 दिवसीय पावन समागम में पूरी दुनिया के भिक्षु-भिक्षुणी संघ तथा बौद्ध उपासक-उपासिकाएं पवित्र बोधिवृक्ष की छाया में एकत्र होंगे. थेरवादी बौद्ध परंपरा को मानने वाले 9 प्रमुख एशियाई देशों—म्यांमार, थाईलैंड, नेपाल, भारत, वियतनाम, श्रीलंका, लाओस, कंबोडिया व बांग्लादेश—के साथ-साथ इंडोनेशिया, मलेशिया, अमेरिका, जर्मनी, जापान, कोरिया और भूटान सहित 27 से अधिक देशों के लगभग 25,000 श्रद्धालु इसमें सम्मिलित होंगे. इस भव्य आयोजन की सबसे अनूठी विशेषता यह होगी कि सभी देशों के संघ अपनी-अपनी मातृभाषा में त्रिपिटक का पाठ अर्थात बुद्ध वचनों का उद्घोषण करेंगे, जो “भाषा अलग किंतु अर्थ एक” के जरिए ‘अनेकता में एकता’ और ‘विश्व शांति’ का संदेश देगा.

इस भव्य समारोह की शुरुआत 2 दिसंबर को सुबह 8 बजे एक अलौकिक अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिक्रमा से होगी, जिसमें दुनिया भर के बौद्ध देशों की सांस्कृतिक झांकियां बोधगया की सड़कों पर श्रद्धा के रंग बिखेरेंगी. परिक्रमा के ठीक बाद ऐतिहासिक महाबोधि महाविहार में ‘अभिधम्म पिटक’ के पाठ का शुभारंभ होगा, जो तथागत बुद्ध द्वारा निर्धारित उन नियमों और उच्च शिक्षाओं का संग्रह है जो जीवन को संयमित मार्ग पर ले जाते हैं. इस दौरान देश-विदेश के वरिष्ठ बौद्ध आचार्य और विद्वान प्रतिदिन धम्म शिक्षाओं तथा विपश्यना-ध्यान का मार्गदर्शन भी देंगे. प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गई जानकारी के अनुसार, ओडिशा में निर्मित 4 फीट ऊंची 220 हस्तनिर्मित स्वर्ण बुद्ध प्रतिमाओं को भारत के विभिन्न बुद्ध विहारों और संस्थाओं को अर्पित किया जाएगा, जबकि कर्नाटक की महाबोधि सोसाइटी द्वारा संपूर्ण महाविहार परिसर को फूलों से अलौкिक रूप से सजाया जाएगा.

इस विशाल समागम के लिए कालचक्र मैदान पर 30,000 वर्ग फुट का भव्य मंच और वातानुकूलित शामियाना स्थापित किया जा रहा है, जहां प्रतिदिन भिक्षु संघ के लिए दान और सभी प्रतिभागियों के लिए निःशुल्क भोजन की व्यवस्था रहेगी. मुख्य समारोह के समापन के बाद, 13 से 15 दिसंबर तक जेठियन घाटी से राजगीर के प्राचीन आम्रवन तक एक ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शांति व हेरिटेज यात्रा आयोजित की जाएगी, जो तथागत बुद्ध के पदचिह्नों पर चलने का प्रतीक होगी और इसमें 27 देशों के एक हजार से अधिक विशिष्ट लोग हिस्सा लेंगे.

यह गरिमामयी आयोजन ‘लाइट ऑफ बुद्धधम्मा फाउंडेशन इंटरनेशनल-इंडिया’ और ‘इंटरनेशनल त्रिपिटक चैंटिंग काउंसिल-इंडिया’ के संयुक्त तत्वावधान में, भारत की 17 बौद्ध संस्थाओं के सहयोग से आयोजित हो रहा है, जिसे भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और बिहार सरकार का पूर्ण समर्थन प्राप्त है. उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बिहार के मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी और विशिष्ट अतिथि के रूप में केंद्रीय संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत उपस्थित रहेंगे. इसके अलावा, 3 से 12 दिसंबर के बीच केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी, श्री किरण रिजिजू, जीतनराम मांझी और श्री रामदास आठवले सहित कई गणमान्य विभूतियां इस ऐतिहासिक आयोजन की साक्षी बनेंगी.

विश्वभर तथा देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले बौद्ध अनुयायियों के कारण भारत के ‘बौद्ध सर्किट पर्यटन’ को नई ताकत मिलेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था में लगभग 25 करोड़ रुपये के व्यापार की संभावना है. लाइट ऑफ बुद्धधर्म फाउंडेशन इंटरनेशनल (LBDFI) की संस्थापक और कार्यकारी निदेशक वांगमो डिक्सी ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि बुद्ध धम्म की मातृभूमि भारत में धम्म की इस पवित्र ध्वनि को वापस लाना एक परम सौभाग्य है. बोधिवृक्ष के नीचे किया गया हर पाठ संसार के सभी प्राणियों के कल्याण और शांति के लिए की गई एक सामूहिक प्रार्थना है. इस पत्रकार वार्ता के समय डॉ. विजय कदम और डॉ. निशा रंगारी प्रमुखता से उपस्थित थे.

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