Home » मायावती का अखिलेश यादव पर तीखा हमला, सपा पर लगाया ‘स्वार्थ की राजनीति’ का आरोप; बोलीं- जनता रहे सावधान

मायावती का अखिलेश यादव पर तीखा हमला, सपा पर लगाया ‘स्वार्थ की राजनीति’ का आरोप; बोलीं- जनता रहे सावधान

by Admin
0 comments 28 views

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। मायावती ने सपा प्रमुख द्वारा राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) और उसके नेता केंद्रीय मंत्री के संबंध में दिए गए कथित बयान को “अमर्यादित, अशोभनीय और शर्मनाक” बताया। उन्होंने अखिलेश यादव से रालोद, उसके नेता और दिवंगत चौधरी चरण सिंह के परिवार के साथ-साथ जाट समाज से भी माफी मांगने की अपील की।

मायावती ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में सपा की राजनीति, उसके पुराने गठबंधनों और आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए।

‘चवन्नी से रुपया बनाने’ वाले बयान पर मांगी माफी

मायावती ने कहा कि सपा प्रमुख द्वारा अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी रालोद और उसके नेता के बारे में “हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है” जैसा बयान देना राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा न केवल राजनीतिक रूप से अनुचित है, बल्कि इसे चौधरी चरण सिंह के परिवार और जाट समाज के अपमान के तौर पर भी देखा जा सकता है। मायावती ने अखिलेश यादव से इस बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।

सपा पर सहयोगियों के प्रति ‘अविश्वसनीय’ रवैये का आरोप

बसपा प्रमुख ने सपा पर आरोप लगाया कि उसका राजनीतिक रवैया केवल विरोधी दलों के प्रति ही नहीं, बल्कि अपने सहयोगी दलों के प्रति भी संकीर्ण और जातिवादी रहा है।

मायावती के मुताबिक, सपा की इस राजनीति का फायदा कई मौकों पर भाजपा को मिला है, जबकि इससे सेक्युलर ताकतें कमजोर हुई हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सपा गठबंधन के दौरान सहयोगी दलों से अपना राजनीतिक हित साधने के बाद उनसे दूरी बनाने की राजनीति करती रही है।

1993 के सपा-बसपा गठबंधन और गेस्ट हाउस कांड का किया जिक्र

मायावती ने अपने बयान में सपा-बसपा के पुराने राजनीतिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 1993 में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सपा और बसपा का गठबंधन हुआ था, लेकिन यह गठबंधन ज्यादा समय तक नहीं चल सका।

इसके बाद मायावती ने 2 जून 1995 के लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए इसे अपने खिलाफ गंभीर साजिश बताया।

मायावती ने कहा कि बाद में अखिलेश यादव की ओर से पुराने मतभेदों को दोबारा नहीं दोहराने के आश्वासन के बाद बसपा और सपा के बीच लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन हुआ। हालांकि, चुनाव परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आने के बाद यह गठबंधन भी टूट गया।

‘बसपा अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं कर सकती’

बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के आत्मसम्मान और स्वाभिमान की विचारधारा पर आधारित है। उन्होंने कहा कि बसपा “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” की नीति और अंबेडकरवादी सिद्धांतों से समझौता नहीं कर सकती।

मायावती ने सपा पर आरोप लगाया कि वह गठबंधन का इस्तेमाल मुख्य रूप से अपने राजनीतिक हित के लिए करती है और काम निकलने के बाद सहयोगियों से दूरी बना लेती है।

PDA को लेकर भी अखिलेश पर निशाना

मायावती ने अखिलेश यादव के PDA राजनीतिक फॉर्मूले को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव अपने राजनीतिक हित के अनुसार PDA में ‘P’ की अलग-अलग व्याख्या करते हैं।

मायावती ने दावा किया कि सपा पिछड़े वर्गों में अपनी जाति के अलावा अन्य पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और अपरकास्ट समाज, विशेष रूप से ब्राह्मण समाज के हितों की वास्तविक प्रतिनिधि नहीं रही है।

सपा सरकारों को लेकर लगाए गंभीर आरोप

बसपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश में सपा की पिछली सरकारों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकारों के दौरान दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और अपरकास्ट समाज, खासकर ब्राह्मणों के हितों की अनदेखी हुई।

मायावती ने यह भी आरोप लगाया कि सपा सरकारों में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब रही और अपराधी तत्वों को संरक्षण मिला। उन्होंने दावा किया कि उस दौर में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंताएं थीं।

ये सभी आरोप मायावती ने अपने बयान में लगाए हैं।

आगामी यूपी चुनाव को लेकर जनता से की अपील

अपने बयान के अंत में मायावती ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर मतदाताओं से सपा से सावधान रहने की अपील की।

उन्होंने कहा कि सर्वसमाज के लोगों को सपा की कथित “संकीर्ण और जातिवादी राजनीति” से सावधान रहना चाहिए और आगामी विधानसभा चुनाव में उसे सत्ता में आने से रोकना उनके हित में होगा।

मायावती के बयान का राजनीतिक संदेश

मायावती के इस ताजा बयान को उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में बसपा की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। उन्होंने एक साथ सपा के पुराने गठबंधन, अखिलेश यादव की राजनीति, PDA फॉर्मूले और सपा सरकारों के कार्यकाल को निशाने पर लेकर अपने पारंपरिक सामाजिक आधार के साथ-साथ व्यापक सर्वसमाज को भी संदेश देने की कोशिश की है।

You may also like

Leave a Comment