जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कवरेज के दौरान कथित यौन दुर्व्यवहार का मामला; महिला पत्रकार की शिकायत और दिल्ली पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने की कार्रवाई की मांग
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में पत्रकारों की सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हुए प्रदर्शन की कवरेज के दौरान स्वतंत्र पत्रकार रोज़ी ने दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रोज़ी का आरोप है कि वीडियो शूट करते समय एसीपी ने उनके स्तन को दबाया और उन्हें धक्का दिया। पत्रकार का यह भी कहना है कि घटना के बाद जब वह संबंधित अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने संसद मार्ग थाने पहुंचीं, तो उन्हें करीब पांच घंटे तक इंतजार करना पड़ा, लेकिन उनकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
रोज़ी के आरोपों ने पुलिस के व्यवहार, महिला पत्रकारों की सुरक्षा और पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायतों पर कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।
वीडियो शूट करते समय कथित दुर्व्यवहार
रोज़ी के अनुसार, वह जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रही थीं। इसी दौरान उनके साथ कथित तौर पर अनुचित व्यवहार किया गया। उन्होंने एसीपी विवेक भगत पर शारीरिक दुर्व्यवहार करने और धक्का देने का आरोप लगाया है।
पत्रकार का कहना है कि घटना के बाद उन्होंने पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की। लेकिन उनके मुताबिक, उन्हें लगभग पांच घंटे तक थाने में इंतजार करना पड़ा और इसके बावजूद तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
यह मामला इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि शिकायत एक ऐसे पुलिस अधिकारी के खिलाफ है जिस पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है। हालांकि, आरोपों की सच्चाई तय करने के लिए निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना जरूरी है।
तीन महिला पत्रकारों की शिकायतें क्राइम ब्रांच को भेजे जाने की जानकारी
मामले को लेकर दिल्ली पुलिस ने 4 अक्टूबर को बताया कि 3 अक्टूबर को नई दिल्ली क्षेत्र में प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों की ओर से कथित यौन दुर्व्यवहार की शिकायतें प्राप्त हुई थीं। पुलिस के अनुसार, इन शिकायतों को आगे की जांच और कार्रवाई के लिए कमला मार्केट स्थित क्राइम ब्रांच को भेजा गया है।
अब जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायतों में लगाए गए आरोपों के संबंध में क्या साक्ष्य उपलब्ध हैं, घटनास्थल के वीडियो फुटेज में क्या सामने आता है और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के दौरान क्या हुआ था।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने जताई कड़ी नाराजगी
पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार पर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने भी कड़ा विरोध दर्ज कराया है। 4 अक्टूबर को जारी अपने बयान में संगठन ने शुक्रवार और शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कवरेज कर रहे पत्रकारों के साथ दिल्ली पुलिस के व्यवहार की निंदा की।
प्रेस क्लब ने महिला पत्रकार की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करने और पत्रकारों को बिना भय, दबाव या धमकी के अपना काम करने देने की मांग की। संगठन ने कहा कि लोकतंत्र में इस तरह के व्यवहार को सामान्य नहीं माना जा सकता।
प्रेस क्लब ने जंतर-मंतर और उसके आसपास इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने के फैसले की भी आलोचना की। संगठन के मुताबिक, इंटरनेट बंदी से सूचना के प्रवाह और पत्रकारों के कामकाज में बाधा आती है।
सवाल सिर्फ एक पत्रकार का नहीं, मीडिया की स्वतंत्रता का भी है
जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम ने कई महत्वपूर्ण सवाल सामने रखे हैं। क्या प्रदर्शन की कवरेज कर रहे पत्रकारों को सुरक्षित माहौल मिल रहा है? किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत आने पर निष्पक्ष जांच कैसे सुनिश्चित की जाती है? और यदि शिकायतकर्ता को थाने में घंटों इंतजार करना पड़े, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?
पत्रकारों का काम सार्वजनिक घटनाओं को दर्ज करना और जनता तक जानकारी पहुंचाना है। इस दौरान उनके साथ कथित दुर्व्यवहार की शिकायतों को गंभीरता से लेना जरूरी है। साथ ही, जांच को निष्पक्ष रखते हुए शिकायतकर्ता और आरोपी—दोनों पक्षों के तथ्यों की पड़ताल भी आवश्यक है।
अब सबसे अहम मांग है कि रोज़ी की शिकायत पर पारदर्शी और निष्पक्ष जांच हो, एफआईआर दर्ज करने में कथित देरी की पड़ताल की जाए और जांच के निष्कर्षों के आधार पर कानून के मुताबिक कार्रवाई हो। लोकतंत्र में पुलिस की जवाबदेही और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था का दायित्व है।