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बालाघाट में रहस्यमयी बीमारी का कहर: 6 बच्चों की मौत, 47 अस्पताल में भर्ती; दूषित पानी और कुपोषण की आशंका

by Admin
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बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा आदिवासी बहुल गांवों में बच्चों के बीच फैली बीमारी ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। अडोरी, कुंडेकसा, बोंदारी और कोरका गांवों में अब तक 6 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 47 बच्चे अभी अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। इलाज के बाद 51 बच्चों को स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है।

बीमारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ा दी हैं। जबलपुर मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों की पांच सदस्यीय टीम गांवों में पहुंचकर बीमारी के कारणों की जांच कर रही है। फिलहाल विशेषज्ञों ने प्रारंभिक तौर पर पोषण की कमी और दूषित पानी को संभावित कारण माना है। हालांकि बीमारी की वास्तविक वजह की पुष्टि अभी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।

चार गांवों में बच्चों के बीमार पड़ने से हड़कंप

बालाघाट के बैगा आदिवासी बहुल इलाकों में पिछले कुछ समय से बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार पड़ने की जानकारी सामने आई। प्रभावित बच्चों की उम्र करीब 1 से 13 वर्ष के बीच बताई जा रही है।

बीमारी के मामलों और बच्चों की मौत की सूचना के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी सक्रियता बढ़ गई है। भोपाल तक मामले की जानकारी पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और उपचार व्यवस्था तेज कर दी है।

शरीर पर दाने से लेकर झटके तक, ये लक्षण आए सामने

बीमार बच्चों में कई तरह के लक्षण देखे गए हैं। शुरुआत में बच्चों के शरीर पर दाने, बुखार और मुंह में छाले दिखाई देने की जानकारी सामने आई। इसके अलावा बच्चों में भूख कम लगना और झटके आने जैसे लक्षण भी देखे गए हैं।

एक साथ बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार पड़ने से ग्रामीणों में चिंता का माहौल है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बीमारी के पैटर्न और बच्चों की चिकित्सकीय स्थिति का अध्ययन कर रहे हैं।

पोषण की कमी और पानी की गुणवत्ता पर जांच

जबलपुर मेडिकल कॉलेज के महामारी विशेषज्ञ डॉ. रविंद्र विश्नोई के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम प्रभावित गांवों में जांच कर रही है। प्रारंभिक आकलन में बच्चों में पोषण की कमी और दूषित पानी को संभावित वजहों में शामिल किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त पोषण नहीं मिलने की स्थिति में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसी के साथ गांवों में पेयजल की गुणवत्ता की भी जांच की जा रही है।

हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि बच्चों की मौत केवल दूषित पानी के कारण हुई है। बीमारी की सटीक वजह जानने के लिए चिकित्सकीय जांच और प्रयोगशाला रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

सैंपल पुणे की लैब भेजे गए

बीमारी की वास्तविक प्रकृति और संभावित संक्रमण की पुष्टि के लिए प्रभावित बच्चों के सैंपल जांच के लिए पुणे स्थित प्रयोगशाला भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद बीमारी के कारण और आगे की उपचार रणनीति को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।

47 बच्चे अभी अस्पताल में भर्ती

स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाए हैं और जरूरत के अनुसार अस्थायी चिकित्सा व्यवस्था भी शुरू की गई है। गांवों में बच्चों और अन्य ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है।

वर्तमान में 47 बच्चे बैहर और बालाघाट जिला अस्पतालों में भर्ती बताए गए हैं। वहीं उपचार के बाद स्वस्थ हुए 51 बच्चों को अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है।

6 बच्चों की मौत की पुष्टि

बालाघाट के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. परेश उपलप ने छह बच्चों की मौत की पुष्टि की है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मामले की विस्तृत रिपोर्ट भोपाल भेजी गई है।

प्रशासन की निगरानी में प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें तैनात हैं। विशेषज्ञों की टीम बच्चों की बीमारी के कारणों के साथ-साथ पोषण, पेयजल और संक्रमण की संभावनाओं की भी जांच कर रही है।

रिपोर्ट आने के बाद सामने आएगी बीमारी की असली वजह

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन गांवों में इतने बच्चे एक साथ किस बीमारी की चपेट में आए और छह बच्चों की मौत कैसे हुई। दूषित पानी और पोषण की कमी को संभावित कारण माना जा रहा है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच और लैब रिपोर्ट आने के बाद ही निकाला जा सकेगा।

प्रशासन के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती अस्पताल में भर्ती बच्चों का समुचित इलाज सुनिश्चित करने के साथ-साथ बीमारी को और फैलने से रोकना है। प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य निगरानी और पेयजल की जांच को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

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