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60 हजार प्राथमिक शिक्षक भर्ती की मांग तेज, 17 लाख D.El.Ed/BTC अभ्यर्थियों का इंतजार खत्म करने की मांग

by Admin
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षक भर्ती को लेकर बेरोजगार प्रशिक्षित युवाओं की नाराजगी एक बार फिर सामने आने लगी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक बयान में सरकार से 60 हजार प्राथमिक शिक्षक पदों पर तत्काल भर्ती का विज्ञापन जारी करने की मांग की गई है। बयान में दावा किया गया है कि करीब 17 लाख D.El.Ed/BTC प्रशिक्षित युवा लंबे समय से प्राथमिक शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे हैं।

बयान में युवाओं की ओर से कहा गया है कि सरकार यदि उनकी आवाज नहीं सुनती तो आंदोलन और सड़क पर उतरना ही उनके सामने बचा रास्ता रह जाएगा। इसमें मुख्यमंत्री से अपील की गई है कि अब केवल आश्वासन देने के बजाय 60 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।

‘युवा नौकरी मांग रहे हैं, एहसान नहीं’

वायरल बयान में युवाओं की स्थिति को लेकर सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि नौकरी की मांग कोई एहसान नहीं, बल्कि प्रशिक्षित युवाओं के रोजगार का अधिकार है।

बयान में कहा गया है कि लंबे समय से भर्ती का इंतजार कर रहे D.El.Ed और BTC अभ्यर्थियों के लिए अब सिर्फ आश्वासन पर्याप्त नहीं है। युवाओं की मांग है कि रिक्त पदों का आकलन कर जल्द से जल्द आधिकारिक विज्ञापन जारी किया जाए और भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।

उत्तर प्रदेश के आधिकारिक D.El.Ed पोर्टल पर फिलहाल 2026 के D.El.Ed प्रवेश और काउंसलिंग से संबंधित गतिविधियां चल रही हैं। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक पोर्टल पर 60 हजार प्राथमिक शिक्षक पदों की भर्ती का विज्ञापन अभी दिखाई नहीं देता।

60 हजार पदों का आंकड़ा कहां से आया?

60 हजार शिक्षक पदों की संख्या को लेकर पिछले महीनों में भर्ती की संभावनाओं से जुड़ी खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर की एक रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश में 60 हजार से अधिक शिक्षक पदों पर भर्ती की तैयारी की बात कही गई थी। इसमें बेसिक शिक्षा परिषद सहित विभिन्न शिक्षक पदों को शामिल किए जाने की संभावना बताई गई थी।

जून में भी 60 हजार शिक्षक पदों पर भर्ती के संभावित नोटिफिकेशन को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी।

लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि संभावित भर्ती और आधिकारिक भर्ती विज्ञापन दो अलग चीजें हैं। इसलिए जब तक संबंधित भर्ती आयोग या सरकार की ओर से पदों, पात्रता, आवेदन की तारीख और परीक्षा प्रक्रिया की आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक 60 हजार पदों को अंतिम भर्ती संख्या मानना उचित नहीं होगा।

रिक्त पदों का मुद्दा भी अहम

प्राथमिक शिक्षा में रिक्त पदों को लेकर सामने आए आंकड़े इस बहस को और महत्वपूर्ण बनाते हैं। अगस्त 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े विधानसभा प्रश्न के जवाब में 60,958 शिक्षक पद रिक्त बताए गए थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि नगर क्षेत्र के 11,508 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव भेजा गया है।

यही आंकड़ा अब शिक्षक भर्ती की मांग कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ा आधार बन रहा है। उनका तर्क है कि यदि हजारों पद रिक्त हैं और बड़ी संख्या में प्रशिक्षित अभ्यर्थी रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं, तो सरकार को भर्ती प्रक्रिया शुरू करने में देरी नहीं करनी चाहिए।

हालांकि, रिक्त पदों की कुल संख्या और नई प्राथमिक शिक्षक भर्ती में विज्ञापित किए जाने वाले पदों की संख्या समान होना जरूरी नहीं है। पदों का कैडर, आरक्षण, पदोन्नति, स्थानांतरण और विभागीय जरूरतों के आधार पर अंतिम भर्ती संख्या अलग हो सकती है।

‘भर्ती नहीं तो वोट नहीं’ का नारा

इस आंदोलन से जुड़े बयान में रोजगार के मुद्दे को सीधे चुनावी राजनीति से भी जोड़ दिया गया है। इसमें कहा गया है—

“भर्ती नहीं तो वोट नहीं।”

बयान में 17 लाख अभ्यर्थियों के आंकड़े को उनके परिवारों और संभावित मतदाताओं से जोड़ते हुए “17 लाख × 5 = 85 लाख वोट” का राजनीतिक हिसाब पेश किया गया है।

यह आंकड़ा आंदोलनकारियों का राजनीतिक दावा है। इसे सीधे संभावित वोटों की प्रमाणित संख्या नहीं माना जा सकता, क्योंकि प्रत्येक अभ्यर्थी के परिवार में मतदाताओं की संख्या अलग-अलग होती है और सभी मतदाता एक ही राजनीतिक दिशा में मतदान करें, यह भी जरूरी नहीं है।

फिर भी यह नारा इस बात का संकेत जरूर देता है कि शिक्षक भर्ती का मुद्दा अब केवल रोजगार की मांग तक सीमित नहीं रखना चाहा जा रहा, बल्कि इसे चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश भी हो रही है।

युवाओं के सामने क्या है सबसे बड़ा सवाल?

D.El.Ed/BTC जैसे शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम करने वाले युवाओं के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशिक्षण और पात्रता हासिल करने के बाद सरकारी स्कूलों में नियमित रोजगार के अवसर कब खुलेंगे।

उत्तर प्रदेश में D.El.Ed से संबंधित सरकारी प्रक्रिया अभी भी जारी है। आधिकारिक पोर्टल पर 2026 के D.El.Ed पंजीकरण और काउंसलिंग की गतिविधियां दर्ज हैं।

इसके साथ ही प्राथमिक शिक्षक भर्ती की पात्रता और TET से जुड़े नियम भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए संभावित भर्ती में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए सिर्फ पदों की संख्या ही नहीं, बल्कि TET, D.El.Ed/BTC, मेरिट/परीक्षा प्रणाली और अन्य पात्रता शर्तें भी महत्वपूर्ण होंगी।

सरकार के लिए भी बढ़ती चुनौती

शिक्षक भर्ती का मुद्दा उत्तर प्रदेश सरकार के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका सीधा संबंध दो वर्गों से है—एक तरफ बड़ी संख्या में रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे प्रशिक्षित युवा और दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जरूरत।

यदि सरकार 60 हजार या उससे अधिक पदों पर भर्ती का आधिकारिक विज्ञापन जारी करती है, तो इससे लंबे समय से इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिल सकती है। लेकिन यदि प्रक्रिया फिर लंबी खिंचती है, तो यह मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक विरोध और युवा आंदोलनों का रूप ले सकता है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि 60 हजार पदों की मांग जोर पकड़ रही है, रिक्त शिक्षक पदों का मुद्दा भी सामने है, लेकिन अंतिम भर्ती संख्या और विज्ञापन का इंतजार अभी बाकी है।

अब नजर इस बात पर है कि सरकार और संबंधित भर्ती आयोग इस मांग पर क्या कदम उठाते हैं—क्या हजारों प्रशिक्षित युवाओं के इंतजार का अंत होगा या फिर “भर्ती नहीं तो वोट नहीं” का नारा उत्तर प्रदेश की राजनीति में और तेज सुनाई देगा?

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