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पत्रकारों के सवालों के बीच प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़ गए योगी? वायरल वीडियो पर विपक्ष का हमला, पूछा- यही है ‘राम राज्य’?

by Admin
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सोशल मीडिया पोस्ट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता और उनके मीडिया संवाद के तरीके को लेकर तीखा सवाल उठाया गया है।पोस्ट में कहा गया कि PR के दम पर किसी नेता को देश के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्रियों में बताया जा सकता है, लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवालों का जवाब देना अलग बात है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। X पर GenZ of India नाम के अकाउंट से साझा किए गए वीडियो में दावा किया गया है कि पत्रकारों के सवालों के बीच मुख्यमंत्री प्रेस कॉन्फ्रेंस से चले गए। वीडियो को लेकर अब BJP सरकार की मीडिया के सवालों के प्रति जवाबदेही पर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।

वीडियो के साथ पोस्ट में आरोप लगाया गया कि BJP का एक भी नेता प्रेस का सामना करने और पत्रकारों के सवालों का जवाब देने की हिम्मत नहीं रखता। पोस्ट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधते हुए कहा गया कि पत्रकारों को जवाब दिए बिना ही उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़ दी।

हालांकि, वीडियो के साथ किए गए राजनीतिक दावों और वीडियो में दिखाई देने वाली घटना के बीच अंतर करना जरूरी है। वीडियो में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम से निकलना दिखाई देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इसके पीछे की पूरी परिस्थिति और कार्यक्रम का आधिकारिक संदर्भ स्वतंत्र रूप से स्पष्ट नहीं है।

‘PR के दम पर लोकप्रिय मुख्यमंत्री, लेकिन सवालों के जवाब नहीं?’

सोशल मीडिया पोस्ट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता और उनके मीडिया संवाद के तरीके को लेकर तीखा सवाल उठाया गया है।

पोस्ट में कहा गया कि PR के दम पर किसी नेता को देश के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्रियों में बताया जा सकता है, लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवालों का जवाब देना अलग बात है।

इसी टिप्पणी के जरिए सरकार के प्रचार-तंत्र और वास्तविक मीडिया जवाबदेही के बीच कथित अंतर को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की गई है।

‘राम राज्य’ के नैरेटिव पर भी निशाना

इस पूरे विवाद का सबसे तीखा राजनीतिक पहलू मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘राम राज्य’ के नैरेटिव से जुड़ा है।

वायरल पोस्ट में सवाल किया गया कि अगर पत्रकारों के सवालों का सामना करने के बजाय प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़ दी जाए तो इसे ‘राम राज्य’ की पारदर्शिता और जवाबदेही के आदर्श से कैसे जोड़ा जाएगा?

यानी सोशल मीडिया पर उठाया गया सवाल सिर्फ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सरकार की जवाबदेही, पारदर्शिता और मीडिया से संवाद के बड़े राजनीतिक मुद्दे से जोड़ दिया गया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस या सिर्फ सरकारी संवाद?

राजनीतिक नेताओं और पत्रकारों के बीच प्रेस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य केवल सरकार की उपलब्धियां बताना नहीं, बल्कि पत्रकारों के सवालों का जवाब देना भी माना जाता है।

खासकर मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे नेता से यह अपेक्षा रहती है कि वह सरकार से जुड़े कठिन और असहज सवालों का भी सामना करें। यही वजह है कि यदि किसी कार्यक्रम में पत्रकारों को सवाल पूछने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता या नेता सवाल-जवाब से पहले ही चले जाते हैं, तो आलोचक इसे मीडिया से दूरी और जवाबदेही की कमी के रूप में पेश करते हैं।

दूसरी ओर, किसी कार्यक्रम से नेता के निकलने के कई प्रशासनिक या समय संबंधी कारण भी हो सकते हैं। इसलिए केवल वीडियो के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि मुख्यमंत्री जानबूझकर सवालों से बचने के लिए वहां से गए।

BJP सरकार की मीडिया रणनीति पर फिर सवाल

योगी आदित्यनाथ की सरकार अपनी उपलब्धियों को बड़े पैमाने पर प्रचारित करती रही है। ऐसे में आलोचकों का सवाल है कि सरकारी उपलब्धियों का प्रचार जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी पत्रकारों के स्वतंत्र और असहज सवालों का जवाब देना भी है।

यही विवाद अब सोशल मीडिया पर सरकार की संचार रणनीति बनाम मीडिया की स्वतंत्र भूमिका की बहस में बदलता नजर आ रहा है।

एक तरफ BJP समर्थक सरकार की उपलब्धियों और योगी आदित्यनाथ के प्रशासनिक मॉडल को सामने रखते हैं, तो दूसरी तरफ आलोचक सवाल करते हैं कि क्या सरकार और मुख्यमंत्री पत्रकारों के कठिन सवालों के लिए भी उतने ही सहज हैं।

वीडियो ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

X पर शेयर किए गए इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। पोस्ट करने वाले ने इसे BJP और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किया है और इसे ‘राम राज्य’ के दावों से जोड़ते हुए सवाल उठाया है।

अब इस पूरे मामले में सबसे अहम यह होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय या BJP की ओर से इस घटना के संदर्भ में कोई स्पष्टीकरण सामने आता है या नहीं।

अगर आधिकारिक पक्ष सामने आता है और यह स्पष्ट करता है कि कार्यक्रम में वास्तव में क्या हुआ था और मुख्यमंत्री पत्रकारों के सवालों के बीच क्यों वहां से गए, तो विवाद की तस्वीर और साफ हो सकती है।

फिलहाल इतना जरूर है कि एक वीडियो ने योगी सरकार की मीडिया से संवाद शैली और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।

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