12 हजार से अधिक छात्रों की याचिका के बाद फिर तेज हुई मांग; फिलहाल दो प्रयासों का नियम लागू, तीसरे मौके पर अंतिम फैसला नहीं
नई दिल्ली: देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) में दाखिले का सपना देख रहे विद्यार्थियों के लिए JEE एडवांस्ड परीक्षा से जुड़ी अहम खबर सामने आई है। IIT कानपुर के निदेशक मनिंद्र अग्रवाल ने संकेत दिया है कि आने वाले कुछ वर्षों में JEE एडवांस्ड की परीक्षा व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है। परीक्षा में दो के बजाय तीन प्रयास देने की संभावना पर भी विचार हो रहा है। हालांकि, फिलहाल इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
JEE एडवांस्ड में तीसरा प्रयास देने की मांग लंबे समय से उठ रही है। हाल ही में 12 हजार से अधिक विद्यार्थियों की ऑनलाइन याचिका के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। विद्यार्थियों का मानना है कि एक अतिरिक्त मौका मिलने से उन्हें अपनी क्षमता साबित करने और IIT में प्रवेश पाने के लिए बेहतर अवसर मिल सकता है।
IIT कानपुर के निदेशक मनिंद्र अग्रवाल ने परीक्षा के भविष्य को लेकर कहा कि JEE एडवांस्ड में बदलाव की जरूरत है। उनके मुताबिक, यह परीक्षा अब काफी हद तक कोचिंग पर निर्भर हो गई है। ऐसे में परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने और कोचिंग पर निर्भरता कम करने के उपायों पर चर्चा की जा रही है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल बदलाव की कोई योजना नहीं है, लेकिन अगले कुछ वर्षों में इस दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। तीसरे प्रयास की संभावना भी विचाराधीन है।
दरअसल, वर्तमान व्यवस्था के तहत उम्मीदवार JEE एडवांस्ड की परीक्षा लगातार दो वर्षों में अधिकतम दो बार दे सकते हैं। आमतौर पर इसमें 12वीं की परीक्षा वाले वर्ष और उसके अगले वर्ष में शामिल होने का अवसर मिलता है। तीसरे प्रयास की मांग करने वाले विद्यार्थियों का तर्क है कि बीमारी, पढ़ाई में बाधा या अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण कई छात्र अपने शुरुआती प्रयासों में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते। ऐसे में उन्हें एक और मौका मिलना चाहिए।
कोविड-19 महामारी के दौरान भी विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने के कारण अतिरिक्त प्रयास की मांग उठी थी। असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए कुछ पात्र विद्यार्थियों को विशेष राहत दी गई थी। हालांकि, बाद में दो प्रयासों की व्यवस्था बहाल कर दी गई। नवंबर 2024 में भी प्रयासों की संख्या बढ़ाकर तीन करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन उसी महीने इसे वापस ले लिया गया था। इसके बाद से यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है।
तीसरे प्रयास के संभावित लाभों के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। एक अतिरिक्त मौका मिलने से विद्यार्थियों को अपनी तैयारी सुधारने और बेहतर परिणाम हासिल करने का समय मिल सकता है। दूसरी ओर, इससे कुछ छात्र परीक्षा की तैयारी में एक और साल लगा सकते हैं, जिसके कारण कोचिंग और अन्य शैक्षणिक खर्च बढ़ने की आशंका है। इसलिए परीक्षा में प्रयासों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लेते समय विद्यार्थियों के हितों के साथ-साथ परीक्षा प्रणाली की गुणवत्ता और निष्पक्षता पर भी विचार करना होगा।
फिलहाल JEE एडवांस्ड में तीसरे प्रयास को लेकर कोई आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली है। वर्ष 2027 की परीक्षा के लिए भी नियमों में बदलाव की घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में विद्यार्थियों को मौजूदा पात्रता नियमों के अनुसार तैयारी जारी रखनी चाहिए। अब देखना होगा कि आने वाले वर्षों में IIT प्रशासन इस मांग पर क्या निर्णय लेता है और क्या विद्यार्थियों को तीसरा प्रयास देने का अवसर मिल पाता है।