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एक लाख सरकारी नौकरियों के ऐलान पर मायावती की नसीहत, आरक्षित पदों और 69 हजार शिक्षक भर्ती का मुद्दा उठाया

by Admin
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मायावती ने कहा कि एक लाख युवाओं को नौकरी देने का फैसला सही है, लेकिन इसकी घोषणा ऐसे समय हुई है जब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। इसलिए उन्होंने इसके पीछे चुनावी मंशा की आशंका जताई। उनका कहना है कि अगर नियुक्तियां वास्तव में समयबद्ध तरीके से और पारदर्शी ढंग से पूरी होती हैं तो युवाओं के हित में यह महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से अगले छह महीने में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र देने के ऐलान के बाद बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने सरकार के सामने कई अहम सवाल और मांगें रखी हैं। उन्होंने रोजगार के फैसले का स्वागत तो किया, लेकिन इसके समय को विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए इसे देर से उठाया गया और चुनावी कदम बताया। साथ ही उन्होंने भर्ती प्रक्रिया को पेपर लीक और भ्रष्टाचार से मुक्त रखने तथा आरक्षित वर्गों के लंबित पदों को भरने की मांग की।

‘एक लाख नौकरियां सही कदम, लेकिन समय पर पूरी हों भर्तियां’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 अगस्त को घोषणा की थी कि अगले छह महीने में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। उन्होंने बताया था कि 2017 से अब तक राज्य में 9.30 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं।

मायावती ने कहा कि एक लाख युवाओं को नौकरी देने का फैसला सही है, लेकिन इसकी घोषणा ऐसे समय हुई है जब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। इसलिए उन्होंने इसके पीछे चुनावी मंशा की आशंका जताई। उनका कहना है कि अगर नियुक्तियां वास्तव में समयबद्ध तरीके से और पारदर्शी ढंग से पूरी होती हैं तो युवाओं के हित में यह महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

उन्होंने खास तौर पर भर्ती प्रक्रिया को पेपर लीक, भ्रष्टाचार और दूसरी अनियमितताओं से मुक्त रखने पर जोर दिया, ताकि यह घोषणा केवल चुनावी वादे तक सीमित न रह जाए।

SC, ST और OBC के बैकलॉग पर भी उठी आवाज

मायावती ने एक लाख नौकरियों के ऐलान के साथ ही अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षित पदों के बैकलॉग का मुद्दा भी उठाया।

उन्होंने कहा कि आरक्षित वर्गों के जो पद लंबे समय से खाली हैं, उन्हें भरने के संबंध में सरकार की ओर से स्पष्ट घोषणा का लोग इंतजार कर रहे हैं। उनके मुताबिक नई भर्तियों के साथ-साथ आरक्षण के तहत लंबित पदों को भरना भी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

69 हजार शिक्षक भर्ती के 6,800 अभ्यर्थियों का मामला

BSP प्रमुख ने उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आरक्षण से जुड़े विवाद के कारण करीब 6,800 अभ्यर्थी नियुक्ति की मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं।

इन अभ्यर्थियों की ओर से 29 अगस्त 2026 से लखनऊ में फिर आंदोलन शुरू करने की घोषणा की गई है। रिपोर्टों के अनुसार अभ्यर्थी 5 जनवरी 2022 को जारी सूची में शामिल पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति और मुख्यमंत्री से मुलाकात की मांग कर रहे हैं। मामला न्यायिक प्रक्रिया में भी लंबित है।

मायावती ने सरकार से इस मामले में सहानुभूतिपूर्वक विचार कर वास्तविक राहत देने की अपील की है। उनका कहना है कि इस मामले का समाधान सरकार के स्तर से ही प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

सरकारी स्कूलों की स्थिति पर भी सवाल

मायावती ने रोजगार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि BSP लंबे समय से सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने की मांग करती रही है।

उन्होंने दावा किया कि राज्य में करीब 30 हजार सरकारी स्कूल बंद किए जा चुके हैं और इन्हें दोबारा बेहतर तरीके से सक्रिय किया जाना चाहिए। हालांकि, सरकारी स्कूलों की संख्या को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और स्रोतों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। हाल में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी 2017 के बाद 26 हजार से अधिक सरकारी प्राथमिक विद्यालय बंद होने का दावा किया था।

मायावती का कहना है कि अगर सरकार स्कूली शिक्षा में सुधार को लेकर गंभीर है तो बंद या निष्क्रिय हुए सरकारी स्कूलों को आवश्यक संसाधनों और शिक्षकों के साथ फिर से प्रभावी बनाया जाना चाहिए।

Gen-Z और Gen-Alpha के दबाव का भी जिक्र

मायावती ने अपने बयान में बदलती युवा पीढ़ी की बढ़ती जागरूकता और दबाव की ओर भी संकेत किया। उनका कहना है कि आज की युवा पीढ़ी शिक्षा, रोजगार और सरकारी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर लगातार सवाल उठा रही है।

ऐसे में सरकार की ओर से शिक्षा क्षेत्र में दिखाई देने वाली हलचल अगर वास्तविक सुधार की नीयत से हो तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए। लेकिन इसके लिए केवल घोषणाओं के बजाय स्कूलों की वास्तविक स्थिति में सुधार जरूरी होगा।

महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी सरकार को घेरा

मायावती ने महिलाओं से जुड़े मुद्दे को भी अपने बयान में प्रमुखता से शामिल किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को बसों में मुफ्त यात्रा जैसी सुविधाओं से आगे बढ़कर सुरक्षा, सम्मान, आत्मनिर्भरता और शोषण से संरक्षण देने के लिए ठोस नीतियां जरूरी हैं।

उनका जोर इस बात पर रहा कि महिलाओं को हर क्षेत्र में उत्पीड़न, अत्याचार और शोषण से बचाने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकारों को गंभीरता से काम करना चाहिए।

रोजगार से लेकर शिक्षा तक सरकार के सामने कई चुनौतियां

मायावती के बयान को देखा जाए तो उन्होंने योगी सरकार की एक लाख नौकरियों की घोषणा को सीधे खारिज करने के बजाय उसके क्रियान्वयन और पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उनके प्रमुख मुद्दों में समयबद्ध भर्ती, पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर रोक, SC-ST-OBC आरक्षित पदों का बैकलॉग, 69 हजार शिक्षक भर्ती विवाद, सरकारी स्कूलों की स्थिति और महिलाओं की सुरक्षा शामिल हैं।

अब सरकार की अगली चुनौती यह होगी कि छह महीने में एक लाख नियुक्तियों के लक्ष्य को किस तरह पूरा किया जाता है और भर्ती प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रहती है। युवाओं के लिए यह घोषणा तभी वास्तविक उपलब्धि मानी जाएगी जब नियुक्ति पत्र केवल घोषणा का हिस्सा न रहकर समय पर वास्तविक नियुक्तियों में तब्दील हों।

फिलहाल उत्तर प्रदेश में रोजगार, आरक्षण, शिक्षक भर्ती और शिक्षा व्यवस्था आने वाले महीनों में बड़े राजनीतिक मुद्दे बनते दिखाई दे रहे हैं।

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