अब वन्यजीवों को खाना आसानी से नहीं, बल्कि मेहनत करके प्राप्त करना होगा। लेपर्ड के पिंजरे में मुर्गी को 8 फीट ऊंचाई पर लटका दिया गया है। तेंदुए को कूदकर इसे पकड़ना पड़ रहा है। वहीं भालू के पिंजरे में लकड़ी का तना रखा गया है, जिसमें शहद छुपाया गया है।
गर्मी की बढ़ती तपिश में महाराज बाग चिड़ियाघर के वन्यजीव सुस्त न पड़ जाएं, इसके लिए प्रशासन ने विशेष इंचरिचमेंट एक्टिविटी शुरू कर दी है। पिंजरों को जंगल जैसे माहौल में बदलने की यह मुहिम इस सप्ताह से लागू की गई।
अब वन्यजीवों को खाना आसानी से नहीं, बल्कि मेहनत करके प्राप्त करना होगा। लेपर्ड के पिंजरे में मुर्गी को 8 फीट ऊंचाई पर लटका दिया गया है। तेंदुए को कूदकर इसे पकड़ना पड़ रहा है। वहीं भालू के पिंजरे में लकड़ी का तना रखा गया है, जिसमें शहद छुपाया गया है। भालू को इस तने को चबाकर या तोड़कर शहद निकालना पड़ रहा है। ये गतिविधियां रोजाना आयोजित की जाएगी।
महाराजबाग चिड़ियाघर प्रभारी सुनील बाविस्कर के मार्गदर्शन में यह अभियान चलाया जा रहा है। गर्मी के मौसम में जंगल के जानवर सुस्त हो जाते हैं क्योंकि चिड़ियाघर में उन्हें खाना आसानी से मिल जाता है। जंगल में उन्हें शिकार के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है, जो उनकी फुर्ती और स्वास्थ्य बनाए रखती है।
लेकिन यहां सुविधाओं के कारण उनकी शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है, जिससे सेहत पर बुरा असर पड़ता है। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए प्रशासन ने यह कदम उठाया है। इसके अलावा गर्मी से निपटने के लिए सभी पिंजरों में कुलर लगाए गए हैं। बाघ, तेंदुआ, भालू और पक्षियों के पिंजरों में ठंडी हवा का इंतजाम किया गया है। आहार में भी बदलाव किया गया है। मांसाहारी जानवरों को कम मात्रा में डाइट दी जा रही है, जबकि बंदर, लंगूर आदि को तरबूज, खीरा, आम, पपीता जैसे रसीले फल दिए जा रहे हैं।
पक्षियों को भी इसी अनुरूप आहार मिल रहा है। महाराजबाग नागपुरवासियों और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। यहां बाघ, तेंदुआ, भालू, मोर, इमू समेत अनेक वन्यजीव देखने को मिलते हैं। गर्मी में जानवर अक्सर अंदर छिपे रहते थे, जिससे दर्शक निराश हो जाते थे। अब ये इंचरिचमेंट गतिविधियां न केवल जानवरों को सक्रिय रख रही हैं, बल्कि पर्यटकों को जंगल का सजीव अनुभव भी करा रही हैं। शुक्रवार को जब तेंदुए ने कूदकर मुर्गी पकड़ी, तो वहां मौजूद लोग रोमांचित हो उठे। यह प्रयास वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार को बनाए रखने और उनकी सेहत सुधारने की दिशा में एक सराहनीय कदम है।