राज्यसभा चुनाव के लिए टीएमसी ने अपने 4 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया. इसमें राजीव कुमार का नाम सबसे चौंकाने वाला है. वे इसी साल 31 जनवरी को DGP के पद से रिटायर हुए थे. कुमार को ममता बनर्जी का बेहद वफादार आईपीएस अधिकारी माना जाता है. टीएमसी के इस कदम को एक संदेश के तौर पर देख रहा है, जो अफसर संकट के समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ खड़े रहे, पार्टी उन्हें नहीं भूलती.
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने राज्यसभा चुनावों के लिए चार उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. इनमें पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है. 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल से पांच सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से चार पर टीएमसी की जीत लगभग तय मानी जा रही है. राजीव कुमार के अलावा राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो, सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी और अभिनेत्री कोएल मलिक को टिकट दिया गया है.
टीएमसी सूत्रों के अनुसार, राजीव कुमार का नाम सबसे चौंकाने वाला है. वे इसी साल 31 जनवरी को DGP के पद से रिटायर हुए थे. कुमार को ममता बनर्जी का बेहद वफादार आईपीएस अधिकारी माना जाता है. टीएमसी के इस कदम को एक संदेश के तौर पर देख रहा है, जो अफसर संकट के समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ खड़े रहे, पार्टी उन्हें नहीं भूलती.
किन संकटों में ‘ढाल’ बने राजीव कुमार
राजीव कुमार का नाम बंगाल की राजनीति और प्रशासन में कई बड़े विवादों से जुड़ा रहा है. 2013 में सामने आए शारदा चिटफंड घोटाले के बाद उन्होंने एसटीएफ प्रमुख के तौर पर जांच की कमान संभाली थी और मुख्य आरोपी सुदीप्त सेन की गिरफ्तारी में अहम भूमिका निभाई. हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला सीबीआई को सौंप दिया.
2019 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जब सीबीआई ने शारदा मामले में राजीव कुमार के घर छापा मारा, तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कोलकाता के एस्प्लानेड में धरने पर बैठना देशभर की सुर्खियां बना. करीब 70 घंटे चले इस अभूतपूर्व धरने को तब खत्म किया गया, जब सुप्रीम कोर्ट ने कुमार की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया. उसी दौर को टीएमसी में यह माना गया कि राजीव कुमार सरकार और मुख्यमंत्री के लिए एक ‘संस्थागत ढाल’ बनकर खड़े रहे.
एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘राजीव कुमार ने आतंकवाद विरोधी सेल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनकी इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस में महारत पूरे देश में मशहूर थी. कोलकाता पुलिस STF में रहते हुए उन्होंने आतंकवादियों को पकड़वाया, फर्जी नोट रैकेट तोड़े और आफताब अंसारी जैसे बड़े अपराधियों की गिरफ्तारी में अहम योगदान दिया. माओवाद विरोधी अभियानों में भी उनकी भूमिका अहम रही.’
टीएमसी के अन्य उम्मीदवारों पर भी नजर:
बाबुल सुप्रियो : पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री, जो मोदी सरकार में थे, अब टीएमसी में लौटकर दिल्ली पहुंचेंगे. उनकी बल्लीगंज सीट पर विधानसभा चुनाव में नया उम्मीदवार उतारा जाएगा.
मेनका गुरुस्वामी : सेक्शन 377 हटाने वाली ऐतिहासिक याचिका में प्रमुख भूमिका निभाने वाली वकील. टीएमसी उन्हें राज्यसभा में बीजेपी के खिलाफ मजबूत आवाज के रूप में देख रही है.
कोएल मलिक : बंगाली फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री और रंजीत मलिक की बेटी. टीएमसी फिल्म जगत से चेहरों को संसद में लाने की परंपरा जारी रख रही है.
राजीव कुमार को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने पर विपक्ष की प्रतिक्रिया तीखी रही. बंगाल बीजेपी ने एक्स पर लिखा, ‘टीएमसी के 50% उम्मीदवार गैर-बंगाली हैं. क्या ममता को बंगाली नहीं मिले? या वे उन लोगों को इनाम दे रही हैं जो उनके काले राज के गवाह हैं? यह उनकी प्रो-बंगाल छवि का पर्दाफाश है.”
पूर्व सीपीएम सांसद सुजन चक्रवर्ती ने एक्स पर टिप्पणी की, ‘जैसे बीजेपी के पास रंजन गोगोई हैं, वैसे ही टीएमसी के पास राजीव कुमार हैं. न राज्य के, न प्रशासन के, बल्कि टीएमसी के रंग में रंगे हुए. न्यायपालिका और प्रशासन में राजनीतिक दलाली का डरावना चेहरा साफ दिख रहा है. संविधान की आत्मा को नष्ट करने के खेल में बीजेपी और टीएमसी दोनों बराबर माहिर हैं.’
ममता का संदेश और चुनावी गणित
टीएमसी नेताओं का कहना है कि राजीव कुमार को राज्यसभा भेजना केवल एक नामांकन नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों के लिए स्पष्ट संदेश है- वफादारी और साथ खड़े रहने की कीमत पार्टी चुकाती है. ऐसे समय में जब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, यह फैसला नौकरशाही के भीतर भी राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
राज्यसभा में राजीव कुमार की एंट्री से राजनीतिक हलचल तेज है. यह सीटें 2 अप्रैल को खाली होंगी, जब सुब्रत बक्शी, रितब्रत बनर्जी, साकेत गोखले और सीपीएम के विकास रंजन भट्टाचार्य का कार्यकाल खत्म होगा. पांचवीं सीट मौसम बेनजीर नूर के इस्तीफे से खाली हुई, जो बाद में कांग्रेस में शामिल हो गईं.


