अफ़गानिस्तान में बामियान की गौतम बुद्ध की मूर्ति के टूटने के 25 साल पूरे होने पर नागपुर में मूर्ति की एक रेप्लिका बनाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री फडणवीस ने गवर्नर को दिया। नागपुर शहर एक ऐतिहासिक जगह है जहाँ डॉ. आंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाया और इसे फिर से ज़िंदा किया। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि इस पहल से दुनिया में शांति का संदेश जाएगा और भारत-जापान दोस्ती का एक प्रतीक बनेगा।
मुख्यमंत्री ने अलग-अलग फील्ड के डेलीगेशन मुंबई आने के लिए जापानी में ‘अरिगातो गोज़ाइमास’ को धन्यवाद दिया।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधिमंडलों के मुंबई आने पर जापानी भाषा में ‘अरिगातो गोजाइमास’ कहकर आभार व्यक्त किया। जापान के वाकायामा प्रांत के राज्यपाल मियाज़ाकी इज़ुमी ने जापानी प्रतिनिधिमंडल के साथ होटल ताज महल में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। इस अवसर पर महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष अधिवक्ता राहुल नार्वेकर, जापान के वाणिज्य दूत यागी कोजी, वाकायामा विधानसभा के उपाध्यक्ष अकिज़ुकी फुमिनारी और जापान सरकार, विधायिका, संस्कृति, खेल, उद्योग आदि के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

कोयासन विश्वविद्यालय में भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण किया गया। जापान यात्रा के दौरान वाकायामा और कोयासन की यादें साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दोनों देशों के बीच मित्रता का प्रतीक है। 2023 में वाकायामा के दिवंगत राज्यपाल की उपस्थिति में सूमो पहलवानों की टीम मुंबई आई थी। इस वक़्त गेटवे ऑफ इंडिया क्षेत्र में सूमो और भारतीय कुश्ती के प्रदर्शन प्रस्तुत किए गए, जिसमें नागरिकों की सहज प्रतिक्रिया को याद किया गया। वर्तमान में जापान के सूमो पहलवान पुणे के बालेवाड़ी खेल परिसर में प्रशिक्षण ले रहे हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि खेल के क्षेत्र में आदान-प्रदान से दोनों देशों को बेहतर खिलाड़ी तैयार करने में मदद मिलेगी।
जापान के दिवंगत प्रधानमंत्री शिंजो आबे को याद करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि उनके कार्यकाल में भारत के साथ मित्रता मजबूत हुई। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं उनके कार्यकाल में शुरू हुईं। उन्होंने यह भी कहा कि 40 किलोमीटर लंबी भूमिगत मेट्रो, 22 किलोमीटर लंबा समुद्री पुल और देश का सबसे बड़ा समुद्री पुल बनाया गया।
महाराष्ट्र-वाकायामा संबंध नई ऊंचाइयों पर
वाकायामा के राज्यपाल मियाज़ाकी इज़ुमी ने महाराष्ट्र और वाकायामा के बीच हुए समझौते का नवीनीकरण करते हुए नए क्षेत्रों में सहयोग की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा, ‘वाकायामा जापान में महाराष्ट्र का प्रवेश द्वार है’ और इससे महाराष्ट्र-वाकायामा संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंचेंगे।राज्यपाल मियाज़ाकी इज़ुमी ने उल्लेख किया कि 2013 में पर्यटन और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में हुए अनुबंध के बाद, पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, वैश्विक धरोहर स्थलों के संरक्षण के साथ-साथ व्यापार और उद्योग क्षेत्रों में निरंतर सहयोग जारी रहेगा। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को दिसंबर 2023 में कोयासन विश्वविद्यालय से मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि वाकायामा प्रांतीय विधानसभा के सदस्यों ने भारत-जापान मित्रता को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष समूह का गठन किया है।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (फिक्की) द्वारा ठाणे में आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से उद्योग और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा नागपुर में बामियान बुद्ध प्रतिमा की प्रतिकृति बनाने के प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की और आगे की चर्चा के लिए तत्परता भी जताई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विशेष रूप से कोयासन और वाकायामा के दर्शनीय स्थलों के संबंध में भविष्य में सहयोग की आशा व्यक्त की.
जानें बामियान के बुद्ध का इतिहास
चौथी और पांचवीं शताब्दी में बनी बुद्ध की दो खडी मूर्तियां थी जो अफ़ग़ानिस्तान के बामयान में स्थित थी। ये काबुल के उत्तर पश्चिम दिशा में २३० किलोमीटर पर, और ८२०० फीट की ऊंचाई पर थीं । इनमें से छोटी मूर्ति सन् ५०७ में और बडी मूर्ति सन् ५५४ में निर्मित थी। ये क्रमश: ३५ मीटर और ५३ मीटर की ऊंचाई की थी।
मार्च २००१ में अफ़ग़ानिस्तान के जिहादी संगठन तालिबान के नेता मुल्ला मोहम्मद उमर के कहने पर डाइनेमाइट से इन्हें उडा दिया गया। बामियान के हिन्दु कुश पर्वत श्रृंखलाओं में बनी ये मुर्तियां कच्चे लाल रेत, मिट्टी, कंकड़, क्वार्ट्ज, बलुआ पत्थर और चूना पत्थर जैसे समूह से बनीं थी निर्माण के बाद बदलते शासकों के कारण इन का कभी रखरखाव नहीं हुआ। इस क्षेत्र में वार्षिक वर्षा कम होती है। लेकिन पिघलते बर्फ से बने पानी की वजह से मूर्तियों का नुकसान अधिक हुआ हैं। इस क्षेत्र में भूकंप की संभावना ज्यादा है और ये कई झटके प्राप्त करता है।


