तेलंगाना नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने विपक्षी बीआरएस और भाजपा को काफी पीछे कर दिया है। तेलंगाना में हुए नगर निगम और नगरपालिका चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से कराए गए हैं। 11 फरवरी को हुए मतदान में शामिल 116 नगर पालिकाओं के 2,582 वार्डों में से कांग्रेस ने अधिकांश पर कब्जा कर लिया है। मतगणना से पहले हुए एग्जिट पोल ने शहरी स्थानीय निकायों में कांग्रेस की बड़ी जीत की भविष्यवाणी की थी।
हैदराबाद : सरकार में वापसी के दो साल बाद, कांग्रेस ने शुक्रवार को तेलंगाना के शहरी परिदृश्य पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। 11 फरवरी को हुए मतदान में कांग्रेस 116 नगरपालिकाओं में से कम से कम 83 और सात नगर निगमों में से पांच में जीत हासिल करने की राह पर है। कांग्रेस ने शाम तक मंचरियाल, रामागुंडम और नालगोंडा नगर निगमों में बहुमत हासिल कर लिया और 60 सदस्यीय विधानसभा में 29 सीटों के साथ महबूबनगर सीट बीआरएस से छीनने के करीब पहुंच गई। पार्टी को अपने सहयोगी सीपीआई की मदद से कोथागुडेम सीट भी जीतने की उम्मीद है।
भाजपा ने करीमनगर और निजामाबाद नगर निगमों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सबको चौंका दिया और बीआरएस को खाली हाथ छोड़ दिया। नगर निगम अध्यक्षों और महापौरों का चुनाव 16 फरवरी को होगा।
चुनाव से जुड़ी मुख्य जानकारी:
वोटिंग का तरीका: तेलंगाना सरकार ने पारदर्शिता और सुगमता को ध्यान में रखते हुए EVM के बजाय पारंपरिक बैलेट पेपर से चुनाव कराने का निर्णय लिया था।
चुनाव की तारीख: मतदान 11 फरवरी 2026 को हुआ था।
परिणाम: चुनाव के नतीजे 13 फरवरी 2026 को घोषित किए गए, जिसमें कांग्रेस (INC) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
विजेता पार्टियाँ (वार्डों की संख्या):
कांग्रेस: 1,500 से अधिक वार्ड
BRS: लगभग 770+ वार्ड
BJP: 320+ वार्ड
यह चुनाव राज्य की 116 नगरपालिकाओं और 7 नगर निगमों के लिए आयोजित किए गए थे।
इससे पहले 2020 में भी कोरोना महामारी के कारण चुनाव बैलेट पेपर से ही हुए थे।
कांग्रेस का तेलंगाना में बढ़ता ग्राफ
123 शहरी स्थानीय निकायों के 2,996 वार्डों में से कांग्रेस को 1537 सीटें मिली हैं। जो 2020 के नगर निगम चुनावों में जीती गई सीटों से काफी ज्यादा हैं। कांग्रेस ने तब महज 569 सीटें जीती थीं। दिसंबर 2025 के ग्रामीण चुनावों में भी कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया था और अधिकांश पंचायतों में जीत हासिल की थी।
मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने इस नतीजे को पिछले दो वर्षों में कांग्रेस सरकार के कल्याण और विकास के एजेंडे की पुष्टि बताया। मतदाताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा कि इस जनादेश ने सरकार की जिम्मेदारी बढ़ा दी है।
किसका बढ़ा ग्राफ और किसका गिरा नीचे?
बीआरएस ने 2020 में 1686 वार्ड जीते थे। इस बार के चुनाव में बीएसएस को महज 781 वार्ड में जीत मिली है। इसके अलावा 15 नगर पालिकाओं पर बीआरएस ने कब्जा जमाया। भाजपा ने पिछली बार के 293 वार्डों के मुकाबले इस बार 335 वार्ड जीते, जबकि एआईएमआईएम ने पिछले चुनावों के 87 सीटों के मुकाबले 70 सीटें जीतीं।
करीमनगर और निजामाबाद से बीजेपी के लिए गुड न्यूज
करीमनगर और निज़ामाबाद नगर निगमों में भाजपा जीत की ओर अग्रसर थी, क्योंकि 16 फरवरी को होने वाले मतदान निर्णायक साबित हुए। इन नगर निगमों में पदेन सदस्यों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 181 सीटें जीतीं। अब निर्दलीय प्रत्याशियों के अध्यक्ष और महापौर पदों के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है। कोथागुडेम में, जहां कांग्रेस और सीपीआई ने 22-22 सीटें जीतीं, महापौर का पद सीपीआई को मिलने की संभावना है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, दोनों पार्टियों के बीच महापौर उम्मीदवार के चयन को लेकर देर रात तक बातचीत जारी रही।


